VIDEO: लखीमपुर खीरी में गाजे-बाजे के साथ निकली 'सांड' की अंतिम यात्रा

निघासन तहसील के खैरहनी गांव के रहने वाले ग्रामीणों ने बताया कि सांड का नाम खड़क सिंह था. बीते 23 अक्टूबर को अपनी देखभाल करने वाले छोटेलाल की मौत के बाद इस सांड ने खाना-पीना छोड़ दिया था.

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 29, 2018, 4:58 PM IST
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Updated: October 29, 2018, 4:58 PM IST
लखीमपुर खीरी में गाजे-बाजे और नम आंखों के साथ एक सांड के अंतिम संस्कार में पूरा गांव उमड़ा. इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए सड़क के दोनों तरफ भारी तदद में भीड़ इकट्ठा थी. गांव वाले अपने चहेते सांड को अंतिम विदाई देने के लिए जब लोग उमड़े तो सब शोक में डूबे दिखे. बताया जाता है कि गांव के लोग इस सांड को नंदी का अवतार मानते थे.

निघासन तहसील के खैरहनी गांव के रहने वाले ग्रामीणों ने बताया कि सांड का नाम खड़क सिंह था. बीते 23 अक्टूबर को अपनी देखभाल करने वाले छोटेलाल की मौत के बाद इस सांड ने खाना-पीना छोड़ दिया था. करीब 10 साल पहले जब यह सांड सिर्फ 5 साल का था, तब गांव में भटकते हुए पहुंचा था. शांत स्वभाव के कारण कुछ ही दिन में यह गांव के सभी लोगों का पसंदीदा बन गया.

खड़क सिंह (सांड)


यही वजह है कि खड़क सिंह (सांड) की मौत पर गांव के लोगों ने धूमधाम से उसके अंतिम संस्कार की तैयारी की. बैंड बाजा बुलाकर पूरे विधि-विधान से ग्रामीणों ने सांड को अंतिम विदाई दी. यही नहीं शाम को करीब 1000 लोगों को खाना भी खिलाया गया. ग्रामीणों ने बताया कि सांड की याद में एक समाधि स्मारक बनाने के लिए 15 हजार रुपये जुटाए गए हैं. गांव के एक ग्रामीण सुरेश कहते हैं, 'वह हमारे परिवार के सदस्य की तरह था. जहां शव दफनाया गया है, वहीं उसकी याद में एक छोटा सा समाधि स्मारक बनवाया जाएगा.'

(रिपोर्ट: मनोज शर्मा)

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First published: October 29, 2018, 4:20 PM IST
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