प्रियंका-योगी पत्र युद्ध: 3 दिन, 8 पत्र, 1000 बसें और मजदूर जहां के तहां

UP में गुंडाराज, सरेंडर कर चुकी कानून व्यवस्था (file photo)

UP में गुंडाराज, सरेंडर कर चुकी कानून व्यवस्था (file photo)

प्रवासी मजदूरों (Migrant Laborers) के लिए बस उपलब्‍ध कराने को लेकर यूपी सरकार और प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) के बीच छिड़े पत्र-युद्ध का नतीजा अभी तक सिफर ही रहा है.  

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नई दिल्‍ली. श्रमिक एक्‍सप्रेस ट्रेनों (Shramik Express trains) के शुरू होने के बावजूद बड़ी तादाद में प्रवासी मजदूर (Migrant Laborers) पैदल ही अपने घर तक का सफर तय करने को मजबूर हो रहे हैं. इन्‍हीं प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित घर पहुंचाने को लेकर इन दिनों कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) और उत्‍तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) के बीच एक पत्र- युद्ध शुरू हुआ है. इस पत्र युद्ध की शुरूआत 16 मई को प्रियंका गांधी की तरफ से मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) को भेजे गए एक पत्र से हुई थी. बीते तीन दिनों, सरकार और प्रियंका गांधी के बीच कुल 8 पत्रों का आदान प्रदान हो चुका है. प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी के मुद्दे पर शुरू हुए पत्राचार में अब राजनीति किस कदर हावी हो चुकी है, इसका अंदाजा आप पत्रों के मजमून को पढ़कर पता लगा सकते हैं.

दरअसल, 16 मई को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को एक पत्र लिखा गया था. मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को संबोधित करते हुए इस पत्र में प्रियंका गांधी ने लिखा था कि लाखों की संख्‍या में उत्‍तर प्रदेश के मजदूर देश के कोने-कोने से पलायन कर वापस लौट रहे हैं. लगातार सरकार द्वारा की गई घोषणाओं के बावजूद पैदल आ रहे इन मजदूरों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं हो पाई है. प्रदेश में अब तक करीब 65 मजदूरों की अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो चुकी है, जोकि सूबे में कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्‍या से भी अधिक है. अपने इसी पत्र में प्रियंका गांधी ने उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री के समक्ष 1000 बसें उपलब्‍ध कराने का भी प्रस्‍ताव रखा था.

नोएडा और गाजियाबाद से था 1000 बसों को चलाने का प्रस्‍ताव

प्रियंका गांधी ने अपने पहले ही पत्र में 1000 बसें नोएडा और गाजियाबाद से चलाने का प्रस्‍ताव उत्‍तर प्रदेश सरकार को दिया था. अपने पत्र में प्रियंका गांधी ने लिखा था कि पलायन कर रहे बेसहारा प्रवासी श्रमिकों के प्रति कांग्रेस पार्टी अपनी जिम्‍मेदारी निभाते हुए 500 बसें गाजियाबाद के गाजीपुर बार्डर और 500 बसें नोएडा बार्डर से चलाना चाहती है. इसका पूरा खर्च भारतीय रार्ष्‍टीय कांग्रेस करेंगी. महामारी से बचने के सभी नियमों का पालन करते हुए प्रवासी श्रमिकों की मदद करने करने के लिए हमें 1000 बसों को चलाने की अनुमति दी जाए. प्रियंका गांधी के इस पत्र के जवाब 18 मई को उत्‍तर प्रदेश के अपर मुख्‍य सचिव अवनीश कुमार अवस्‍थी ने दिया. उन्‍होंने प्रियंका गांधी के निजी सचिव से अविलंब 1000 बसों की सूची के साथ चालक और परिचालक का विवरण उपलब्‍ध कराने को कहा.
प्रियंका गांधी के निजी सचिव ने सौंपी 1000 बसों की पूरी सूची

