69000 शिक्षक भर्ती: विवादित आंसरशीट केस में HC ने विशेषज्ञ की राय के साथ सरकार से मांगा हलफनामा

यूपी में शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट में अहम सुनवाई चल रही है, अगली तारीख 27 मई है.
(File Photo)
यूपी में शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट में अहम सुनवाई चल रही है, अगली तारीख 27 मई है. (File Photo)

मामले की सुनवाई के दौरान याचियों की तरफ से राज्य सरकार (State Government) के लघु शपथ पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई गई. उन्होंने कहा कि आंसरशीट के विवादित 4 उत्तरों को लेकर उस शपथ पत्र में कोई स्पष्टीकरण ही नहीं दिया गया है, जबकि यही इस मामले का मुख्य बिंदु है.

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लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच ने 69000 सहायक शिक्षक भर्ती (69000 Assistant Teacher Recruitment) मामले में आंसरशीट के विवाद को लेकर दाखिल याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) को विशेषज्ञों की राय के साथ 27 मई तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है. यह आदेश जस्टिस मनीष माथुर की बेंच ने ऋषभ मिश्रा व अन्य की ओर से दाखिल सेवा सम्बंधी याचिका पर दिया है.

राज्य सरकार के लघु शपथ पत्र पर आपत्ति उठी

वीडियो कॉंफ्रेंसिंग के जरिये शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान याचियों की तरफ से राज्य सरकार के लघु शपथ पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई गई. उन्होंने कहा कि आंसरशीट के विवादित 4 उत्तरों को लेकर उस शपथ पत्र में कोई स्पष्टीकरण ही नहीं दिया गया है, जबकि यही इस मामले का मुख्य बिंदु है.



अगली सुनवाई में अंतरिम राहत पर भी होगा विचार: HC
इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को विवादित उत्तरों के सम्बंध में विशेषज्ञ की राय के साथ हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई पर याचियों की ओर से मांगी गई अंतरिम राहत पर भी विचार किया जाएगा.

ये है मामला

याचियों ने 8 मई 2020 को जारी उत्तर कुंजी में 4 उत्तरों को लेकर आपत्ति जताई है. याचियों के मुताबिक आपत्ति के सम्बंध में सक्षम अधिकारियों की ओर से कोई कार्यवाही न करने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है.

इन प्रश्नों को लेकर अभ्यर्थियों में असंतोष है

प्रश्न संख्या 130 में पूछा गया था कि भारत में गरीबी का आंकलन किस आधार पर किया जाता है? उत्तर है- परिवार का उपभोग व्यय, जबकि सही उत्तर प्रति व्यक्ति व्यय है. इसलिए विकल्प संख्या 3 सही है. प्रश्न संख्या 131 में पूछा है कि संविधान सभा के पहले अध्यक्ष कौन थे? उत्तर सच्चिदानंद सिन्हा दिया है, जबकि विकल्प संख्या 2 में डॉ राजेंद्र प्रसाद भी दिया है और दोनों ही सही है क्योंकि सच्चिदानंद टेंपरेरी अध्यक्ष बने थे और परमानेंट पहले अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद बने थे. यह प्रश्न जब कभी पूर्व में अनेक एग्जाम में पूछा गया तो प्रश्न में स्पष्ट रूप से टेंपरेरी या परमानेंट लिख के पूछा गया था. या दोनों में से किसी एक को ही विकल्प में दिया गया था. इसलिए यह प्रश्न भ्रामक है और पूछने का तरीका भी गलत प्रतीत हो रहा है.

प्रश्न संख्या 143 में अपने एक लेखक की कही हुई बात को कोट करके ब्रेकेट लिखा है और पूछा है कि किस लेखक की कही गई बात है. इसके बाद उत्तर में विकल्प संख्या 3 को सही माना है जिसमें वेलफेयर ग्रह्यय लिखा है, लेकिन जब उनकी परिभाषा देखी गई पुस्तक में कुछ और ही है और कोट किए गए लाइन से पूरी तरह मेल नहीं खाती. किसी लेखक द्वारा कही गई बातों को ठीक उसी तरह लिखा जाता है जैसा उसने कहा हो. चाहे वो किसी द्वारा दिया गया नारा हो या कुछ और उसमें किसी तरह का बदलाव अपराध की श्रेणी में आता है इसलिए यह प्रश्न गलत और भ्रामक दोनों प्रतीत हो रहा है.

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