Lockdown: चोटिल जूनियर छात्र को खुद रिक्शा चलाकर अस्पताल ले गया सीनियर
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Lockdown: चोटिल जूनियर छात्र को खुद रिक्शा चलाकर अस्पताल ले गया सीनियर
आरिफ खान को रिक्शे में अस्पताल ले जाते अशफाक हमीदी.

लॉकडाउन (Lockdown) के समय अलीगढ़ की सड़कों पर अपने जूनियर को रिक्शे में बिठा कर अस्पताल ले जा रहे एक सीनियर की ऐसी ही तस्वीर सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हुई है

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  • Last Updated: April 13, 2020, 10:22 AM IST
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नई दिल्ली. कॉलेज, यूनिवर्सिटी (University) हो या हॉस्टल सीनियर स्टूडेंट अपने जूनियर पर रौब झाड़ते हुए नजर आते हैं. कई बार तो रैगिंग के कई गंभीर मामले तक सामने आते हैं. लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में किसी जूनियर छात्र का सीनियर होना आसान बात नहीं है. सीनियर बनने के लिए पहले आपको अपने जूनियर का लोकल अभिभावक बनना पड़ता है. चाय के अड्डों पर जूनियर्स के चाय-बिस्किट के बिल भरने पड़ते हैं. यहां तक की अगर जूनियर बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल ले जाना और फिर रात-रात भर जागकर उसकी तीमारदारी करनी पड़ती है जब तक की उसके माता-पिता न आ जाएं. लॉकडाउन (Lockdown) के समय अलीगढ़ की सड़कों पर अपने जूनियर को रिक्शे में बिठा कर अस्पताल ले जा रहे एक सीनियर की ऐसी ही तस्वीर सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हुई है.

पैर में प्लॉस्टर बंधवाने के लिए रिक्शे में लेकर गए अस्पताल

आरिफ खान और अशफाक हमीदी दोनों एएमयू के छात्र हैं. लेकिन अशफाक आरिफ के सीनियर हैं. एक घटना में आरिफ के पैर में चोट लग गई. पैर को ठीक करने के लिए प्लॉस्टर की जरूरत आन पड़ी. कोरोना वायरस के खौफ के चलते सभी छोटे-बड़े प्राइवेट अस्पताल बंद हैं. ऐसे में बचता है तो सिर्फ जेएन मेडिकल कॉलेज. लेकिन सड़क पर कोई साधन नहीं है. चोटिल आरिफ को लेकर अस्पताल जाएं तो कैसे. तब ऐसी हालत में अशफाक एक रिक्शे का इंतजाम करते हैं. रिक्शेवाला जाने से मना कर देता है तो वो खुद ही रिक्शा चलाकर चोटिल आरिफ को अस्पताल ले जाते हैं.



सीनियर के सामने जूनियर नहीं देते चाय के पैसे
कैंटीन या चाय की दुकान पर कोई सीनियर खड़ा है तो जूनियर को सीनियर के सामने पर्स खोलने की इजाजत नहीं होती है. उस वक्त दो-चार जितने भी जूनियर हैं उनकी चाय-बिस्कुट के पैसे सीनियर देंगे.

सी ऑफ टी- जब कोई छात्र हॉस्टल से अपने घर जा रहा होता है तो उसे बस अड्डे या रेलवे स्टेशन पर साथ आए दूसरे छात्रों को सी ऑफ टी (विदाई की चाय) पिलानी होती है, वो भी स्नैक्स के साथ.

हॉस्टल में होते हैं छोटा भाई-बड़ा भाई

एएमयू हॉस्टल के रूम में दो से तीन छात्र रहते हैं. अगर तीन छात्र वाला रूम है तो वहां एक सीनियर होगा और दो जूनियर छात्र. अगर जूनियर छात्र बीमार हो जाता है तो सीनियर ही उसे अस्पताल लेकर जाएगा. साथ ही बीमार छात्र के माता-पिता के आने तक सारा खर्च भी उठाएगा.

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