उत्‍तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्‍य सचिव अवनीश कुमार अवस्‍थी के इस पत्र का जवाब प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह ने 18 मई को भी भेज दिया. उन्‍होंने अपने पत्र के साथ 1000 बसों की सूची भी उत्‍तर प्रदेश सरकार को मुहैया करा दी. संदीप सिंह ने इस पत्र में कुछ चालकों के दोबारा वैरीफिकेशन की बात भी कही गई थी. 18 मई को ही अपर मुख्‍य सचिव की तरफ से रात्रि करीब 11.40 बजे प्रियंका गांधी के प्रमुख सचिव संदीप सिंह को एक पत्र भेजा गया. इस पत्र में उन्‍होंने सभी बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट, चालकों के ड्राइि‍वंग लाइसेंस और परिचालन का पूर्व विवरण अगली सुबह 10 बजे तक लखनऊ जिलाधिकारी को उपलब्‍ध कराने के लिए कहा. अपर मुख्‍य सचिव अवनीश कुमार अवस्‍थी के इस पत्र का जवाब 19 मई को तड़के 2.10 बजे प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह ने भेज दिया.

प्रियंका के सचिव ने कहा- संभव नहीं बसों को लखनऊ भेजना



संदीप सिंह ने अपर मुख्‍य सचिव अवनीश कुमार अवस्‍थी को लिखे पत्र में कहा कि प्रियंका गांधी ने 16 मई को लिखे अपने पत्र में गाजियाबाद और नोएडा से 1000 बसे चलाने की अनुमति मांगी थी. आपके निर्देश पर 1000 बसों की सूची और स‍भी विवरण आपको उपलब्‍ध करा दिए गए. इसके बाद, हमें रात्रि 11.40 बजे आपका ईमेल के जरिए पत्र मिला, जिसमे सुबह 10 बजे तक बसों को लखनऊ में हैंडओवर करने की अपेक्षा की गई है. उन्‍होंने लिखा कि 1000 बसों को लखनऊ भेजना न केवल समय बल्कि संसाधनों की भी बर्बादी है. संदीप सिंह के इस पत्र के जवाब में 19 मई को अपर मुख्य सचिव ने एक पत्र फिर लिखा. इस पत्र में 500 बसों को गाजियाबाद के कौशांबी और साहिबाबाद बस अड्डे और 500 बसों को नोएडा के एक्‍पो मार्ट के निकट दोनों जिलों के जिलाधिकारियों को सौंपने की बात कही गई.

बसों को नहीं मिली यूपी की सीमाओं में दाखिल होने की अनुमति

अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्‍थी के इस पत्र के जवान में संदीप सिंह ने एक पत्र फिर लिखा. जिसमें बताया गया कि उनकी कुछ बसे राजस्‍थान और दिल्‍ली से आ रही है. उनको दोबारा परमिट दिलाने में कुछ समय लगेगा. यह सभी बसें शाम पांच बजे तक नोएडा और गाजियाबाद बार्डर तक पहुंच जाएंगी. संदीप सिंह ने शाम पांच बजे तक यात्रियों की लिस्‍ट और रूट मैप तैयार करने का अनुरोध उत्‍तर प्रदेश सरकार से किया. इसके बाद 19 मई को ही दोपहर 3.45 बजे संदीप सिंह की तरफ से अपर मुख्‍य सचिव अवनीश कुमार अवस्‍थी को लिखा गया. जिसमें उन्‍होंने बताया कि राजस्‍थान से आ रही बसें लगभग 3 घंटे से यूपी बार्डर पर खड़ी हैं. उन्‍हें आगरा प्रशासन प्रदेश की सीमा में घुसने की इजाजत नहीं दे रहा है. इस तरह, आज शाम तक प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के नाम पर राजनीति जारी रही. इस सब के बीच, आग उगलती गर्मी में प्रवासी मजदूरों पैदल अपने घर की तरफ बढ़ रहे हैं. देखते हैं उनकी सुध कब और कौन लेता है.

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