यूपी के इस गांव में दलितों के बाल नहीं काटते मुस्लिम नाई

दलितों को बाल कटवाने हों तो उन्हें या तो मोहम्मदी या शाहजहांपुर 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. कुछ दिनों पहले एक दलित युवक पर नाइयों ने इस लिए हमला कर दिया था कि इसने बाल न काटने की शिकायत पुलिस से की थी.

Prashant Pandey | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 16, 2018, 12:10 PM IST
यूपी के इस गांव में दलितों के बाल नहीं काटते मुस्लिम नाई
गांव से दूर बाल कटवाते दलित समाज के बुजुर्ग की फोटो.
Prashant Pandey | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 16, 2018, 12:10 PM IST
यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में एक गांव ऐसा है, जहां आज भी दलितों के बाल खासकर मुस्लिम नाई नहीं काटते है, जिससे दलितों को बाल कटवाने 20-30 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. बताया जाता है उक्त गांव में आज भी जाति प्रथा और छुआछूत चरम पर है, जिसके चलते रैदास जाति के लोगों को हजामत व बालों की कटिंग के लिए दूसरे इलाके की शरण लेनी पड़ती है.

रिपोर्ट के मुताबिक मामला मोहम्मदी तहसील के सिसौरा नासिर गांव का हैं. इस गांव में ज्यादातर घर मुस्लिमों के हैं. यहा ज्यादातर नाई भी मुस्लिम ही हैं. लेकिन वे दलितों के बाल नहीं काटते. लिहाजा दलितों को बाल कटवाने के लिए पड़ोसी गांव मोहम्मदी या गांव से 30 किलोमीटर दूर शाहजहांपुर जाना पड़ता है.

बताते हैं कुछ दिनों पहले रोहित नाम के एक दलित युवक की नाइयों ने पिटाई कर दी थी. बाद में दलित युवक ने इसकी शिकायत पुलिस से भी की थी. रोहित बताते है कि 5-6 की संख्या में नाईयों ने उन पर जानलेवा हमला किया. हालांकि पुलिस से शिकायत के बाद भी अभी तक रोहित को इंसाफ नहीं मिला है.

नाईयों के हमले में घायल रोहित घर पर अपना इलाज करवा रहा है. जबकि पुलिस ने नाईयों को समझा-बुझाकर घर भेज दिया, लेकिन रैदास जाति के लोगों के खिलाफ छुआछूत की दीवार आज भी खड़ी है, जो आजादी के 70 साल बाद भी बदस्तूर जारी है.

घायल रोहित की फोटो.


दलितों के बाल नहीं काटने के मामले में गांव में रहने वाले राजेश वाल्मीकि कहते है कि आजादी के 70 साल बाद भी उसके गांव में रैदास समुदाय के खिलाफ छुआछूत चरम सीमा पर है. राजेश बताते हैं कि छुआछूत की वजह से वाल्मीकि समाज के दर्जनों परिवार गांव में बाल नहीं कटवाते हैं.

पुलिस से शिकायत करने पर राजेश वाल्मीकि कहते है कि पुलिस कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करती है. उन्होंने योगी सरकार से मांग करते हुए कहा कि वाल्मीकि समाज को भी बाल और दाढ़ी बनवाने की आजादी मिलनी चाहिए. क्योंकि मुस्लिम नाई दलितों के बाल-दाढ़ी नहीं काटते हैं.

मुस्लिम समाज के बुजुर्ग की फोटो.


हालांकि इस मामले में मुस्लिम समाज के नाईयों का अपना तर्क है. वो कहते है कि उक्त प्रथा इस गांव में सदियों से चली आ रही है. नाई समाज के बुजुर्ग के मुताबिक अब जमाना बदल गया है. उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में सब कुछ ठीक हो जाएगा.

दलित समाज के बाल नहीं काटने के मामले में जब न्यूज18 ने लखीमपुर खीरी के डीएम शैलेन्द्र कुमार सिंह से बात की. डीएम ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में पहले ही आ चुका है और उन्होंने सीओ और एसडीएम को निर्देशित किया है कि गांव में जाकर दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर बातचीत करें.

बकौल डीएम, अगर मुस्लिम समाज के नाईयों ने दलिलों के बाल काटने से मना किया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. शैलेन्द्र कुमार सिंह दावे के साथ कहते है कि अगर इस तरह का कोई व्यक्ति दुस्साहस कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी.

लखीमपुर खीरी के डीएम शैलेन्द्र कुमार सिंह की फोटो.


फिलहाल,  सिसौरा नासिर गांव में वाल्मिकी समाज के बुजुर्गों से लेकर नौजवान तक छुआछूत से पीड़ित हैं और अपने वाल्मिकी समाज के खिलाफ हो रही ज्यादिती से आहत हैं.

 

 
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