शिकारियों के चंगुल से छूटा मगर 113 दिन तक गले में फंदे से जूझता रहा टाइगर

लखीमपुर खीरी: दुधवा टाइगर रिजर्व में वन विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद टाइगर के गले से फंदा हटा दिया है.

लखीमपुर खीरी: दुधवा टाइगर रिजर्व में वन विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद टाइगर के गले से फंदा हटा दिया है.

Lakhimpur Kheri News: दुधवा टाइगर रिजर्व ने शिकारियों के चंगुल से बचे एक टाइगर को वन विभाग ने करीब 113 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद गले में फंसे फंदे से मुक्त करा दिया है. टाइगर अब स्वस्थ है.

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मनोज शर्मा

लखीमपुर खीरी. उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) के दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) की किशनपुर रेंज में शिकारियों के चंगुल से छूट कर भागे टाइगर (Tiger) की गर्दन में फंसे नायलॉन के फंदे को वन्य विभाग की टीम ने ट्रेंकुलाइज कर रस्सी के फंदे को टाइगर के गले से निकाला.

मामला लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर रेंज का है. यहां शिकारियों द्वारा टाइगर के शिकार के लिए लगाया गया नायलॉन का फंदे करीब 113 दिन पहले एक टाइगर की गर्दन फंस गया था. उस समय टाइगर ने जैसे-तैसे झटका मारकर नायलॉन की रस्सी को तोड़ दिया लेकिन वह फंदा टाइगर के गले में फंसा रह गया. वन विभाग की टीम को जब कैमरा ट्रैप द्वारा टाइगर के गले में नायलॉन की रस्सी फंसे होने की जानकारी लगी तो वन विभाग की टीम ने दुधवा टाइगर रिजर्व में सर्च अभियान चलाया.

दो शिकारियों को जेल भेजा, मगर टाइगर का फंदा न  निकल सका
इस दौरान वन विभाग ने फंदा लगाने वाले दो शिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया लेकिन टाइगर को ट्रेंकुलाइज करने में वन विभाग को सफलता नहीं मिली. यूं तो टाइगर कई बार विभाग की टीम के सामने आया लेकिन वन विभाग की ट्रेंकुलाइज स्पेशलिस्ट टीम टाइगर की सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेंकुलाइज करने में सफल नहीं हो पाई क्योंकि टाइगर की अपनी लोकेशन लगातार बदल रहा था. गलत जगह पर डॉट लगने से टाइगर की जान को खतरा हो सकता था. जैसे-जैसे समय बीत रहा था, वैसे-वैसे टाइगर की गले की गले में फंसी रस्सी से इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ता जा रहा था.

इंफेक्शन के बढ़ते खतरे के बीच वन विभाग ने जारी रखा प्रयास

वन विभाग की लगातार चिंता बढ़ती जा रही थी. इस बीच कल देर शाम टाइगर किशनपुर रेंज में 14 नंबर कंपार्टमेंट में इस टाइगर का मूवमेंट देखा गया. वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू अभियान चला. हाथियों की मदद से इस टाइगर को ट्रेंकुलाइज करने में कामयाब हो गए. डॉक्टरों की एक टीम ने टाइगर गले में पड़ी रस्सी को निकाला और रस्सी से बने घाव का उपचार करने के बाद इस टाइगर को एक पिंजरे में बंद कर दिया. यहां उसके उसके स्वास्थ्य के उतार-चढ़ाव पर निगरानी की गई. लगातार 7 से 8 घंटे निगरानी करने के बाद सुबह 4 बजे इस टाइगर को किशनपुर रेंज के जंगलों में छोड़ दिया गया.



113 दिन बाद रेस्क्यू मिशन में मिली सफलता: फील्ड डायरेक्टर

दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का कहना है कि 113 दिन की कड़ी मेहनत के बाद हमारी टीम से टाइगर को सफलतापूर्वक रेस्क्यू का बेहोश करने में करने में सफल हो पाई. इसकी रस्सी गले में पड़ी रस्सी को निकाल दिया गया है. गले में हुए घाव का उपचार कर दिया गया है. डॉक्टरों की टीम की निगरानी में टाइगर को जंगल में छोड़ा गया है. हमारी टीम लगातार इसके स्वास्थ्य पर निगरानी करती रहेगी.
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