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शिवपाल अब भी वही करेंगे ​जो मुलायम कहेंगे!

शिवपाल अब भी वही करेंगे ​जो मुलायम कहेंगे!

शिवपाल यादव की फाइल फोटो

शिवपाल यादव की फाइल फोटो

वर्चस्व की इस जंग में अखिलेश से लोहा ले रहे शिवपाल सिंह यादव ने हर बार यही कहा कि जो नेताजी कहेंगे, वही करूंगा.

समाजवादी पार्टी के नए सुप्रीमो अखिलेश यादव हो चुके हैं. उनका विरोध कर रहे पिता मुलायम सिंह पार्टी में संरक्षक हो गए हैं. इस पूरी उठापटक में अगर किसी का सबसे ज्यादा नुकसान होता दिख रहा है, तो वह शिवपाल सिंह यादव ही हैं.

वर्चस्व की इस जंग में अखिलेश से लोहा ले रहे शिवपाल सिंह यादव ने हर बार यही कहा कि जो नेताजी कहेंगे, वही करूंगा. अब सवाल ये है कि पार्टी में हाशिए पर जा चुके शिवपाल क्या अपनी इस बात पर टिके रहेंगे या वर्चस्व की जंग में पिक्चर अभी बाकी है.

सबकी नजर अब शिवपाल सिंह यादव पर है. सभी के मन में एक ही सवाल है कि शिवपाल अब क्या कदम उठाएंगे? वैसे शिवपाल के करीबियों का कहना है कि अखिलेश की तरह शिवपाल नहीं हैं, चाहे जो हो जाए शिवपाल मुलायम सिंह की बात को ही सबसे ऊपर रखेंगे.

उनके अनुसार दरअसल शिवपाल को नहीं, ये मुलायम सिंह को तय करना है कि अगला कदम क्या हो? शिवपाल अब भी वही करेंगे जो मुलायम सिंह यादव कहेंगे. उनका निर्णय ही अंतिम होगा.

उधर मुलायम सिंह की बात पर गौर करें सोमवार को चुनाव आयोग का निर्णय आने से पहले वह अचानक सपा दफ्तर पहुंच गए और कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग में जो बयान दिए, वह वर्चस्व की इस जंग में भविष्य की रणनीति का दर्शा रहा है.

मुलायम ने कहा कि पार्टी बचाने के लिए वह अखिलेश के खिलाफ चुनाव भी लड़ सकते हैं. यही नहीं मुलायम ने बातों-बातों में सिंबल न मिलने की स्थिति में अदालत की राह पकड़ने के आॅप्शन को भी गिना दिया. इन दोनों ही बातों से साफ झलक रहा है, कि बात अभी खत्म नहीं हुई है.

दरअसल एक जनवरी को समाजवादी पार्टी के विशेष अधिवेशन में जो तीन प्रस्ताव पास किए गए थे, उनमें राज्य सभा सांसद अमर सिंह को पार्टी से निकाल दिया गया था. वहीं शिवपाल सिंह यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया गया था.

तीसरे प्रस्ताव में अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया, साथ ही उन्हें नई कार्यकारिणी और संसदीय बोर्ड गठित करने का अधिकार भी सौंप दिया गया था.
इस फैसले के विरोध में मुलायम सिंह यादव चुनाव आयोग पहुंचे और अधिवेशन को अवैध व फर्जी ठहराया. मगर चुनाव आयोग ने पार्टी और उसके चुनाव निशान को अखिलेश यादव के नाम कर दिया.

इस पूरी उठापटक में सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी का होता दिख रहा है, तो वह शिवपाल सिंह यादव हैं. पार्टी में उनका रुतबा पूरी तरह से खत्म होता दिख रहा है. पिछले कुछ महीनों में शिवपाल का काफी फजीहत झेलनी पड़ी, पहले उनसे कैबिनेट मंत्री पद छीना गया, यही नहीं उनके करीबी नेताओं को भी सरकार से बाहर कर दिया गया.

इसके बाद टिकटों के बंटवारे में भी अखिलेश गुट की तरफ से उनके करीबियों को चुन-चुनकर दरकिनार किया गया. फिर प्रदेश अध्यक्ष पद से उन्हें हटाया गया और नए प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने आते ही शिवपाल के करीबी जिलाध्यक्षों को हटाना शुरू कर दिया.

मुलायम ने पिछले साल सितंबर में सीएम अखिलेश से प्रदेश अध्यक्ष पद छीनकर शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. जवाबी हमले में सीएम अखिलेश ने उनसे कई विभाग छीन लिए.

इसे बाद मुलायम ने दखल दी तो शिवपाल को कुछ विभाग वापस मिले लेकिन सरकार में उनका रुतबा बेहद कमजोर हो गया. इसके बाद सपा में लड़ाई बढ़ी तो कैबिनेट मंत्री पद से ही उन्हें बर्खास्त कर दिया गया.

जवाबी हमले में शिवपाल ने मुलायम सिंह यादव की अगुवाई में आनन फानन में 28 दिसंबर को सपा के अधिकतर प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी.

Tags: Akhilesh yadav, Mulayam Singh Yadav, Samajwadi party, Shivpal singh yadav, लखनऊ

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