लखीमपुर की इस आईआईटियन बिटिया ने जीता इंटरनेशनल 'कार्टियर' अवार्ड

स्वाती की कंपनी 'अर्बोरियल एग्रो इन्नोवेशन्स' ने लो कैलोरी नेचुरल स्वीटनर 'स्टीविया' की खेती से देश के किसानों की आय दोगुनी करने का बीड़ा उठाया है. स्वाती कहती हैं, मधुमेह देश ही नहीं विदेशों में भी पीढ़ियों को नुकसान पहुंचा रही.

Prashant Pandey
Updated: April 30, 2018, 3:18 PM IST
लखीमपुर की इस आईआईटियन बिटिया ने जीता इंटरनेशनल 'कार्टियर' अवार्ड
सिंगापुर में 'कार्टियर' अवार्ड से नवाजी गई स्वाती की फोटो.
Prashant Pandey
Updated: April 30, 2018, 3:18 PM IST
भारत की बेटियां अब देश विदेश में भारत का मान बढ़ा रही हैं. ऐसी ही देश की एक आईआईटियन इंजीनियर बिटिया स्वाती पाण्डेय सिंगापुर में 'कार्टियर' अवार्ड से नवाजी गई. स्वाती यूपी के लखीमपुर खीरी जिले की मूल निवासी हैं. पर उनके हौंसलों की उड़ान देश विदेश तक है. देश की इस बिटिया स्वाती पाण्डेय को सिंगापुर में कार्टियर वुमेन्स एंटरप्रेन्योरशिप अवार्ड 2018 से सम्मानित किया गया. स्वाती को एशिया पेसिफिक से इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया. पुरस्कार में स्वाती को एक लाख अमेरिकी डॉलर की नकद धनराशि भी मिली है. सिंगापुर में कार्टियर के आयोजित वार्षिक समारोह में स्वाती ने ये पुरस्कार प्राप्त किया

स्वाती की कंपनी 'अर्बोरियल एग्रो इन्नोवेशन्स' ने लो कैलोरी नेचुरल स्वीटनर 'स्टीविया' की खेती से देश के किसानों की आय दोगुनी करने का बीड़ा उठाया है. स्वाती कहती हैं, मधुमेह देश ही नहीं विदेशों में भी पीढ़ियों को नुकसान पहुंचा रही. इसीलिए हमने इससे लड़ने की ठानी है. प्रोजेक्ट में हम सामाजिक,आर्थिक और प्राकृतिक पहलुओं पर काम कर रहे. कम पानी के प्रयोग से ग्राउंड वाटर लेबल को बचाकर देश विदेश के लोगों तक आर्गेनिकली स्टीविया और इसके उत्पाद मुहैया कराने की योजना है. इससे लोकल फॉर्मर्स को रोजगार मिलेगा.

लोगों को काम और पांच सालों में किसानों की इन्कम में अप्रत्याशित वृद्धि होगी. बता दें कि स्टीविया कैश क्रॉप है और इसकी खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक अच्छा विकल्प भी. आईआईटी धनबाद से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद स्वाती को कॉमनवेल्थ स्कालरशिप मिली. इसके बाद स्वाती ने लंदन के इम्पीरियल काॅलेज से मास्टर्स (एमएस) किया. देश के किसानों की हालत देख स्वाती का मन देश के किसानों और मजदूरों के लिए कुछ बेहतर करने को हुआ. मन में ठान लिया फिर जुट गई.

स्वाती को विदेशों से कंपनियों के बड़े-बड़े पैकेज पर नौकरियों के ऑफर मिले पर स्वाती ने एंटरप्रेन्योरशिप को चुना. देश विदेश में तेजी से बढ़ रही मधुमेह (शुगर) की बीमारी से निपटने को नेचुरल स्वीटनर उपलब्ध करवाने का निश्चय किया. अपनी कंपनी बनाई और जुट गई. स्वाती ने यूपी हरियाणा समेत देश के विभिन्न प्रदेशों में स्टीविया की खेती के लिए किसानों से कॉन्टेक्ट किया. लीज पर खुद भी जमीन लेकर नेचुरल स्वीटनर स्टीविया की उन्नत प्रजाति की खेती शुरू करवाई है.

स्वाती के पिता डॉ.अशोक कुमार पाण्डेय देहरादून एफआरआई में साइंस्टिस्ट हैं और मां आशा पाण्डेय घरेलू महिला. दोनों ही बिटिया के काम पर गर्व कर रहे. स्वाती को अपने मां और पिता से हमेशा ही एक प्रेरणा मिली. स्वाती की एक बहन भी हैं जो एमबीए के बाद एक प्राइवेट कंपनी में अच्छे पद पर काम कर रहीं है. कार्टियर अवार्ड के लिए स्वाती को 130 देशों के 2800 प्रतिभागियों में इंटरनेशनल ज्यूरी ने पुरस्कार विजेता के रूप में चुना गया. कार्टियर अवार्ड्स दरअसल फ्रांस की एक इंटरनेशनल संस्था देती है.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर