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दिवाली पर उल्लुओं की जान पर आई आफत, बलि चढ़ाने के लिए लाखों खर्च कर खरीद रहे लोग

मनोज शर्मा | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 25, 2019, 3:31 PM IST
दिवाली पर उल्लुओं की जान पर आई आफत, बलि चढ़ाने के लिए लाखों खर्च कर खरीद रहे लोग
अन्धविश्वास के चलते लोग यह मानते हैं कि उल्लू की बली देने से मनोकामना पूर्ण होती है. (फाइल फोटो)

लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) में उल्लुओं के तस्कर एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं. इसके चलते रिजर्व को अलर्ट मोड पर रखा गया है.

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लखीमपुर खीरी. दीपावली (Deepawali) का त्योहार नजदीक आते ही उल्लुओं (Owl) की जान पर आफत बन आई है. हर साल दिवाली के मौके पर तंत्र साधना और सिद्धि पाने के लिए उल्लुओं की बलि (Sacrifice) देने संबंधी अंधविश्वास की वजह से लुप्तप्राय इस पक्षी की जान पर बन आती है. लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) में उल्लुओं की जान के दुश्मन एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं. इसे देखते हुए वन विभाग (Forest Department) को यहां अलर्ट मोड पर रखा गया है.

दुधवा में 12 प्रजाति के पाए जाते हैं उल्लू
लखीमपुर खीरी में इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे हुए दुधवा टाइगर रिजर्व में 12 प्रजातियों के उल्लू पाए जाते हैं, इनमे से कुछ प्रजाति बेहद दुर्लभ हैं. दिवाली के त्योहार के मद्देनजर दुधवा पार्क प्रशासन ने उल्लुओं की जान पर खतरा देखते हुए दुधवा पार्क को अलर्ट मोड पर रखा है. यहां रूटीन गश्त के साथ नाइट पेट्रोलिंग भी की जा रही है. जंगल के जिन इलाकों में वाहन नहीं जा पा रहा है, उन इलाकों में हाथी पर सवार होकर गश्त की जा रही है.

20 से 30 लाख रुपये में बिक रहे उल्लू

यूं तो उल्लू को माता लक्ष्मी का वाहन माना जाता है, लेकिन कुछ अंधविश्वासी तांत्रिक और अघोरियों का मानना है कि दिवाली के त्योहार की रात में विशेष नक्षत्र पर तंत्र-मंत्र क्रिया के द्वारा अगर उल्लू की बलि दी जाए तो मनोकामना पूर्ण होती है. दावा किया जा रहा है कि इसी अंधविश्वास के चलते दिल्ली, मुंबई समेत बड़े महानगरों में लोग एक उल्लू को 20 से 30 लाख रुपये में तस्करों से चोरी-छिपे खरीद रहे हैं. दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पुलिस ने दो दिन पहले दो लोगों को दुर्लभ प्रजाति के पांच उल्लुओं के साथ गिरफ्तार किया था. ये तस्कर एक अघोरी के माध्यम से इन्हें एक करोड़ से ज्यादा कीमत पर बेचने के लिए लाए थे, लेकिन समय रहते पुलिस ने दोनों तस्करों को गिरफ्तार कर लिया.

owl sacrifice on diwali
तंत्र साधना के लिए दी जाती है उल्लुओं की बलि (फोटो साभार- रविंद्र सिंह)


उल्लू से जुड़ा ये है अंधविश्वास
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दुधवा बफर जोन के डीएफओ अनिल पटेल कहते हैं कि दिवाली पर उल्लुओं की बलि देने की भ्रामक प्रथा सदियों से चली आ रही है. लोगों का मानना है कि उल्लुओं की बलि देने पर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. लेकिन लोगों को यह समझना होगा कि किसी जानवर की बलि देने से धन की प्राप्ति नहीं होती. उसके लिए कड़ी मेहनत करनी होती है. हालांकि दिवाली पर वन्य जीवों के तस्करों के मूवमेंट को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है.

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गाजियाबाद से बरामद किए गए उल्लू


उधर एक अघोरी का कहना है कि दिवाली में एक अलग पूजा होती है. इस दिन साधु और तांत्रिक तंत्र सिद्धि के लिए 42 दिनों की विशेष पूजा करते हैं. पूजा के आखिरी दिन उल्लुओं की बलि दी जाती है. बलि देने के बाद ही मंत्र सिद्ध होता है और यह मंत्र काफी काम आता है. ज्यादातर यह पूजा अघोरी ही करते हैं.

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First published: October 25, 2019, 2:21 PM IST
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