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आखिर क्यों नौकरी दांव पर लगाकर प्रदर्शन में जुटे हैं यूपी के 24000 लेखपाल?
Ayodhya News in Hindi

Ajayendra Rajan | News18 Uttar Pradesh
Updated: December 21, 2019, 3:57 PM IST
आखिर क्यों नौकरी दांव पर लगाकर प्रदर्शन में जुटे हैं यूपी के 24000 लेखपाल?
बर्खास्तगी काी कार्रवाई के बीच लेखपालों का प्रदर्शन जारी है.

उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के मध्य जोन के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह का कहना है कि कई जनपदों में बर्खास्तगी की कार्यवाही में लगभग 200 लेखपाल बर्खास्त कर दिए गए हैं, वहीं 1660 लेखपालों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है. यही नहीं प्रदेश के सभी 24 हजार लेखपालों की सर्विस ब्रेक भी कर दी गई है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से लेखपाल (Lekhpal) हड़ताल (Strike) पर हैं. इस हड़ताल से स्थिति ये है पूरे प्रदेश में राजस्व से जुड़े कई काम बुरी तरह प्रभावित हैं. मामले में यूपी सरकार ने अब कड़ी कार्रवाई करते हुए लेखपालों की बर्खास्तगी (Termination) शुरू कर दी है. हर जिले से लेखपालों को नोटिस देने की खबरें आ रही हैं. लेखपाल संघ के ही पदाधिकारी दावा करते हैं कि अब तक 200 लेखपालों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, इनमें संघ के अध्यक्ष व पदाधिकारी भी शामिल हैं. वहीं 1660 लेखपालों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है. पूरे प्रदेश के सभी 24 हजार लेखपालों की सर्विस ब्रेक भी कर दी गई है.

उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के मध्य जोन के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश में लेखपालों की चल रहे धरने एवं कार्य बहिष्कार में प्रदेश अध्यक्ष राम मूरत यादव, प्रदेश महामंत्री ब्रजेश श्रीवास्तव, प्रदेश कोषाद्यक्ष विनोद कश्यप, मऊ के जिलाध्यक्ष/जिलामंत्री, उन्नाव के जिलाध्यक्ष/जिलामंत्री, शाहजहांपुर, बदायूं, शामली, औरैया, बरेली, पीलीभीत, रायबरेली, मुजफ्फरनगर आदि कई जनपदों में बर्खास्तगी की कार्यवाही में लगभग 200 लेखपाल बर्खास्त कर दिए गए हैं, वहीं 1660 लेखपालों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है. यही नहीं प्रदेश के सभी 24 हजार लेखपालों की सर्विस ब्रेक भी कर दी गई है.

लेखपालों की ये है मांग
1- कार्य के आधार पर ग्रेड पे किया जाए.



2- 16 साल की सेवा पर कुछ लेखपालों को 2800 ग्रेड पे और कुछ को 4200 ग्रेड पे की वेतन विसंगति है, इसे दूर किया जाए.
3- पदनाम, राजस्व उपनिरीक्षक किया जाए.
4- पेंशन विसंगति दूर की जाए.
5- यही नहीं लेखपालों को 3.33 रुपये प्रतिदिन नियत यात्रा भत्ता की जगह वाहन भत्ता दिया जाए. इसी तरह 3.33 रुपये प्रतिदिन स्टेशनरी भत्ता में भी बढ़ोत्तरी की जाए.

भूपेंद्र सिंह कहते हैं कि इन मांगों पर राजस्व परिषद व शासन के राजस्व विभाग की संस्तुति और कार्यवृत्ति जारी हो चुकी है. लेकिन इसके बाद मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, राजस्व विभाग एवं अध्यक्ष राजस्व परिषद के साथ विभिन्न मीटिंगों बाद भी शासनादेश जारी नहीं किया गया, इसीलिए लेखपाल आंदोलन कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश की सभी तहसीलों में दिनांक 5 नवम्बर से क्रमिक आंदोलन चल रहा है. 10 दिसम्बर से ये पूर्ण कार्य बहिष्कार में तब्दील हो चुका है.

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सभी तहसीलों में 10 दिसंबर से 13 दिसंबर तक कार्य बहिष्कार किया गया. इसके बाद 13 दिसंबर से लेकर 26 दिसंबर तक जनपदों में धरने का कार्यक्रम तय था. वहीं 27 दिसंबर को विधानसभा भी घेरने का कार्यक्रम लेखपाल दे चुके थे. इससे पहले वर्ष 2016 में भी लेखपाल अपनी मांगों को लेकिर विधानसभा का घेराव कर चुके हैं. उनका कहना है कि हमारी मांगों पर बार-बार वित्त विभाग की आपत्ति से लेखपाल नाराज हैं.

