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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका, प्रभात गुप्ता हत्याकांड मामले में याचिका खारिज

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा को चर्चित प्रभात हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है.

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा को चर्चित प्रभात हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है.

Uttar Pradesh News: सुप्रीम कोर्ट ने निर्देशित किया है कि 10 नवंबर को अजय मिश्रा के वकील कोर्ट आए या वीडियो कॉन्फ्रेंस ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट-मनोज शर्मा

लखीमपुर खीरी. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा को चर्चित प्रभात हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री की आज उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें प्रभात हत्याकांड की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से हटाकर इलाहाबाद बेंच में ट्रांसफर की जाए. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की याचिका को खारिज कर दिया.

अब 10 नवंबर को लखनऊ हाईकोर्ट बेंच में अंतिम सुनवाई होगी. 10 नवंबर को इस मामले में अहम दिन होगा. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देशित किया है कि 10 नवंबर को अजय मिश्रा  के वकील कोर्ट आए या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी सुनवाई में शामिल हो सकते हैं क्योंकि इससे पूर्व भी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के वकील के बीमार होने के चलते इसलिए सुनवाई टल गई थी.

अजय मिश्रा टेनी पर चल रहा है 302 का मुकदमा 

दरअसल लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में सन 2000 में 8 जुलाई के महीने में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेता प्रभात गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी , शशि भूषण,राकेश डालू, सुभाष सहित चार लोग पर हत्या में शामिल होने का आरोप है. इस मामले में उन चारों पर 302 का मुकदमा चल रहा है. मृतक प्रभात गुप्ता के छोटे भाई राजीव गुप्ता ने बताया कि 22 साल के लंबे समय बाद अब उनको लगता है उनको न्याय मिलेगा. 10 नवंबर को अब अंतिम सुनवाई होनी है, उनको लगता है कि समय ज्यादा जरूर लगा, लेकिन उनके साथ न्याय जरूर होगा. उनको देश की न्यायपालिका और कानून व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास है कि उनके साथ न्याय होगा.

जानें कब-कब क्या हुआ 
बता दें, 8 जुलाई 2000 को तिकुनिया में प्रभात गुप्ता की गोली मार कर हत्या हुई. जिसमें तिकुनिया थाने में FIR 41/2000 दर्ज हुई और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा समेत 4 लोग नामज़द हुए थे. 29 मार्च 2004 को गवाह होने के बाद भी लखीमपुर न्यायालय से केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी को दोष मुक्त कर दिया गया. 15 मई 2004 को बरी किए गए आदेश के ख़िलाफ़ रिवीज़न पिटीशन हाईकोर्ट में प्रभात गुप्ता के पिता संतोष गुप्ता ने दाखिल कर लखीमपुर न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए हत्या में तथ्यों को स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया. साथ ही राज्य सरकार की ओर से भी उच्च न्यायालय में बरी किए जाने के विरुद्ध अपील दाखिल की गई. 2004 में ही संतोष गुप्ता की याचिका स्वीकार हो गई. साथ ही 2013 में चीफ़ जस्टिस ने आदेश दिया की मुक़दमा सुना जाए.

2005 मे वादी मुक़दमा प्रभात गुप्ता के पिता का संतोष गुप्ता के निधन हो गया. 2018 में डबल बेंच के सामने मुक़दमे की सुनवाई पूरी हुई और आदेश सुरक्षित किया गया. लेकिन फ़ैसला 6 महीने के बाद भी न आने के कारण वादी स्व सन्तोष गुप्ता के बेटे राजीव गुप्ता ने एक अपील दाखिल कि जिसमें फ़ैसला न आने के कारण पर बहस हुई और प्रभात गुप्ता की हत्या के मुक़दमे की सुनवाई फिर से करने का आदेश हुआ. इस बीच 4 साल तक सुनवाई की तारीख़ न मिलने के कारण जनवरी 2022 में सर्वोच्च न्यायालय में राजीव गुप्ता ने रिट दाखिल की. कुछ दिन के बाद पुनः हाईकोर्ट में एक सुनवाई के लिए आवेदन किया था.

Tags: Ajay Mishra, Lakhimpur, Supreme Court

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