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वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्टः जंगल से बाहरी दुनिया में पहुंचा थारू प्रोडक्ट, तरक्की की राह पर यूपी की 5000 महिलाएं

वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्टः जंगल से बाहरी दुनिया में पहुंचा थारू प्रोडक्ट, तरक्की की राह पर यूपी की 5000 महिलाएं

लखीमपुर जिले के दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में बसी थारू जनजाति की महिलाओं की जिंदगी अब योगी सरकार की ओडीओपी योजना में बदल रही है.

लखीमपुर जिले के दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में बसी थारू जनजाति की महिलाओं की जिंदगी अब योगी सरकार की ओडीओपी योजना में बदल रही है.

ODOP Scheme In UP: थारू महिला आरती राना कहती हैं कि हमारा और महिलाओं का जीवन बदल रहा है. अब महिलाओं को एक मिनट की फुर्सत नहीं है. करीब पांच हजार महिलाएं ओडीओपी से जुड़कर रोजगार चला रही हैं. हालांकि आरती सिर्फ अकेली नहीं है. आरती जैसी करीब पांच हजार महिलाओं को ओडीओपी योजना से जुड़ कर काम मिला है. कोई जूट का काम करता है तो कोई मूंज का... महिलाओं के हाथों को काम मिला है, तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है.

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लखीमपुर खीरी. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) के जंगलों में बसी थारू जनजाति (Tharu Tribe) की महिलाओं की जिंदगी अब योगी सरकार की ओडीओपी योजना में बदल रही है. महिलाएं थारू क्राफ्ट बनाकर न केवल देश-विदेश में अपना नाम कमा रही हैं, बल्कि अपने पैरों पर भी खड़ी हो रही हैं. वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोजेक्ट के तहत थारू ट्राइबल क्राफ्ट को यूपी सरकार ने खीरी जिले में गुड़ के साथ चुना था.

थारू क्राफ्ट बना रही आरती राना कुछ दिन पहले तक दुधवा टाइगर रिजर्व और जंगलों के आसपास उससे अपनी रोजी-रोटी चलाती थीं. जंगलों पर आश्रित थीं, लेकिन यूपी सरकार की ओडीओपी की योजना के तहत अब आरती को काम मिल गया है. आरती को एक मिनट की फुर्सत नहीं है. उनके सधे हुए हाथ अपने परंपरागत कला और संस्कृति से जुड़कर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपनी पहचान बना रहे हैं. पारंपरिक उत्पादों को बनाकर आरती अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं. अपने जैसी तमाम महिलाओं को रोजगार से जोड़ भी रही हैं.

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ODOP योजना से मिला रोजगार

थारू महिला आरती राना कहती हैं कि हमारा और महिलाओं का जीवन बदल रहा है. अब महिलाओं को एक मिनट की फुर्सत नहीं है. करीब पांच हजार महिलाएं ओडीओपी से जुड़कर रोजगार चला रही हैं. हालांकि आरती सिर्फ अकेली नहीं है. आरती जैसी करीब पांच हजार महिलाओं को ओडीओपी योजना से जुड़ कर काम मिला है. कोई जूट का काम करता है तो कोई मूंज का… महिलाओं के हाथों को काम मिला है तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है.

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दुधवा टाइगर रिजर्व में रहते हैं थारू जनजाति के कई लोग

थारू जनजाति दुधवा टाइगर रिजर्व के आसपास बहुतायत में पाई जाती है, इन जनजातीय महिलाओं के पास पहले कोई काम नहीं था, पर इनका पारंपरिक ज्ञान इन को बखूबी आता था. अपनी कला और संस्कृति के प्रति थारू काफी जानकारी रखते थे. हस्तकला हो या दीवारों पर चित्रकारी थारू महिलाओं को खूब आती थी. रोज के कामों में डलवा बनाना उनका काम था. इस ग्रामीण और पारंपरिक कला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने को योगी सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत थारू क्राफ्ट को चुना. योजना के तहत ट्रेनिंग दिलाई गई.

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जिला अधिकारी महेंद्र सिंह कहते हैं कि सरकार से महिलाओं को टूल किट दिलवाई गई है. महिलाएं बड़ी संख्या में जुड़ी हैं. गांव-गांव काम होने लगा. महिलाओं को मास्टर ट्रेनर भी बनाया जा रहा. प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जाकर अब महिलाएं ट्रेनिंग भी दे रही हैं सरकार की योजनाओं को इस क्षेत्र में बहुत अधिक महिलाओं को लाभ मिला है और महिलाएं बढ़-चढ़कर व हिस्सा ले रही.

योगी सरकार की योजना ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान

थारू महिलाओं को अपना पारंपरिक ज्ञान तो पहले से ही था, वो तमाम हैंडीक्राफ्ट पहले से बनाती थीं. लेकिन ओडीओपी योजना के तहत इन महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकने वाली सामग्री कैसी होती है इसकी ट्रेनिंग दी गई. उनको कुछ नए डिज़ाइन बताए गए और कुछ सरल तरीके भी बताये गए, जिससे अब इन महिलाओं को काम करने में आसानी भी हो रही है. इस काम में उन्हें मजा भी आने लगा है. अब यह कम समय में ज्यादा काम करने लगी हैं और ज्यादा उत्पाद भी बनाने लगी हैं. जो हाथ पहले सिर्फ डलवे-डलिया बनाते थे, अब लॉंड्री बास्केट बनाने लगे हैं. पूजा बास्केट, गिफ्ट बास्केट, डिजायनर लेडीज पर्स, टोपी जूट चप्पलें और भी न जाने क्या-क्या. इन उत्पादों की बड़े शहरों से डिमांड भी आने लगी है. देश में लगने वाले महोत्सवों में इन उत्पादों को अलग पहचान मिल रही है.

Tags: BJP, CM Yogi Adityanath, Uttar pradesh news

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