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लखीमपुर खीरी: 15 गांवों में आतंक का पर्याय बने तेंदुए को वन विभाग ने पकड़ा

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 19, 2019, 12:32 PM IST
लखीमपुर खीरी: 15 गांवों में आतंक का पर्याय बने तेंदुए को वन विभाग ने पकड़ा
लखीमपुर खीरी के गांवों में दहशत फ़ैलाने वाला तेंदुआ पकड़ा गया (फ़ाइल तस्वीर)

लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) के धौरहरा रेंज (Dhaurahara Range) के तकरीबन 15 गांव में पिछले एक महीने से तेंदुए (Leopard) ने आतंक मचाया हुआ था. आठ साल के एक बच्चे समेत कई मवेशियों को ये तेंदुआ अपना निवाला बना चुका था.

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लखीमपुर. जनपद लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) के धौराहरा रेंज (Dhaurahara Range) में पिछले एक महीने से 15 गांव में आतंक का पर्याय बने तेंदुए को वन विभाग ने सोमवार व मंगलवार की दरमियानी रात में पकड़ने में सफलता हासिल कर ली है. पिंजरे में कैद हुए तेंदुए (Leopard) ने पिछले माह एक बच्चे समेत 8 मवेशियों को अपना निवाला बनाया था. मेडिकल परीक्षण के बाद ये तय किया जाएगा कि तेंदुए को ज़ू में भेजा जाएगा या फिर वापस दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) के जंगलों में.

ऐसे फंसा पिजरे में
बताया जा रहा है कि लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) के धौरहरा रेंज (Dhaurahara Range) के तकरीबन 15 गांव में पिछले एक महीने से तेंदुए ने आतंक मचाया हुआ था. आठ साल के एक बच्चे समेत कई मवेशियों को ये तेंदुआ अपना निवाला बना चुका था. धौराहरा रेंज के वन्य कर्मियों ने तेंदुए (Leopard) को पकड़ने के लिए डब्ल्यूटीआई (WTI )की मदद से इलाके में पिंजरा लगाया था. यह पिंजरा रेंज के बैलागढ़ी गांव के पास एक गन्ने के खेत में लगाया गया था. वन कर्मियों ने पिंजरे को प्राकृतिक रूप देने के लिए पूरी तरीके से घास-फूस से ढक दिया था. सोमवार देर रात लगभग 2 बजे शिकार की तलाश में पहुंचे तेंदुए ने पिंजरे के अंदर बंधी बकरी को देखा और उसे अपना निवाला बनाने के लिए पिंजरे में घुस गया. तेंदुए के अंदर घुसते ही पिंजरे का ऑटोमेटिक लॉक लगने की से पिंजरा बंद हो गया. जिसके बाद पिंजरे के अंदर फंसा तेंदुआ जोर-जोर से दहाड़ लगाने लगा. तेंदुए की आवाज सुनकर नाइट वाच में लगे वन्य विभाग के लोगों को पिजरे में तेंदुए के फंसने की जानकारी मिली.

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लखीमपुर खीरी: पकड़ा गया तेंदुआ


दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) के बफर जोन के डिपो अनिल पटेल ने News18 से बातचीत में बताया कि पहले तेंदुए का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा उसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि तेंदुए को दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़ा जाएगा या फिर लखनऊ चिड़ियाघर (Lucknow Zoo) में भेजा जाएगा. अगर तेंदुआ नरभक्षी हो गया होगा तो ऐसी दशा में उसे जंगल में वापस नहीं छोड़ा जा सकता क्योंकि फिर उसका खतरा बना रहेगा ऐसे में फिर उसे किसी ज़ू में रखा जाना ही उचित होगा. फिलहाल आतंक का पर्याय बने तेंदुए के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है.

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First published: November 19, 2019, 12:29 PM IST
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