25 साल के हो चुके जेल में बंद अब्दुल्ला आजम, क्या लड़ पायेंगे रामपुर की स्वार सीट से उपचुनाव?
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25 साल के हो चुके जेल में बंद अब्दुल्ला आजम, क्या लड़ पायेंगे रामपुर की स्वार सीट से उपचुनाव?
अपने पिता आजम खान के साथ अब्दुला खान. फाइल फोटो.

अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam) की उपचुनाव (By Election) में उम्मीदवारी पक्की करने को कोशिशें जारी हैं. वे अभी जेल (Jail) में हैं. उनके उपर दस्तावेजों में हेरफेर का मुकदमा अण्डर ट्रायल है.

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लखनऊ. सपा (SP) के चर्चित नेता व उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व मंत्री आजम खान के बेटे और 2017 के चुनाव में रामपुर (Rampur) की स्वार सीट से चुनाव जीतने वाले अब्दुल्ला आजम क्या फिर से चुनाव लड़ पायेंगे? 2017 के चुनाव में नामांकन के समय उनकी उम्र 25 साल से कम थी. इसी आधार पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी उम्मीद्वारी रद्द कर दी थी. इस वजह से रामपुर की स्वार सीट खाली हो गयी थी. नवम्बर में इस सीट पर उपचुनाव होगा. अब सवाल ये खड़ा हो रहा है कि क्या अबदुल्ला आज़म खान फिर से चुनाव लड़ पायेंगे.

बता दें कि कानूनी लड़ाई में ये बात साबित हुई है कि 2017 के चुनाव में नामांकन के समय उनकी उम्र 11 महीने कम थी. इसी आधार पर उनकी विधायकी छिनी. जिस डेट में अब्दुल्ला की उम्र 25 साल से कम पायी गयी, उस समय से लेकर अब तक तीन साल से ज्यादा का समय बीत चुका है. इस हिसाब से देखें तो वे चुनाव लड़ने की 25 साल की न्यूनतम उम्र सीमा पार कर चुके हैं. ऐसे में क्या वे फिर से चुनाव लड़ने के लिए फिट हो गये हैं?

सपा कार्यकर्ता कर रहे मेहनत
रामपुर में अब्दुल्ला आजम खान को दोबारा लड़ाने की तो पूरी तैयारी चल रही है. स्वार सीट पर उनके करीबियों और समाजवादी पार्टी के काडर की मेहनत जारी है. रामपुर के सपा जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार ने न्यूज़ 18 से बातचीत में बताया कि पार्टी के लोगों की प्रबल इच्छा है कि अब्दुल्ला ही स्वार सीट से चुनाव लड़ें. बाकी फैसला तो आलाकमान को करना है. अखिलेश ने बताया कि स्वार सीट पर उनका मुकाबला किसी पार्टी से नहीं बल्कि जिला प्रशासन से है.
जेल में है अब्दुला


जाहिर है अब्दुल्ला आजम की उपचुनाव में उम्मीदवारी पक्की करने को कोशिशें जारी हैं. वे अभी जेल में हैं. उनके उपर दस्तावेजों में हेरफेर का मुकदमा अण्डर ट्रायल है. दूसरी तरफ बीजेपी भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती. उसकी पहली कोशिश तो यही रहेगी कि स्वार सीट से आजम खान के ब्लड रिलेशन से कोई भी चुनाव न लड़े. अब्दुल्ला तो कतई नहीं. स्वार से भाजपा प्रत्याशी की दौड़ में शामिल आकाश सक्सेना इसके लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि आजम खान के पूरे परिवार के चरित्र से लोग वाकिफ हो गये हैं. वो जान गये हैं कि आजम ने सिर्फ अपना और अपने परिवार के लिए काम किया है.

योग्यता है या नहीं?
अब सवाल उठता है कि क्या कानूनी तौर पर अब्दुल्ला आजम चुनाव लड़ने के योग्य नहीं हैं? इस सवाल का जवाब "ना" है. यानी उनके चुनाव लड़ने पर कहीं से रोक नहीं लगायी गयी है. बीजेपी खेमे में इसी बात को लेकर थोड़ी चिन्ता बनी हुई है. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और आजम खेमे में इस बात को लेकर चिन्ता है कि अब्दुल्ला के मामले को लेकर जिला प्रशासन का क्या रूख रहेगा. चिन्ता इस बात की है कि न जाने किस ग्राउण्ड पर उनके नामांकन पत्र को खारिज कर दिया जाये.  इस जद्दोजहद के बीच इतना तो तय है कि आगे आने वाले समय में कोई बड़ी कानूनी अड़चन नहीं आयी तो आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम जरूर ही स्वार सीट से लड़ेंगे.
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