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Lockdown diaries: लॉकडाउन में फंसी इटली की योग टीचर ने भारत के बारे में कही बड़ी बात

इटली से आईं आइरिन रोतोंदो भारत में हुए लॉकडाउन में फंस गई हैं, यहां खुद को काफी सुरक्षित बता रही हैं.

इटली से आईं आइरिन रोतोंदो भारत में हुए लॉकडाउन में फंस गई हैं, यहां खुद को काफी सुरक्षित बता रही हैं.

वृंदावन के एक मंदिर में फंसी हुई हैं इटली निवासी योग टीचर आइरिन रोतोंदो, कहा-लॉकडाउन के दौरान भारत में रहकर अलग ही शांत ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. 'कोरोना ने इटली में जो बुरा हाल किया है, सुनकर ही रूह कांप जाती है. मेरा पूरा परिवार वहीं है, मैं जब उनसे पूछती हूँ तो चिंता से घिर जाती हूँ लेकिन जब उन्हें बताती हूँ कि भारत में कोरोना है लेकिन इतनी खराब स्थितियां नहीं हैं, मैं यहां एकदम सुरक्षित और खुश हूं तो वे राहत महसूस करते हैं.' ये बातें भारत में टूरिस्ट वीज़ा पर आईं और यहां लॉकडाउन में फंसकर रह गईं इटली निवासी 37 वर्षीय आइरिन रोतोंदो ने कहीं.

News18Hindi को भारत में अपना लॉकडाउन अनुभव बता रहीं रोतोंदो ने कहा, ' इटली के रोम में मैं एक प्राइवेट योगा टीचर हूँ. वहीं मेरे माता-पिता, एक बहन, भाई और भतीजी-भतीजा रहते हैं. मैंने शादी की लेकिन 2016 में मेरे पति का देहांत हो गया. मेरे पति गौड़ीय सम्प्रदाय से जुड़े थे, उन्हीं के साथ मेरा भी झुकाव भारत और वृन्दावन के प्रति हुआ. यहां मैंने गुरु आज्ञा से अपना आध्यात्मिक नाम रसलीला रख लिया. पति के देहांत के बाद मैं आध्यात्मिकता की ओर पूरी तरह मुड़ गयी और मुझे यहां अच्छा लगने लगा. 2007 में, मैं पहली बार भारत आई थी. हालांकि कभी इतने दिनों तक ठहरना नहीं हुआ.

इस बार मैं एक साल के टूरिस्ट वीज़ा पर पिछले साल अक्टूबर में भारत आई. हालांकि मुझे अप्रैल तक लौटना था लेकिन कोरोना जैसी भयंकर बीमारी आ गयी. कोरोना की भयावहता को लेकर मुझे मार्च के शुरुआत में पता चला. इटली में हाहाकार था, मेरी माँ और बहन मुझे अक्सर फोन करके वहां के हालात बताते. वे कहते, हम सब घरों में बन्द हैं, कोई सामान लेने भी बाहर नहीं जा रहा. यहां एक बीमारी भूत की तरह अदृश्य है लेकिन लोगों को मार रही है.' उन्होंने मुझसे इटली आने के लिए भी मना किया. इस वक्त तक भारत में ऐसा कुछ नहीं था. मैं यहां एकदम निश्चिंत थी कि तभी मार्च के लास्ट में यहां लॉकडाउन हो गया.

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कोरोना लॉकडाउन की वजह से मथुरा में फंस गईं थीं इटली की योग टीचर


मैं वृन्दावन के मुंगेर राज मंदिर में ठहरी हुई थी, यहां मेरी तरह और भी विदेशी भक्त थे, कि अचानक हमारे बाहर जाने पर रोक लगा दी गयी. बाहर के लोगों का प्रवेश बन्द कर दिया गया. हम अब बाज़ार नहीं जा सकते थे. किसी और मंदिर में नहीं जा सकते थे. हालांकि मंदिर के अंदर कीर्तन-सेवा चलती रही. इस दौरान कई लोग इमरजेंसी में अपने-अपने देश भी गए. मैं स्थिति ठीक होने तक वृन्दावन में ही रह गयी. मैं रोजाना भगवान से प्रार्थना करती कि सब ठीक हो जाये. गनीमत रही कि इटली में मेरे परिजनों या रिश्तेदारों को कोरोना नहीं हुआ लेकिन रोम में काफी बुरे हालात सुनने को मिले. पड़ौस तक में कोरोना से लोगों की मौत हुई.

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मार्च के बाद भी भारत में लॉकडाउन बढ़ता गया, बाकी देशों में भी कोरोना की भयावहता की जानकारी मिलती रही. काफी डर था लेकिन प्रभु कीर्तन में सब चिंता खत्म हो जाती. हमसे कहा गया, 'नो मीटिंग सिर्फ नमस्ते' और हम वह फॉलो कर रहे हैं. वहीं भारत में इतनी जनसंख्या के बावजूद यहां हालात काफी हद तक नियंत्रण में हैं. यह काफी सुखद है.

लॉकडाउन में नहीं हुई कोई परेशानी

खासतौर पर वृन्दावन के मार्किट काफी अपडेटेड हैं, लॉकडाउन में खाने-पीने की चीजें, दवाएं हमें सिर्फ फोन करने भर से ही मिल जाती थीं. अब अनलॉक में और भी आसानी से डिलिबरी हो रही है. किसी तरह की परेशानी नहीं हुई. अलबत्ता लॉकडाउन में एक अलग ही शांति महसूस हुई. लेकिन इस पूरे चार महीने के पीरियड में मैंने मंदिर से बाहर कदम नहीं रखा. सोशल डिस्टेंसिंग सहित इम्युनिटी बूस्ट करने के उपायों में पालन किया.

वृन्दावन घूमना रह गया बाकी, फिर आउंगी

इस बार चूंकि मैं लम्बे वक्त के लिए आई थी तो जयपुर और दिल्ली घूम चुकी थी. मार्च और अप्रैल के शुरुआत में मुझे पूरा वृन्दावन बारीकी से देखना था जो बाकी रह गया. मुझे यमुना देखनी थी, यहां के मार्किट, मंदिर, परिक्रमा देनी थी. मुझे इसका काफी मलाल भी है.  इसके लिए मैं फिर वृन्दावन आउंगी. हालांकि इस दौरान वृन्दावन में भक्ति और सेवा करने का मौका मिला.

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हवाई सेवा शुरू होने का है इंतज़ार, तभी जाना होगा देश

इटली में तमाम काम करने हैं लेकिन ज़िंदगी सबसे ज्यादा जरूरी है. ऊपर से अभी कोई व्यवस्था भी नहीं है. हवाई सेवा शुरू होने का इंतजार है. मेरे पैरेंट्स भी यहां आना चाहते हैं लेकिन पिता को हवाई सफर से परेशानी है, वो नहीं कर सकते. हालांकि माँ एक बार आ चुकी हैं.

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