दुधवा टाइगर रिजर्व में 'नेपोलियन' बढ़ाएगा गैंडों का वंश!

गैंडों को रिलोकेट करने का देश भर में ये अनूठा और अपनी तरह का पूरा साइंटिफिक प्रयास है.

Prashant Pandey | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 18, 2018, 1:19 PM IST
दुधवा टाइगर रिजर्व में 'नेपोलियन' बढ़ाएगा गैंडों का वंश!
दुधवा में शिफ्टिंग के दौरान नेपोलियन
Prashant Pandey | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 18, 2018, 1:19 PM IST
दुधवा टाइगर रिजर्व में 'नेपोलियन' अब गैंडों का वंश बढ़ाएगा. नेपोलियन पर दुधवा के अफसरों ने दांव लगाया है. दरअसल नेपोलियन नेपाल से आया भगोड़ा गैंडा है, जिससे दुधवा के स्टाफ को बड़ी उम्मीदें हैं. नेपोलियन को तीन मादाओं के साथ नए आशियाने में शिफ्ट करने के बाद अब उसकी हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है.

यूपी के दुधवा टाइगर रिजर्व में 9 से 14 अप्रैल के बीच असम से आए गैंडा एक्सपर्ट और दुधवा के फील्ड स्टाफ ने रात दिन एक करके डब्लूडब्लूएफ की मदद से चार गैंडों को नए घर में प्रवेश कराया. इसमें नर गैंडा वही नेपोलियन है, जो नेपाल का भगोड़ा है. नेपोलियन को नेपाल से भागकर आने के बाद दुधवा की आबोहवा खूब भाई. नेपोलियन दुधवा का ही होकर रह गया. दुधवा के स्टाफ और एक्सपर्ट्स की भी नेपोलियन उम्मीद बन गया. 15 सालों से प्रयास के बाद राइनो फेज टू बनकर तैयार हुआ. अब नर गैंडा नेपोलियन पर सबकी निगाहें लगी हैं कि कब नेपोलियन मादाओं के संसर्ग में आएगा और नई ब्रीड को जन्म देगा. जिससे अनुवांशिक खतरों को झेल रही गैंडों की वंशबेलि आगे बढ़ेगी.

दुधवा के डिप्टी डायरेक्टर महावीर कौजलगी कहते हैं,'हम पूरी तरह से आशान्वित हैं कि नेपोलियन से आने वाली नई सन्तति दुधवा में फ्रेश ब्लड की होगी.' दुधवा टाइगर रिजर्व में असम के काजीरंगा के बाद देश का पहला राइनो रिलोकेशन प्रोग्राम सफलतापूर्वक पिछले हफ्ते ही पूरा हुआ है.

गैंडों को रिलोकेट करने का देश भर में ये अनूठा और अपनी तरह का पूरा साइंटिफिक प्रयास है. दुधवा के डायरेक्टर सुनील चौधरी कहते हैं,'जंगली जानवरों की कोई बाउंड्री नहीं होती. हमने नेपोलियन के साथ मादाओं को इसीलिए शिफ्ट किया है कि फ्रेश ब्लड इंट्रोड्यूस हो सके. हम बारीकी से चारों पर नजर रख रहे हैं. हमने सब एडल्ट गैंडों को ही नए आशियाने के लिए चुना. इसमें नेपोलियन समेत तीन मादाएं हैं. आखिरी एन9 नाम की मादा को नए घर मे शिफ्ट करने के साथ ही आपरेशन राइनो फेज टू सफल हो गया.

दरअसल 1984 में दुधवा टाइगर रिजर्व में करीब 100 सालों बाद इस इलाके में लुप्त हो चुके गैंडों को असम से लाकर बसाया गया था. सलूकापुर में गैंडा पुनर्वासन केंद्र में पांच में से दो गैंडों की मौत हो गई थी. इसके बाद दर्जन भर हाथियों के बदले नेपाल से तीन गैंडों को लाया गया. 35 सालों में गैंडों का कुनबा बढ़कर 33 का हो गया है. इधर बांके नाम के नर से हुई सभी संतानों के चलते जानकार गैंडों में जेनेटिक प्रदूषण की आशंका जताने लगे थे. इसीलिए काफी प्रयासों से दुधवा में राइनो पार्ट 2 परियोजना को अमली जामा पहनाया गया.

अफ्रीका से बेहोशी की दवा मंगाकर गैंडों को बेहोश करके नेपोलियन समेत चार गैंडों को नए बाड़े में शिफ्ट किया गया. अब उम्मीद है नेपोलियन जब बाप बनेगा तो गैंडों की नई सन्तति स्वस्थ और निरोगी होगी. उम्मीद को पर लग चुके हैं. अब बेलरायां रेंज के भादी ताल के 14.2 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र से नेपोलियन पर सबकी निगाह है.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर