राम जन्मभूमि आतंकी हमला: 'फैसला पढ़कर तय करेंगे, जो बरी हुए हैं क्या करना है उनका'

राम जन्मभूमि परिसर में वर्ष 2005 में हुए आतंकी हमले मामले में इलाहाबाद की स्पेशल ट्रायल कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने पांचवें आरोपी मोहम्मद अजीज को बरी कर दिया है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 18, 2019, 9:39 PM IST
राम जन्मभूमि आतंकी हमला: 'फैसला पढ़कर तय करेंगे, जो बरी हुए हैं क्या करना है उनका'
सीएम योगी ने कहा है कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं. पूरा फैसला पढ़ने के बाद हम तय करेंगे कि जो बरी हो गए हैं उन पर क्या कार्रवाई की जाए.
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Updated: June 18, 2019, 9:39 PM IST
2005 में राम जन्मभूमि पर हुए आतंकी हमले पर फैसला 14 साल बाद मंगलवार को आया. इस पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं. पूरा फैसला पढ़ने के बाद हम तय करेंगे कि जो बरी हो गए हैं, उन पर क्या कार्रवाई की जाए.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर में वर्ष 2005 में हुए आतंकी हमले मामले में इलाहाबाद की स्पेशल ट्रायल कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने पांचवें आरोपी मोहम्मद अजीज को बरी कर दिया है.


सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम

स्पेशल जज एससी-एसटी दिनेश चंद्र ने फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों पर 20-20 हजार का जुर्माना भी लगाया है. फैसले को देखते हुए अयोध्या से लेकर प्रयागराज समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.
11  जून को बहस हुई थी पूरी
जज दिनेश चंद्र की कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस 11 जून को पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था. आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने इस हमले को अंजाम दिया था, जिसमें एक टूरिस्ट गाइड रमेश चंद्र पांडेय और शांति देवी समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी. इनमें 5 आतंकी भी शामिल थे, जिन्हें पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मार गिराया था. वहीं इस हमले में सीआरपीएफ और पीएसी के 7 जवान गंभीर रूप से जख्मी भी हुए थे.
14 साल पहले हुई थी गिरफ्तारी
मारे गए आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल सिम की जांच के बाद पांच अभियुक्तों आसिफ इकबाल उर्फ फारुक, मो. शकील, मो. अजीज और मो. नसीम का नाम सामने आया था, जिन्हें 28 जुलाई 2005 को गिरफ्तार किया गया था. इनके एक अन्य साथी डा. इरफान को इससे 6 दिन पहले 22 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि इन सभी ने मिलकर हमले की साजिश रची थी और हथियार जुटाए थे.
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