'पंद्रह बनाम पचासी': पूर्वी यूपी के यादवों को क्यों याद आ रहा है कांशीराम का यह नारा

सपा कार्यकर्ता अजोशी यादव कहते हैं कि हमें बसपा कार्यकर्ताओं के साथ काम करने में कोई दिक्कत नहीं है. बसपा के साथ काम करना मेरे लिए काफी सुखद रहा है.

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Updated: May 9, 2019, 11:47 AM IST
'पंद्रह बनाम पचासी': पूर्वी यूपी के यादवों को क्यों याद आ रहा है कांशीराम का यह नारा
बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की फाइल फोटो
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Updated: May 9, 2019, 11:47 AM IST
उदय सिंह राणा

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए दो और चरणों में मतदान बाकी हैं. पश्चिमी और अवध क्षेत्र में मतदान बीते पांच चरणों में संपन्न हो गया. अब बारी है पूर्वांचल की सीटों पर मतदान की. यहां पच्चीस साल बाद मुलायम सिंह यादव और कांशीराम का इतिहास खुद को दोहरा रहा है. समाजवादी पार्टी के 66 वर्षीय कार्यकर्ता देव नारायण यादव एक बार फिर से उत्साहित हैं. उनका कहना है कि एक बार फिर 85 (बहुजन) पर 15 (सवर्ण) हावी होंगे.



देव नारायण के मुताबिक कांशीराम कहते थे, 'ये लड़ाई पंद्रह और पचासी के बीच में है.' उन्होंने कहा 'पचासी फीसदी में गरीब, दलित, मुस्लिम और ओबीसी और 15 फीसदी में अमीर और संपन्न लोग हैं. पन्द्रह फीसदी के पास सारी सत्ता है. आज एक बार फिर एकता है. अगर 85:15 नहीं तो भी मैं समाज में 75:25 का बंटवारा जरूर है. हमारे कुछ लोग, सत्ता के लिए दूसरी ओर चले गए. लेकिन बड़ी संख्या में दलित, ओबीसी, मुस्लिम और सभी पीड़ित वर्ग एक बार फिर से साथ आ रहे हैं.'

बसपा के लिए प्रचार पर सपा कार्यकर्ताओं की राय

जौनपुर की जौनपुर लोकसभा और मछलीशहर लोकसभा सीट से बसपा ने प्रत्याशी उतारा है. सपा के कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें बसपा के पक्ष में प्रचार करने में कोई आपत्ति नहीं है. बसपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि पास की आजमगढ़ सीट पर हम सपा की मदद कर रहे हैं जहां से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं.

मायावती और मुलायम सिंह की फाइल फोटो


सपा कार्यकर्ता अजोशी यादव ने कहा कि हमें बसपा कार्यकर्ताओं के साथ काम करने में कोई दिक्कत नहीं है. बसपा के साथ काम करना मेरे लिए काफी सुखद रहा है. जहां भी बसपा चुनाव लड़ रही है वहां हमारे बसपा के दोस्त हमें सम्मान देते है और जिन सीटों पर हम चुनाव लड़ रहे हैं वहां हम भी बसपा कार्यकर्ताओं का सम्मान कर रहे हैं.'
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'बसपा वर्कर्स की चाह अखिलेश की जीत'
एक बसपा कार्यकर्ता ने कहा कि 'हम चाहते हैं कि अखिलेश जीतें. उनके जैसा कोई नेता नहीं है. हमने अपने साथियों को बता दिया है कि सपा के प्रत्याशियों के लिए प्रचार करें. आखिरकार, बहन जी ने हमें आदेश दिया है. उनके शब्द हमारे लिए कानून है.'

सपा-बसपा को उम्मीद है कि उन्हें 44.6% वोट मिलेंगे जिससे बीजेपी को झटका लगेगा. अजोशी ने कहा कि अगर हम दलित या पिछ़ड़े हैं तो हमें प्रशासन से दिक्तों का सामना करना पड़ता है. मैं जिला पंचायत सदस्य हैं और मैं भी जातिवाद का पीड़ित है. अब कोई एक्शन होता है तो उसका रिएक्शन भी होता है. जब जब  अत्याचार अपनी हदें पार करता है फिर तो जिनका भी समाजवाद और बहुजनवाद में यकीन है वह साथ आएंगे.'

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वहीं देव नारायण ने कहा कि 'राज्य के इस हिस्से में गमछा, ठाकुर और भूमिहारों का प्रतीक है. अगर आप गमछे के साथ सरकारी दफ्तरों में जाएंगे तो आपकी जल्दी सुनी जाएगी. अगर मुझे भी कोई काम पड़ता है तो मैं भी अपने साथ गमछा लेकर जाने लगा हूं.'

बसपा के श्याम सिंह यादव जौनपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी महागठबंधन की एकता के प्रतीक हैं.  यादव होते हुए श्याम को  बसपा में  खास जगह मिली है.  'यह धारणा (कि सपा और बसपा ने एक दूसरे के कैडरों पर अत्याचार किया) गलत है. सपा और बसपा सिर्फ यादव और अनुसूचित जाति के दल नहीं हैं. उनके पास एक बहुत व्यापक समर्थन है.  महागठबंधन में बड़ी एकता है. यह वास्तविक एकता है. आपने देखा कि मायावती ने मुलायम सिंह के निर्वाचन क्षेत्र मैनपुरी में कैसे प्रचार किया. क्या आपने कभी सोचा था कि ऐसा होगा? यह एक संदेश है जिसे सभी कार्यकर्ताओं को देखना चाहिए. अब पार्टियों के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव है.'

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बीजपी ने दावा किया है कि यह एक अप्राकृतिक, अवसरवादी गठबंधन है, लेकिन दोनों दलों के अधिकांश कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सामाजिक न्याय के लिए एक गठबंधन है. वे कहते हैं कि 2019 में 85% बनाम 15% की लड़ाई है।

बसपा कार्यकर्ता नरसिंह गौतम ने कहा- 'अगर 1993 का गठबंधन एक साथ रहता, तो हम कम से कम तीन या चार बार दिल्ली में सरकार बनाते. हमें सत्ता से कोई नहीं हटा सकता था.'

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