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80 घंटे बाद थाने में खुला तिजोरी का तिलिस्म तो हैरान रह गई पुलिस!

ETV UP/Uttarakhand
Updated: November 1, 2017, 8:04 PM IST

खीरी जिले के एक गांव में एक तिजोरी निकली है. तिजोरी के तिलिस्म को खोलने के लिए पुलिस से लेकर प्रशासन तक के अफसरों का पसीना निकल आया.

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खीरी जिले के एक गांव में एक तिजोरी निकली है. तिजोरी के तिलिस्म को खोलने के लिए पुलिस से लेकर प्रशासन तक के अफसरों का पसीना निकल आया. इस रहस्य से भरी तिजोरी में कोई चाबी नहीं लग रही थी. पुलिस पड़ताल में लगी थी. इस तिजोरी को लेकर यूपी की पुलिस हैरान थी. प्रशासन परेशान था. लोग भी हैरत में कि आखिर ये तिजोरी किसकी है?

खीरी थाना इलाके के गोपालपुर गांव में ये तिजोरी एक सूनसान जगह पर पड़ी मिली. तिजोरी का वजन इतना था कि बमुश्किल कई लोगों ने मिलकर इसे थाने पर पहुंचाया. तिजोरी और इसके अंदर क्या है? इसको लेकर खीरी पुलिस से लेकर जिसे भी तिजोरी के बारे में पता चला वो जानने को बेताब था. मामला तिजोरी का था तो पुलिस भी कदम फूंक-फूंक रख रही थी. देखने में तिजोरी बहुत पुरानी लग रही थी जैसे अंग्रेजों के जमाने की हो. लेकिन तिजोरी पर लगे इसके ताले न खराब हुए और न ही वजन कम हुआ.

लोगों की सहायता से तिजोरी खीरी थाने पर आ चुकी थी, लेकिन इसका रहस्य अभी भी बरकरार था. आखिर इस तिजोरी में क्या भरा है? इसका वजन इतना क्यों? क्या तिजोरी में कोई खजाना है या कोई और कीमती चीज? थाने पर तिजोरी को लेकर तरह-तरह की बातें होनी लगी. पर इसका ताला खुलने का नाम नहीं ले रहा था. पुलिस थक हार चुकी थी. थानेदार ने तिजोरी को खुलवाने के लिए डीएम को पत्र लिखा. तिजोरी का राज खोलने को डीएम ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई.

एसडीएम, सीओ, खीरी थाना पहुंचे. तिजोरी के लॉक खोलने की लाख कोशिश की पर तिजोरी को टस से मस नहीं कर पाए. हारकर तय ये हुआ कि तिजोरी का राज जानने के लिए गैस कटर से कटाया जाए. तिजोरी को किसी तरह गैस कटर से काटा गया तो तिजोरी के अंदर एक और तिजोरी निकली. तिजोरी का राज अब भी जस का तस बना हुआ था. तिजोरी में क्या है? ये जानने को सब बेताब थे. पुलिस के लिए ये तिजोरी सरदर्द बनी हुई थी, वहीं प्रशासन के लिए एक पहेली.

72 घण्टों से ज्यादा का वक्त बीत चुका था लेकिन तिजोरी का राज अब भी राज ही बना था. अब तिजोरी को फिर से गैस कटर से काटना शुरू हुआ. तिजोरी की दूसरी परत काटी गई तो सब हैरान थे, वहां मौजूद लोगों की आंखे फटी की फटी रह गईं. पुलिस जिस तिजोरी के राज को पर्दाफाश करने की उम्मीद में थी वो उम्मीद दूसरी परत के साथ भी जाती रही. तिजोरी का राज अब और गहरा गया था. तिजोरी अंग्रेजों के जमाने की है, या किसी रजवाड़े की, इसको लेकर भी तरह तरह की आशंकाए बनी हुई थीं. पुलिस 80 घण्टों की मेहनत के बाद भी खाली हाथ थी.

तिजोरी की दूसरी परत काटने में पुलिस को सफतला मिली, लेकिन फिर एक बार सब हैरान थे. इस बार तिजोरी में एक तीसरी तिजोरी निकली. तिजोरी का लॉक बंद था. अब थाने पर मौजूद अधिकारियों सहित सभी लोगों की बेताबी और बढ़ती जा रही थी. फैसला लिया गया कि इस तीसरी तिजोरी को भी काटा जाए. गैस कटर चलने लगा और थोड़ी ही देर में गैस कटर बंद हो गया.

अब तिजोरी की तीसरी परत भी काटी जा चुकी थी. फिर तिजोरी का लॉकर खोला गया तो लॉकर से एक फटा, पुराना दस्तावेज निकला. ये दस्तावेज किसी बैंक का दस्तावेज लग रहा था. तिजोरी में न खजाना निकला, न हीरे जवाहरात या सोना. तिजोरी में निकला तो फटा पुराना कागज. कागज पर कोऑपरेटिव बैंक और सोसाइटी की कुछ इबारत पढ़ने में आ रही थी. पुलिस अब इस नतीजे पर पहुंची कि शायद ये तिजोरी बैंक से चोरी की गई होगी. पर चोर इसे खोल नहीं पाए होंगे और फेंक कर भाग गए हों. अब बैंको से चोरियों के डिटेल पुलिस खंगाल रही है. पर तिजोरी का राज पुलिस के लिए 80 घंटे से ज्यादा सिरदर्दी बना रहा और अभी भी गुत्थी उलझी ही है कि आखिर ये तिजोरी है किसकी. अब पुलिस इस दस्तावेज को पढ़ने की कोशिश में लगी है और पड़ताल में भी.

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First published: November 1, 2017, 8:04 PM IST
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