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सरकार ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने रातों-रात बना लिया पुल, दूल्हे ने फीता काटा और निकाली बारात

ग्रामीणों ने मिलकर बनाया पुल, दूल्हे ने फीता काटकर किया उद्घाटन.

ग्रामीणों ने मिलकर बनाया पुल, दूल्हे ने फीता काटकर किया उद्घाटन.

लखीमपुर खीरी में जब जनप्रतिनिधि और प्रशासन ने कई सालों से की जा रही पुल निर्माण की बात नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने खुद ही यह काम कर दिखाया. ग्रामीणों ने प्रधान की मदद से शारदा नदी से निकलने वाले ब्रांच लाइन नाले पर पुल बना लिया.

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लखीमपुर खीरी. लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) में जब जनप्रतिनिधि और प्रशासन ने कई सालों से की जा रही पुल निर्माण (Bridge Construction) की बात नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने खुद ही यह काम कर दिखाया. ग्रामीणों ने प्रधान की मदद से शारदा नदी से निकलने वाले ब्रांच लाइन नाले पर पुल बना लिया. ग्रामीणों ने रातों रात इस पुल का निर्माण कर दिया. पुल बनने के बाद बरात लेकर जा रहे दूल्हे से फीता कटवाकर इस पुल का उद्घाटन भी करा दिया. फीता काटकर पुल से गांव से जाने वाली बारात इसी पुल से गुजर कर गई. ग्रामीणों ने पुल बनने की खुशी में मिठाई बांटी और खुशी से झूम उठे.

लखीमपुर खीरी के निघासन कोतवाली के बैलाह गांव के लोग बरसात के दौरान जब इलाके में बाढ़ आती थी, तो शारदा नदी से निकलने वाले ब्रांच नहर पर पानी भर जाने से परेशान होते थे. लगभग एक दर्जन गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क काट जाता था, जिससे इलाके के लगभग 20 हजार लोगों को खासी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है. लगातार कई वर्षों से ग्रामीण इस पर पुल बनाने की मांग कर रहे थे. जब जनप्रतिनिधि और प्रशासन ने कोई सुनवाई नहीं की तो गांव के लोगों ने प्रधान के साथ मिलकर रातों-रात लकड़ी के पुल का निर्माण कर दिया. पुल बन जाने के बाद गांव से जाने वाली एक बारात के दूल्हे ने पुल का फीता काटकर उद्घाटन किया और पूरी बरात इसी पुल से होेकर गांव के लिए निकल गई. पुल बनने की खुशी में ग्रामीणों ने आपस में मिठाई बांट कर खुशी जाहिर की.

बैलाह गांव के रहने वाले रामप्रसाद का कहना है पिछले 20 वर्षों से हम लगातार शासन और प्रशासन से इस शारदा नदी के नाले पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं. बरसात के दिनों में आधा किलो मीटर पानी भर जाता है. इसके चलते काफी लंबा सफर तय कर जिला मुख्यालय तक पहुंच पाते हैं. इस मार्ग से 12 गांव का रास्ता जाता है. प्रशासन और शासन की तरफ से अभी तक कोई मदद नहीं मिली. थक हार कर नए ग्राम प्रधान के मदद से ग्रामीणों ने इस पुल का निर्माण किया है. पुल बन जाने से हम लोगों को जिला मुख्यालय आवागमन में काफी मदद मिलेगी.

वहीं सरदार सुखदेव सिंह का कहना है लगातार हम लोग प्रशासन से मांग कर रहे थे, लेकिन किसी ने हमारी सुनवाई नहीं सुनी तो हम सब ग्रामीणों ने मिलकर पुल को बनाया. बिना पुल के काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था.

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