हाथी, टाइगर और वाइल्ड बोर से निपटने के लिए किसान ने बनाई बंदूक, कर रही कमाल
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हाथी, टाइगर और वाइल्ड बोर से निपटने के लिए किसान ने बनाई बंदूक, कर रही कमाल
लखीमपुर के किसान ने टाइगर और हाथी से निपटने के लिए गन बनाई है.

किसान दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) से निकलकर खेतों में आ रहे जंगली जानवरों को भगाने के लिए एक अनोखी बंदूक का इस्तेमाल कर रहा है. इसे लोग खासा पसंद कर रहे हैं.

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लखीमपुर खीरी. कहते हैं आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है. कुछ इसी तरीके का आविष्कार लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) में एक किसान ने किया है. यह किसान दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) से निकलकर खेतों में आ रहे जंगली जानवरों को भगाने के लिए एक अनोखी बंदूक का इस्तेमाल कर रहा है. इसे लोग खासा पसंद कर रहे हैं.

मामला लखीमपुर खीरी के दुधवा की तलहटी का है. दुधवा टाइगर रिजर्व 1084 वर्ग किलोमीटर में फैला है. दुधवा टाइगर रिजर्व की बफर जोन में बड़ी मात्रा में खेती की जाती है. अक्सर जंगल से बाहर निकलने वाले जानवर किसानों के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं. इस इलाके में बड़े पैमाने पर गन्ना, मक्का, गेहूं, धान की खेती की जाती है. जंगल से निकलने वाले हाथी, वाइल्ड बोर, हिरण, पाड़ा तमाम जानवर खेतों में आकर किसानों का भारी नुकसान करते हैं.

साथ ही इनके पीछे-पीछे टाइगर भी अक्सर खेतों में आ जाते हैं और किसानों पर हमला कर देते हैं. इन सब परेशानियों को देखते हुए एक किसान ने एक अनोखी प्लास्टिक की बंदूक बनाई है. इस बंदूक को बनाने में महज ₹200 का खर्च आता है. एक बंदूक से किसी तरीके का जंगली जानवरों को नुकसान नहीं होता है और इसके चलाने पर तेज आवाज होती है, जिससे डरकर कर जंगली जानवर वापस जंगल की तरफ चले जाते हैं और किसानों की फसल बच जाती है.



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बस इन चीजों से बन जाती है बंदूक

एक बंदूक बनाने के लिए प्लास्टिक के बने पाइप, एक घर में इस्तेमाल होने वाला लाइटर और बाजार में आसानी से उपलब्ध होने वाले कार्बेट का इस्तेमाल किया जाता है.



किसान को यहां से आया आइडिया

किसान कन्हैया लाल ने न्यूज़ 18 से बातचीत में ताया अक्सर जंगल से निकले जंगली जानवर खेतों के नुकसान कर देते थे, जिससे इनको आर्थिक और मानसिक रूप से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था. एक दिन वह एक वेल्डिंग की दुकान पर बैठे हुए थे. उन्होंने कार्बेट से वेल्डिंग होते समय एक पटाखे की आवाज उस मशीन से सुनी तो उन्होंने उसको देखकर इस बंदूक को बनाने का आइडिया दिमाग में आया.

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जानवरों को भी कोई नुकसान नहीं

उन्होंने सोचा कि अगर एक प्लास्टिक के पाइप में डालकर कार्बेट की गैस में अगर लाइटर से स्पार्क किया जाए तो तेज आवाज होती है और इस बंदूक के लिए न ही किसी तरह की लाइसेंस की जरूरत है, न ही जंगली जानवरों को नुकसान होता है. किसान का मानना है कि जंगली जानवर प्रकृति का दिया हुआ मनुष्य के लिए एक तोहफा हैं. इनको नुकसान नहीं किया जाना चाहिए और बिना नुकसान के फसल कोई भी बचाया जा सकता है. जबसे उन्होंने इस बंदूक का निर्माण किया है उसके बाद से उनकी फसल को किसी तरह का नुकसान नहीं हो रहा है.
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