दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडों का हुआ गृह प्रवेश!

1984 में दुधवा टाइगर रिजर्व में करीब 100 सालों से इस इलाके में लुप्त हो चुके गैंडों को असम से लाकर यहां सलूकापुर एरिया में बसाया गया था. 5 में से दो गैंडों की मौत हो गई थी. आज सलूकापुर में 33गैंडों का कुनबा यहां रह रहा है.

Prashant Pandey | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 12, 2018, 2:46 PM IST
दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडों का हुआ गृह प्रवेश!
गैंडे को ट्रैंकुलाइज कर दुधवा ले जाती टीम
Prashant Pandey | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 12, 2018, 2:46 PM IST
दुधवा टाइगर रिजर्व के लिए बुधवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज करने वाला दिन बन गया. धूमधाम से गैंडों का गृह प्रवेश कराया गया. पर गृह प्रवेश में न पण्डित थे न गाजा बाजा। था तो बस दुधवा का हिम्मती स्टाफ, बेहोशी के एक्सपर्ट्स और डॉक्टर. दुधवा के स्टाफ ने एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर तीन गैंडों को उनके नए आशियाने में पहुंचा दिया.  दुधवा के डिप्टी डायरेक्टर महावीर कौजलगी कहते हैं,'ये टीम वर्क था. हमने इसे बड़े कमाल के साथ कर दिखाया. इसमें हमारे स्टाफ और असम और लखनऊ से आए एक्सर्ट्स का बड़ा सहयोग रहा.'

दुधवा टाइगर रिजर्व में बेलरायां के भादी ताल में दो दिनों में 3 गैंडों को दुधवा के स्टाफ और असम से आए राइनो एक्सपर्ट्स ने बेहोश कर करीब 10 किलोमीटर दूर भादी ताल इलाके में शिफ्ट किया. अनुवांशिक प्रदूषण से बचने के लिए दुधवा के एक मेल और तीन फीमेल को करीब 15 सालों के इंतजार के बाद राइनो फेज टू में बने नाएं आशियाने में शिफ्ट किया गया है.

1984 में दुधवा टाइगर रिजर्व में करीब 100 सालों से इस इलाके में लुप्त हो चुके गैंडों को असम से लाकर यहां सलूकापुर एरिया में बसाया गया था. 5 में से दो गैंडों की मौत हो गई थी. इसके बाद दर्जन भर हाथियों के बदले नेपाल से तीन गैंडों को लाया गया. आज सलूकापुर में गैंडों का 33 का कुनबा यहां रह रहा है. मंगलवार को एक मादा को शिफ्ट करने के बाद बुधवार को असम से आए एक्सपर्ट्स ने स्टाफ के साथ एक नर व एक मादा गैंडा को नए आशियाने में सफ़लतापूयर्वक बेहोश कर पहुंचा दिया.

शिफ्टिंग कार्य में लगी पूरी टीम को एक गैंडें को ट्रैंकुलाइज करके फेज 2 परियोजना स्थल तक पहुंचाने में करीब पांच से छह घंटे का समय लग रहा है. बेलरायां रेंज के भादी ताल क्षेत्र में करीब 14.2 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को उर्जाचालित बाड़ से घेरकर गैंडों का नया आशियाना पहले ही तैयार किया जा चुका था. मंगलवार से इस नये घर में गैंडों को शिफ्ट करने को काम शुरू किया गया था.

पहले दिन टीम को पूरे दिन की कड़ी मशक्कत के बाद एक मादा गैंडा को टैंकुलाइज कर उसे फेज 2 परियोजना में पहुंचाने में कामयाबी हासिल हो सकी थी. बुधवार को दूसरे दिन शिफ्टिंग कार्य में लगी टीम सुबह होते ही सलूकापुर निकल गई. हाथियों पर सवार होकर टीम ने पूरे दिन की कड़ी मेहनत के बाद दो गैंडों को ट्रैंकुलाइज किया. ट्रैंकुलाइज किये गये दोनों गैंडों में एक नर व एक मादा गैंडा शामिल था. दोनों गैंडों को टीम ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच नये घर में पहुंचा दिया. दोनों दिनों के अभियान में अब तक तीन गैंडों को आर आर ए टू में पहुंचाया जा चुका है, जिसमें दो मादा व एक नर गैंडा शामिल हैं.
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