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Love Jihad: 104 पूर्व ब्यूरोक्रेट्स के CM योगी को पत्र पर सियासत तेज, जानिए किसने क्या कहा?

(प्रतीकात्मक तस्वीर)
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

104 पूर्व ब्यूरोक्रेट्स द्वारा सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को ‘लव जिहाद’ कानून के दुरुपयोग को लेकर लिखी गई चिट्ठी पर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है. मामले में योगी सरकार के मंत्रियों, नेताओं ने चिट्ठी पर ही सवाल उठा दिए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 30, 2020, 6:07 PM IST
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लखनऊ. 104 पूर्व ब्यूरोक्रेट्स (Former Bureaucrats) द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को पत्र लिखकर ‘लव जिहाद’ के धर्मांतरण कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उसे वापस लेने की मांग की है. उधर इस चिट्ठी को लेकर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है. मामले में योगी सरकार के मंत्रियों, नेताओं ने चिट्ठी पर ही सवाल उठा दिए हैं.

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने कहा है कि इस तरह की अपील और बयानबाजी करना अब फैशन बन गया है. नागरिकों के हित में जब भी कोई अच्छा काम होता है तो इसी तरह से अपील व बयानबाजी की जाती है. इस तरह के कदम सिर्फ सरकार को बदनाम करने के लिए उठाए जाते हैं. जैसा पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी ने 2 करोड़ किसानों के फर्जी हस्ताक्षर कराने के दावे किए थे.

चिट्ठी गैंग का काम ही है सलेक्टिव मुद्दों पर चिट्ठी लिखना: शलभ मणि
वहीं मामले में बीजेपी के प्रवक्ता और सीएम योगी के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट किया है, “चिट्ठी गैंग को चिट्ठी लिखने दीजिए, उनका काम ही है सेलेक्टिव मुद्दों पर चिट्ठी लिखना. वे चिट्ठी लिखते रहें. योगीजी अपने अंदाज़ में काम करते हुए उनका कच्चा चिट्ठा खोलते रहेंगे!!”
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सीएम योगी के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी का ट्वीट




बीजेपी की सरकार में एक भी हिंदू-मुस्लिम दंगा नहीं हुआ: स्वामी प्रसाद मौर्य
उधर उन्नाव में श्रम विभाग के कार्यक्रम में पहुंचे श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि ये पत्र आपको आया होगा, इसका संज्ञान आपको होगा. बीजेपी की सरकार में एक भी हिंदू-मुस्लिम दंगा नहीं हुआ. कोई जातीय हिंसा नहीं हुई. कानून अपना काम कर रहा है. पूर्ववर्ती सरकारों में कानून की धज्जियां उड़ाने वाले लोग सरकार में मंच साझा करते थे. गुंडे, माफिया, अपराधी, अराजक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. गुंडे, माफिया, अपराधियों में दहशत है.

सेवा समाप्त हो गई है, वह सिर्फ सराहना लें: डिप्टी सीएम
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश व प्रदेश के हित में कोई भी अच्छा काम होने पर अवार्ड वापसी और टुकड़े-टुकड़े गए गैंग सक्रिय हो जाता है. सीएए और एनआरसी समेत तमाम मुद्दों पर कई लोगों ने अवार्ड वापसी का एलान किया था, लेकिन इनमें से किसी ने भी अपना अवार्ड वापस नहीं किया. रिटायर्ड नौकरशाह सिर्फ सरकार को बदनाम करने के लिए इस तरह की हरकतें कर रहे हैं. डिप्टी सीएम ने कहा है कि उनकी सेवा समाप्त हो गई है, वह सिर्फ सराहना लें. सरकारों को सलाह देने के लिए वर्तमान में पदों पर बैठे अफसर पूरी तरह सक्षम हैं. इसी तरह के लोग सीएए के दुरुपयोग को लेकर भी आवाज उठा रहे थे. लेकिन साल भर का वक्त बीतने के बावजूद पूरे देश में दुरुपयोग का एक भी मामला सामने नहीं आया है.

ये है पूरा मामला
बता दें 104 पूर्व ब्यूरोक्रेट्स ने अपने पत्र में लव जिहाद कानून को अवैध बताते हुए इसकी वजह से पीड़ित लोगों को मुआवजे की भी मांग की गई है. साथ ही कहा है कि इस कानून की वजह से यूपी की गंगा-जमुनी तहजीब को चोट पहुंची है और समाज में सांप्रदायिकता का जहर फैला है.

पूर्व ब्यूरोक्रेट्स ने अपने पत्र में मुरादाबाद के पिंकी प्रकरण का जिक्र भी किया है. पत्र में कहा गया है कि पिंकी ने अपनी मर्जी से राशिद से शादी की, लेकिन जब वह अपने शादी को पंजीकृत कराने जा रही थीं तो बजरंग दल के लोगों ने उन्‍हें रोक लिया और मारपीट की. इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही. इतना ही नहीं राशिद और उसके भाई को जेल भेज दिया गया और पिंकी को शेल्टर हाउस. पत्र में आगे लिखा गया कि इस दौरान पिंकी का गर्भपात भी हो गया. उन्‍होंने आरोप लगाया कि यह गर्भपात नहीं, बल्कि एक अजन्मे बच्चे की हत्या थी. पिंकी द्वारा कोर्ट में दिए गए बयान के बाद उन्हें छोड़ा गया. यह पूरी तरह से कानून का दुरुपयोग था, क्योंकि जब दोनों ने जुलाई में शादी की थी तो यह कानून नहीं आया था.

लोगों को मर्जी से जीवनसाथी चुनने का अधिकार
पत्र में आगे कहा गया है कि यह एक वारदात है, जिसके तहत एक आजाद देश में रहने की आजादी का हनन है. उन्होंने आगे लिखा कि वे किसी पॉलिटिकल पार्टी से नहीं जुड़े हैं, लेकिन संविधान द्वारा भारत की परिकल्पना को लेकर संकल्पबद्ध हैं. पत्र में यह भी कहा गया है कि कई अवसरों पर हाईकोर्ट भी यह कह चुका है कि दो बालिग़ लोग अपनी मर्जी से रहने और जीवनसाथी चुनने को स्वतंत्र हैं, लेकिन नया कानून इस आजादी में दखलंदाजी है.
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