विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: सूख गई मोक्षदायिनी गोमती की अविरल धारा!

Prashant Pandey
Updated: June 5, 2018, 1:55 PM IST
विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: सूख गई मोक्षदायिनी गोमती की अविरल धारा!
लखीमपुर में सुख चुकी है गोमती नदी.
Prashant Pandey
Updated: June 5, 2018, 1:55 PM IST
5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर जब सभी पेड़-पौधे और नदियों को बचाने की शपथ ले रहे हैं. वहीं आज यूपी में एक ऐसी भी तस्वीर सामने आई है जो भयावह है. जी हां, गंगा की तरह ही यूपी की प्रमुख नदी गोमती अब सूखने लगी है. इसकी अविरल धारा को ब्रेक लग गया है. गोमती अपना  प्राकृतिक स्वरूप खोती जा रही है. दूसरे शब्दों में कहें तो मोक्षदायिनी गोमती नदी वेंटिलेटर पर है. तस्वीरें ऐसी है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती. अब आप गोमती नदी में मोटरसाइकिल चला सकते हैं. गोमती का पानी सूख चुका है.

लखीमपुर खीरी जिले के मोहम्मदी इलाके में आदिगंगा का हाल देख आने वाले खतरे का एहसास आपको हो जाएगा. मियांपुर रविंद्रनगर के पास गोमती की धारा शम्भूघाट पर सूख चुकी है. करीब 500 मीटर तक गोमती बिल्कुल सूख गई. पास के जंगल मे जानवर चरा रहे 75 साल के वंशगोपाल  कहते हैं “हमने अपनी जिंदगी में गोमती के घाट कभी सूखे नहीं देखे."

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गोमती का ये हाल सिर्फ शम्भूघाट पर ही नहीं है, पुरैना घाट पर भी गोमती छोटे-छोटे तालाबनुमा गड्ढों में तब्दील हो गई है. लगता है खनन से हुए गड्ढो ने गोमती की कोख ही सूखा दी. यकीन ही नहीं हो रहा कि ये वही गोमती है, जिसके किनारे यूपी का लखनऊ शहर बसा है. जौनपुर बसा है. सुल्तानपुर और बनारस भी गोमती से जुड़ा है.



बता दें गोमती नदी को बचाने के लिए पिछले दो सालों से कैम्पेन चला रहे वाइल्डलाइफ और नेचर फोटोग्राफर सतपाल सिंह कहते हैं, “गोमती नदी अब वेंटिलेटर पर आ चुकी है. सरकारों और लोगों को जगाने की जरूरत है. नदी मर गई तो सभ्यता मर जाएगी. हमें बिना समय गंवाए एक्शन में आना होगा. वरना गोमती नदी तिल-तिल कर मर जाएगी.'

गोमती की पीड़ा को  सुन खीरी जिले के मोहम्मदी इलाके के कुछ युवाओं ने इसे बचाने की मुहिम छेड़ दी है. “सेव गोमती” नाम से सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान शुरू कर दिया गया है. गोमती की यात्रा भी इन युवाओं ने उदगम स्थल से की है. डाटा तैयार किया है. युवाओं में जुनून है किसी तरह गोमती का प्राकृतिक स्वरूप वापस लाया जाए.



गोमती बचाने के इस काम की शुरुआत इंटरनेशनल वाइल्डलाइफ और नेचर फोटोग्राफर सतपाल सिंह ने की है. वह खुद गोमती नदी के पास के रहने वाले हैं. सतपाल के साथ गोमती बचाने को इलाके के तमाम युवा आगे आए हैं. सतपाल कहते हैं, “सरकारों को आगे आना होगा, पर जनसहभागिता बहुत जरूरी.”

गोमती उत्तर भारत में बहने वाली एक प्रमुख नदी है. इसका उदगम पीलीभीत जिले में माधोटांडा के पास गोमत ताल से हुआ है. पर गोमत ताल के पास ही नदी 10 किलोमीटर से ज्यादा सूख चुकी है. इसके बीच बरसीम की खेती होने लगी है. गोमती यूपी में करीब 900 किलोमीटर तक बहती है. तराई के पीलीभीत जिले के माधोटांडा से निकल बनारस के सैदपुर के पास कैथी नामक स्थान पर गोमती और गंगा का संगम हुआ है.

गोमती पौराणिक रूप से भी मशहूर नदी है. अवध की कला और संस्कृति इसी गोमती तीरे ही परवान चढ़ी. यूपी की राजधानी लखनऊ भी गोमती किनारे ही बसी हुई है. पुराणों में भी गोमती को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताया गया है. लेकिन गोमती खुद मोक्ष का मार्ग ढूंढ रही. सरकार को अभी गोमती की कराह सुनाई नहीं पड़ रही है, लेकिन इन नौजवानों ने बीड़ा उठा लिया है.

सेव गोमती से जुड़े मनदीप सिंह कहते हैं, “गोमती का चीरहरण हो रहा. अवैध खनन से गोमती चीख चिल्ला रही है, पर लखनऊ और दिल्ली तक गोमती मैया की चीख नहीं पहुंच पा रही. इलाके में साठा धान की अंधाधुंध खेती, यूकेलिप्टिस और सागौन के पेड़ों ने भी गोमती को नुकसान पहुंचाया है.”

मोहम्मदी में ही ढाबा चलाने वाले गोबिंद गुप्ता भी गोमती के इस हाल को देख विचलित हैं. कहते हैं, “हम लोगों ने जनजागरूकता शुरू कर दी है. अब सरकार को भी आगे आने की जरूरत है. सख्ती नहीं हुई तो हमें ही भुगतना होगा.”

गोमती की हालत पीलीभीत से लेकर खीरी तक में खराब है. गोमती बचाने को सतपाल और उनकी टीम लगी है. सेव गोमती के नाम से सोशल मीडिया से लेकर जमीन पर जागरूकता अभियान छेड़ रखा है. सतपाल और उनकी टीम ने गोमती के अमरी घाट को गोद लिया है. डस्टबिन लगवाए जा रहे हैं. पौधारोपड़ चल रहा है.
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