Lockdown: UP के इस परिवार ने तीन बच्चों संग 450 KM. का सफर पैदल किया पूरा
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Lockdown: UP के इस परिवार ने तीन बच्चों संग 450 KM. का सफर पैदल किया पूरा
इन्हें फोन करके लोकेशन जानी जाती है और परेशानी पूछी जाती है.

लॉक डाउन (Lockdown) के चलते मजदूरी के काम में अपना एक हाथ गवां चुके बहराइच जिले (Bahraich District) के एक मजदूर ने अपने तीन मासूम बच्चों और पत्नी के साथ दिल्ली से लखीमपुर खीरी (Lakhimpur khiri) का करीब 450 किलोमीटर का सफर पैदल ही पूरा किया.

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लखीमपुर खीरी. कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर सही मायनों में अगर किसी पर टूटा है तो वह मजदूरों पर ही टूटा है. उनकी रोजी रोटी छिन गई और उन्हें आसरा देने के लिए उनके पास छत तक नहीं है. स्थिति यह आ गई है कि भूखे पेट अपने-अपने गांव तक तक लम्बा सफर करना पड़ रहा है. मजदूर अपने मासूमों के साथ सैकड़ों किलोमीटर तक का सफर तय कर जैसे तैसे अपने घर अपनों के बीच पहुंच रहे हैं. लॉक डाउन के चलते मजदूरी के काम में अपना एक हाथ गवां चुके बहराइच जिले के एक मजदूर ने अपने तीन मासूम बच्चों और पत्नी के साथ दिल्ली से लखीमपुर खीरी (Lakhimpur kheri) का करीब 450 किलोमीटर का सफर पैदल ही पूरा किया.

भूखे और प्यासे ही पूरा किया सफर

इस परिवार का बड़ा बेटा चिलचिलाती धूप और उमस वाली गर्मी में अपने सिर के ऊपर करीब 30 किलो वजन का बैग लादे चलता रहा तो वहीं एक बच्चा अपने पिता के कंधों पर ही पूरे सफर में बैठा रहा. 3 साल के मासूम बच्चे ने मां की पीठ पर लदे बैग के ऊपर बैठकर ही सफर पूरा किया. मासूम बच्चों और माता-पिता का कहना है कि जब उन्होंने पुरानी दिल्ली से सफर शुरू किया था तो दिल्ली सरकार और दिल्ली के रहने वाले लोगों ने तो उन्हें रास्ते में खाना और पानी के लिए पूछा भी लेकिन उत्तर प्रदेश की सीमा में आते ही उनसे किसी ने खाने के बारे में नहीं पूछा. उन्होंने बताया कि वे पैदल ही सफ़र करते लखीमपुर तक पहुंच गए हैं.



650 किलोमीटर का सफर पैदल किया पूरा



मजदूरों का प्रदेश में पैदल आने का सिलसिला लगातार बना हुआ है. राजस्थान के जयपुर से लखीमपुर तक का 650 किलोमीटर का सफर कर रोहित और विजय जैसे तैसे लखीमपुर तो पहुंच गए हैं पर उनके पैरों में छाले पड़ गए हैं. अभी भी उनका आगे का सफर पैदल ही जारी है. उनको यह भी पता नहीं है कि आगे खाने को कुछ मिलेगा या नहीं मिलेगा. उन्होंने अभी तक 650 किलोमीटर का सफर तय कर लिया है जिसमें कभी किसी ने इनकी हालत पर तरस खा कर कुछ खाने को दे दिया तो खा लिया वरना पानी पीकर ही काम चलाया. सरकार की तरफ से मजदूरों को कोई मदद हासिल नही हुई.

200 किलोमीटर का सफर अभी भी है बाकी

इस परिवार के सभी सदस्यों में बेबसी साफ देखी जा सकती है. पूरे परिवार का शरीर बदन दर्द से टूट रहा है लेकिन अभी 200 किलोमीटर का सफर और पूरा करना है. घर पहुंचने का हौसला अभी भी इन मजदूरों में बचा हुआ है.

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