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लोकसभा चुनाव 2019: हाथरस सीट पर 1991 से ही है बीजेपी का कब्जा

लोकसभा चुनाव 2019: हाथरस सीट पर 1991 से ही है बीजेपी का कब्जा

बीजेपी के किशन लाल दिलेर हाथरस सीट से लगातार चार बार चुनकर लोकसभा गए हैं. 2014 में बीजेपी के राजेश कुमार दिवाकर ने बीएसपी के मनोज कुमार सैनी को 2 लाख तीस हज़ार वोटों से हराया था.

बीजेपी के किशन लाल दिलेर हाथरस सीट से लगातार चार बार चुनकर लोकसभा गए हैं. 2014 में बीजेपी के राजेश कुमार दिवाकर ने बीएसपी के मनोज कुमार सैनी को 2 लाख तीस हज़ार वोटों से हराया था.

बीजेपी के किशन लाल दिलेर हाथरस सीट से लगातार चार बार चुनकर लोकसभा गए हैं. 2014 में बीजेपी के राजेश कुमार दिवाकर ने बीएसपी के मनोज कुमार सैनी को 2 लाख तीस हज़ार वोटों से हराया था.

    हाथरस सीट पर बीजेपी ने 1991 में अपना खाता खोला और तब से अब तक उसे यहां कोई हरा नहीं पाया है. 1991 से 2009 तक लगातार पांच बार बीजेपी के खाते में रही है. बीजेपी के किशन लाल दिलेर यहां से लगातार चार बार चुनकर लोकसभा गए हैं. 2009 में बीजेपी-आरएलडी का गठबंधन चलते यहां से आरएलडी कैंडिडेट सारिका बघेल ने जीत दर्ज की.

    2014 में बीजेपी के राजेश कुमार दिवाकर ने बीएसपी के मनोज कुमार सैनी को 2 लाख तीस हज़ार वोटों से हराया था. राजेश कुमार दिवाकर को कुल वोटों का 51% यानी 5,44,277 वोट हासिल हुए थे जबकि मनोज कुमार सैनी सिर्फ 20.77% यानी 2,17,891 वोट हासिल हुए थे. तीसरे नंबर पर 1,80,891 वोटों सपा के रामजी लाल सुमन रहे थे. रालोद के निरंजन सिंह को सिर्फ 86,109 वोट हासिल हुए थे. यानी तीनों पार्टियां मिलकर भी करीब 80 हज़ार वोटों से पीछे रही थीं.

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    राजेश कुमार दिवाकर (File Photo)


    हाथरस सीट पर बीएसपी काफी मजबूत है और पिछले छह लोकसभा चुनावों से उसका उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहा है. सपा के भी इस सीट पर एक लाख से ज्यादा वोट हैं और उसका उम्मीदवार यहां तीसरे नंबर पर रहता है.

    जाट-मुस्लिम एकता पर निर्भर रालोद
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट वोटरों पर रालोद की अच्छी पकड़ मानी जाती रही है लेकिन 2014 में बीजेपी ने खेल ही बदल दिया था और अजीत सिंह पैतृक बागपत और जयंत मथुरा से हार गए थे. हालांकि जाट वोट बैंक को सपा और बसपा दोनों नजरंदाज नहीं कर सकते. मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर सहित कई निर्वाचन क्षेत्रों में जाट निर्णायक भूमिका में हैं. पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय की आबादी करीब 17 प्रतिशत है और विधानसभा की करीब 77 सीटों पर इस समुदाय का प्रभाव माना जाता है. किसी पार्टी के तरफ इनका झुकाव 50 सीटों के नतीजों को प्रभावित करता है.

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    अजीत सिंह (File Photo)


    रालोद का परंपरागत जाट वोटर वेस्ट यूपी की 16 सीटों को प्रभावित करता है. सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बुलंदशहर, हाथरस, अलीगढ़, नगीना, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद पर प्रभाव है. सपा-बसपा गठबंधन में रालोद के शामिल होने पर वेस्ट यूपी की तमाम सीटों पर गहरा असर पड़ेगा.

    बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर दंगे के चलते मुस्लिम और जाट समुदाय के बीच खाई गहरी हो गई थी. इसके अलावा सपा-बसपा और कांग्रेस को अलग-अलग चुनाव लड़ने का फायदा बीजेपी को मिला था. मोदी लहर पर सवार बीजेपी ने विपक्ष का पूरी तरह से सफाया कर दिया था. इसी रणनीति पर बीजेपी ने 2017 के चुनाव में भी कमल खिलान में कामयाब रही थी. हालांकि कैराना उपचुनाव में मिली जीत ने रालोद केसला हौसला बढ़ाने का काम किया है.

     

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    Tags: Ajit singh, BJP, Hathras news, Hathras S24p16, Lok Sabha Election 2019, Uttar Pradesh Lok Sabha Constituencies Profile

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