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UP: सिंगापुर में लाखों की नौकरी छोड़ लखीमपुर में कर रहीं खेती, पढ़ें देश की इस बेटी की कहानी

सिंगापुर में लाखों के पैकेज की नौकरी छोड़ लखीमपुर में कर रहीं खेती

सिंगापुर में लाखों के पैकेज की नौकरी छोड़ लखीमपुर में कर रहीं खेती

साल 2010 में आईआईटी (IIT) धनबाद से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद स्वाति को उच्च शिक्षा के लिए कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप मिल गई थी और वह लंदन चली गई थीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 5, 2021, 12:36 PM IST
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लखीमपुर खीरी. उत्‍तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) में सिंगापुर में लाखों के पैकेज की नौकरी छोड़कर स्वाति पांडेय किसानों की जिंदगी में मिठास घोलने के लिए अपने जिले में वापस आई हैं. स्वाति ने अपनी टीम बनाई और लखीमपुर खीरी समेत आसपास के जिलों और दूसरे प्रदेशों तक मीठी तुलसी यानी स्टीविया (Natural Sweeteners) की खेती शुरू कर दी है. स्वाति ने 'आरबोरियल' नाम से एक कंपनी भी बना ली है, जो मीठी तुलसी यानी स्टीविया की पत्तियों से प्रोडक्ट्स बना रही है. स्वाति कहती हैं कि सिंगापुर और इंग्लैंड में नौकरी करते-करते ही यह सोच लिया था कि अपना कुछ काम करना है, अपना बिजनेस करना है. ऐसा बिजनेस जो भारत में हो और किसानों की जिंदगी में कुछ मिठास ला सके और समाज के हितकारी के लिए भी हो. इसीलिए उन्होंने स्टीविया की खेती को चुना. इस नैचुरल स्वीटनर की देश-विदेश में बहुत डिमांड है.

स्‍वाति पांडेय लखीमपुर खीरी जिले के नीमगांव इलाके के कोटरा गांव निवासी डॉक्टर अशोक कुमार पांडेय की बेटी हैं. डॉक्टर अशोक कुमार पांडेय भारतीय वन अनुसन्धान संस्थान में साइंटिस्ट थे. वह हाल ही में उपनिदेशक पद से रिटायर हुए हैं. स्वाति की मां घरेलू महिला हैं. बचपन में जब स्वाति छुट्टी बिताने गांव आया करती थीं तो किसानों की दशा देखकर उनके लिए मन में कुछ करने का जज्बा था. साल 2010 में आईआईटी धनबाद से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद स्वाति को उच्च शिक्षा के लिए कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप मिल गई. स्वाति भारत से लंदन के प्रतिष्ठित इम्पीरियल कॉलेज से पीजी कर वहीं नौकरी करने लगीं. इसके बाद स्वाति सिंगापुर चली गईं और अच्छी पगार वाली नौकरी शुरू की.

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स्वाति कहती हैं कि सिंगापुर में रहते हुए उन्होंने देखा कि नैचुरल स्वीटनर यानी शुगर फ्री की बड़ी डिमांड है. उन्हें एक ऐसे बिजनेस की तलाश थी, जिसका सोसायटी पर पॉजिटिव इम्पैक्ट हो. ऐसे में शुगर फ्री से बढ़िया और क्या हो सकता था. अच्छी नौकरी करते हुए स्वाति अपने देश के लोगों के लिए कुछ करने का प्लान करती रहीं. लखीमपुर आकर स्वाति ने स्टीविया की नर्सरी बनाई और लीज पर खेत लेकर स्टीविया की खेती शुरू की. तीन साल तो रिसर्च वर्क चला कि स्टीविया की कौन सी वैरायटी लगाई जाए. स्वाति ने कड़ी मेहनत करके अपनी कंपनी खोल ली और प्रोडक्ट्स भी लांच कर दिए हैं. स्वाति कहती हैं कि अभी तो यह शुरुआत है, अभी लंबी उड़ान बाकी है.
(रिपोर्ट- मनोज शर्मा)
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