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लोकसभा चुनाव 2019: मुजफ्फरनगर में BJP मजबूत, महागठबंधन की राह मुश्किल

लोकसभा चुनाव 2019: मुजफ्फरनगर में BJP मजबूत, महागठबंधन की राह मुश्किल

संजीव बालियान (File Photo)

संजीव बालियान (File Photo)

37% मुस्लिम मतदाता वाली इस सीट पर मुजफ्फरनगर दंगों के बाद 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के संजीव बालियान ने करीब 4 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी.

    2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से भले ही बीजेपी ने आरएलडी के जाट वोट बैंक पर अच्छी पकड़ बना ली हो लेकिन 1992 के राम मंदिर आंदोलन के दौरान भी लगातार तीन बार यह सीट बीजेपी के पास रही. 37% मुस्लिम मतदाता वाली इस सीट पर दंगों के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के संजीव बालियान ने करीब 4 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी. हालांकि 1999 में यह कांग्रेस, 2004 में सपा और 2009 में बसपा के पास रही है. इस सीट से आने वाले लोकसभा चुनाव में खुद चौधरी अजित सिंह चुनाव लड़ सकते हैं.

    इससे पहले 1991 से 1999 तक लगातार तीन बार यह सीट बीजेपी के पास रही, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सपा, बसपा और कांग्रेस प्रत्याशियों को मिलाकर भी करीब दो लाख ज़्यादा वोट हासिल किए थे. तब कांग्रेस और रालोद का गठबंधन था फिर भी इनके हिस्से सिर्फ 14.52% वोट आए थे. ऐसे में गठबंधन के बाद भी 2019 में यहां की राह आसान नहीं है.

    रालोद अध्यक्ष अजित सिंह ने बुढ़ाना, खतौली, लालूखेड़ी और मीरापुर में जन संवाद कार्यक्रम किए हैं और पार्टी के जाट-मुस्लिम समीकरण को फिर से साधने की नीति पर फोकस किया हुआ है. सपा के पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश की रालोद में एंट्री हुई है. कैराना सीट से तबस्सुम बेगम को प्रत्याशी बनाना भी छोटे चौधरी की उसी सोच का नतीजा था. जयंत चौधरी ने भी गांव में दौरे कर दंगा पीड़ितों के दर्द को सुना.

    2014 के लोकसभा चुनाव पर नजर डाले तो बसपा के कादिर राना दूसरे स्थान पर रहे थे. उन्हें दो लाख 52 हजार 241 मत मिले थे. सपा के वीरेंद्र सिंह तीसरे नंबर पर रहे और उन्हें एक लाख 60 हजार 810 मत मिले. कांग्रेस के पंकज अग्रवाल चौथे स्थान पर रहे और उन्हें सिर्फ 12 हजार 937 वोट मिले. तीनों प्रत्याशियों को मिलाकर कुल चार लाख 25 हजार 988 मत मिले जबकि बीजेपी को यहां कुल पड़े 11 लाख सात हजार 765 मतों में से 6 लाख 53 हजार 391 मत मिले. संजीव बालियान ने कुल वोटों का 59% हासिल किया था. 2009 में आरएलडी और बीजेपी का गठबंधन था और इस सीट पर अनुराधा सिंह आरएलडी के टिकट से लड़कर दूसरे नंबर पर रहीं थीं.

    जाट-मुस्लिम एकता पर निर्भर रालोद
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट वोटरों पर रालोद की अच्छी पकड़ मानी जाती रही है लेकिन 2014 में बीजेपी ने खेल ही बदल दिया था और अजीत सिंह पैतृक बागपत और जयंत मथुरा से हार गए थे. हालांकि जाट वोट बैंक को सपा और बसपा दोनों नजरंदाज नहीं कर सकते. मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर सहित कई निर्वाचन क्षेत्रों में जाट निर्णायक भूमिका में हैं. पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय की आबादी करीब 17 प्रतिशत है और विधानसभा की करीब 77 सीटों पर इस समुदाय का प्रभाव माना जाता है. किसी पार्टी के तरफ इनका झुकाव 50 सीटों के नतीजों को प्रभावित करता है.

    रालोद का परंपरागत जाट वोटर वेस्ट यूपी की 16 सीटों को प्रभावित करता है. सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बुलंदशहर, हाथरस, अलीगढ़, नगीना, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद पर प्रभाव है. सपा-बसपा गठबंधन में रालोद के शामिल होने पर वेस्ट यूपी की तमाम सीटों पर गहरा असर पड़ेगा.

    आपके शहर से (लखनऊ)

    Tags: 2013 Muzaffarnagar riots, Ajit singh, Akhilesh yadav, Mayawati, Uttar Pradesh Lok Sabha Constituencies Profile, Uttar pradesh news

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