यूपी: 73 में से 71 कांग्रेसियों की जमानत जब्त, शिवपाल-अक्षय प्रताप की भी नैया डूबी

कांग्रेसी नेताओं में सिर्फ श्री प्रकाश जायसवाल और इमरान मसूद ही बचा पाये अपनी जमानत

Manish Kumar | News18 Uttar Pradesh
Updated: May 24, 2019, 2:52 PM IST
यूपी: 73 में से 71 कांग्रेसियों की जमानत जब्त, शिवपाल-अक्षय प्रताप की भी नैया डूबी
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Manish Kumar
Manish Kumar | News18 Uttar Pradesh
Updated: May 24, 2019, 2:52 PM IST
इसमें कोई शक नहीं कि 2019 के चुनाव में मोदी लहर 2014 के चुनाव से बड़ी थी. इस बार की लहर ऐसी थी कि बीजेपी के अलावा दूसरी पार्टियों के बड़े-बड़े नेता हवा हो गए. हाल ये रहा कि दूसरी पार्टियों के लगभग सभी दिग्गज न सिर्फ हारे बल्कि इतनी बुरी तरह हारे कि अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए. कांग्रेस की हालत तो सबसे पतली रही. यूपी में लोकसभा की 80 सीटों में से 73 पर लड़ी कांग्रेस के सिर्फ 2 नेता ही अपनी जमानत बचा पाए हैं. बाकी के सभी दिग्गज जो पहले केंद्र में भी मंत्री रहे, अपनी जमानत नहीं बचा पाए. इसके अलावा शिवपाल यादव और राजा भैया के रिश्तेदारों ने भी अपनी जमानत खो दी है.

जिन बड़े कांग्रेसी नेताओं की बुरी हार हुई है, उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, पी.एल. पुनिया के बेटे तनुज, राज बब्बर, आरपीएन सिंह, जितिन प्रसाद और अन्नू टण्डन शामिल हैं. राज बब्बर आगरा क्षेत्र के पुराने नेता रहे हैं और मौजूदा दौर में कांग्रेस के अध्यक्ष हैं लेकिन, इनकी भी बुरी हार हुई है. फतेहपुर सीकरी सीट पर राज बब्बर को 1 लाख 72 हजार 82 वोट मिले हैं. इस सीट पर जमानत बचाने के लिए 1 लाख 72 हजार 858 वोट चाहिए थे लेकिन, राज बब्बर इस आंकड़े से 766 वोट पीछे रह गए. लिहाजा उनकी जमानत चुनाव आयोग ने जब्त कर ली है.



नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी हारे

इसी तरह पूर्वांचल के बड़े नेता आरपीएन सिंह ने भी अपनी जमानत गंवा दी है. कुशीनगर सीट पर उन्हें जमानत बचाने के लिए 1 लाख 75 हजार वोट चाहिए थे लेकिन, मिले सिर्फ 1 लाख 46 हजार. सलमान खुर्शीद फर्रूखाबाद सीट पर भी जमानत गंवा बैठे हैं. उन्हें सिर्फ 55 हजार 258 वोट मिले जबकि जमानत बचाने के लिए डेढ़ लाख से ज्यादा चाहिए थे. अब बात बीएसपी से पाला बदलकर कांग्रेस में आए नसीमुद्दीन सिद्दीकी की. बिजनौर में नसीमुद्दीन को महज 25 हजार 833 वोट ही मिल पाए. जमानत बचाने के लिए जरूरी 16.66 फीसदी वोटों की तुलना में उन्हें सिर्फ 2.35 फीसदी वोट ही मिले हैं.

यूपीए सरकार में मंत्री रहे जितिन प्रसाद भी अपनी जमानत नहीं बचा सके.


उन्नाव में अन्नू टण्डन बड़ा नाम हैं लेकिन, वे भी भगवा लहर में गायब हो गईं. अन्नू को 1 लाख 85 हजार वोट मिले लेकिन, जमानत बचाने के लिए जरूरी 2 लाख 6 हजार वोटों के आंकड़े से वे भी पीछे रह गईं. धौरहरा सीट से जितिन प्रसाद की भी यही कहानी है. इस सीट पर उन्हें महज 1 लाख 62 हजार वोट मिले. इनकी भी जमानत जब्त हो गई है. बाराबंकी से कांग्रेस के सांसद रहे पीएल पूनिया के बेटे तनुज पूनिया बुरी तरह हारे हैं. 1 लाख 59 हजार वोट पाकर उन्होंने भी अपनी जमानत गंवा दी है.

शिवपाल यादव भी नहीं कर पाए करिश्मा
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इस कड़ी में कुछ दूसरे भी बड़े नाम हैं. अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी छोड़कर अपनी अलग पार्टी बनाई. वे फिरोजाबाद से चुनाव लड़े लेकिन, शिवपाल का गढ़ कही जाने वाली इस सीट पर एक लाख वोट भी हासिल नहीं कर पाए. शिवपाल को 91 हजार 869 वोट मिले. जमानत बचाने के लिए उन्हें 1 लाख 79 हजार वोट चाहिए थे. लिहाजा उनकी भी जमानत जब्त.

अब तक प्रतापगढ़ में अजेय माने जाने वाले रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पार्टी की भी यही कहानी है. इस सीट से सांसद रह चुके राजा भैया के रिश्तेदार अक्षय प्रताप तो 50 हजार वोट भी नहीं ला पाए. महज 46 हजार वोट पाकर उन्होंने भी अपनी जमानत गंवा दी. इस सीट पर उनकी पुरानी प्रतिद्वन्द्वी राजकुमारी रत्ना सिंह को उनसे ज्यादा वोट मिले हैं. रत्ना सिंह को 77 हजार वोट मिले लेकिन, वे भी अपनी जमानत नहीं बचा पाईं.

रघुराज प्रताप सिंह


कांग्रेस की लाज सिर्फ दो सीटों पर बची है. पहली कानपुर और दूसरी सहारनपुर. कानपुर में हार के बावजूद श्री प्रकाश जायसवाल ने साबित किया है कि उनके क्षेत्र में उनकी पकड़ आज भी मजबूत है. दूसरी तरफ सहारनपुर में इमरान मसूद ने भी अपनी जमानत बचा पाने में कामयाबी हासिल की है. वे तीसरे नंबर पर रहते हुए भी जमानत बचाने के लिए जरूरी कुल पड़े वोटों का एक बटा छह वोट हासिल कर पाए हैं. कानपुर में श्री प्रकाश जायसवाल को 3 लाख 13 हजार वोट मिले हैं और वे दूसरे नंबर पर रहे हैं. इसी तरह सहारनपुर में इमरान मसूद को 2 लाख 7 हजार 68 वोट मिले हैं. हालांकि वे तीसरे नंबर पर रहे लेकिन, जमानत बचाने के लिए जरूरी 2 लाख 5 हजार 2 सौ 91 वोट हासिल कर लिए.

बांसगांव में सिर्फ 2 की जमानत जब्त

जब चुनाव में लड़ाई एकतरफा हो तो शायद ऐसा ही होता है. इस बार पहले और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवारों के अलावा बाकी सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है. पूरे यूपी में 818 उम्मीदवारों ने अपनी जमानत गंवाई है. यूपी की बांसगांव सीट पर सबसे कम 2 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है. ऐसा इसलिए क्योंकि वहां कुल 4 ही कैंडिडेट चुनाव मैदान में थे. इसके बाद जालौन सीट आती है, जिसपर 3 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है. यहां से 5 नेता चुनाव लड़ रहे थे. फिरोजाबाद में 4 जबकि संत कबीरनगर और नगीना में पांच-पांच उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है. सबसे ज्यादा 27 उम्मीदवार अमेठी में चुनाव लड़ रहे थे लिहाजा वहां 25 की जमानत जब्त हुई है.

शिवपाल सिंह यादव


बता दें कि लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीद्वारों को 25 हजार रुपए की जमानत राशि चुनाव आयोग में जमा करनी पड़ती है. एससी/एसटी उम्मीदवारों के लिए ये रकम दस हजार है. चुनाव में यदि किसी प्रत्याशी को कुल पड़े वोटों का 1/6 यानी 16.66 फीसदी भी वोट नहीं मिलता तो चुनाव आयोग उनकी ये जमानत राशि वापस नहीं करता.

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