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लखनऊ में विरोध प्रदर्शन के दौरान लेखपाल


उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि हमने सरकार से बातचीत की कोशिश नहीं की. 13 दिसंबर को मुख्य सचिव से वार्ता में कोई ठोस आश्वसन नहीं मिला. उसी दिन एस्मा की कार्यवाही शासन से जारी कर दी गई, जिससे तहसील और जनपद में लेखपालों में रोष है. सरकार की तरफ से सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस बार बिना मांग माने आंदोलन से वापस नहीं जाएंगे.

जिलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई

मैनपुरी
मैनपुरी जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 5 नामदर्ज लेखपालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है. जबकि 100 अज्ञात लेखपालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. यह एफआईआर धारा 144 का उल्लंघन करने के मामले में की गई है. चौकी इंचार्ज सिविल लाइन अमित सिंह ने लेखपाल समिति के अध्यक्ष उमाशंकर शाक्य, कोषाध्यक्ष उदयवीर सिंह, खंड मंत्री श्रीकृष्ण शाक्य, सहसचिव प्रजा दीप के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है.

चंदौली
हड़ताल से वापस नहीं लौटने पर चंदौली लेखपाल संघ के अध्यक्ष और महामंत्री के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है. सदर तहसील लेखपाल संघ अध्यक्ष संदीप सिंह, महामंत्री सुजीत को एसडीएम हीरालाल ने नोटिस देने के बाद निलंबित किया है.

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अयोध्या में लेखपालों का प्रदर्शन


सीतापुर
सीतापुर में एसडीएम सदर ने जिलाध्यक्ष सहित 4 लेखपालों को निलंबित कर दिया है. सीतापुर लेखपाल संघ के जिला अध्यक्ष मोहम्मद इरशाद हैं. एसडीएम की कार्रवाई से लेखपालों में हड़कंप मच गया है.

जौनपुर
जौनपुर जिला प्रशासन ने धरना दे रहे 14 लेखपालों को निलंबित कर दिया है. मामला राजस्व लेखपालों के हड़ताल से जुड़ा है. डीएम ऑफिस के सामने 4 दिन से लेखपाल धरना दे रहे थे. लेखपालों ने धारा 144 लागू के बाद दो दिन तक धरना दिया. 340 लेखपालों को विभागीय नोटिस भेजा गया है. जबकि 663 लेखपालों के खिलाफ नो वर्क, नो पे के तहत कार्रवाई हुई है. धरने में 7 पदाधिकारियो के खिलाफ थाने में तहरीर दी गई है. लाइन बाजार थाने में कानूनगो सदर ने केस दर्ज के लिए तहरीर दी है.

हरदोई
हरदोई जिले में हड़ताली लेखपालों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष, मंत्री, तहसील अध्यक्ष व मंत्री सहित 12 लेखपालों को निलंबित कर दिया है. जबकि 394 लेखपालों को एस्मा के प्रावधानों के तहत नो वर्क नो पेय का नोटिस जारी किया है. यह कार्रवाई डीएम पुलकित खरे ने की है.

रायबरेली
लेखपाल संघ के जिला अध्यक्ष सहित तहसीलों के लेखपाल संघ के अध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है. नोटिस के बाद भी हड़ताल करने वाले लेखपालों पर डीएम शुभ्रा सक्सेना ने एक्शन लिया है. 310 लेखपालों पर सर्विस ब्रेक के साथ नो वर्क नो पे के तहत कार्रवाई की गई है. डीएम ने पब्लिक के कार्यों की देखरेख के लिए 34 कानूनगो को लगा दिया है.

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कन्नौज में लेखपालों का प्रदर्शन


मेरठ
मेरठ में भी हड़ताल पर चल रहे लेखपालों पर गाज गिरी है. शासन के निर्देश पर डीएम अनिल ढींगरा ने कार्रवाई करते हुए सदर तहसील के लेखपाल विनोद कश्यप को बर्खास्त कर दिया है. जबकि सदर, सरधना और मवाना तहसीलों के 17 लेखपाल को निलंबित कर दिया है. बाकी हड़ताली लेखपालों पर ब्रेक इन सर्विस के दायरे में लाया गया है. मेरठ जनपद की तीनों तहसीलों में 200 से ज़्यादा लेखपाल हैं. ये लेखपाल एक महीने से ज़्यादा वक़्त से हड़ताल पर थे. जिसके चलते लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है. जिले में प्रमाण पत्रों की जांच भी लंबे समय से अटकी है.

कन्नौज
बुधवार को कन्नौज डीएम ने भी लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष समेत 22 लेखपालों को सस्पेंड कर दिया और जनपद के सभी लेखपालों की सर्विस ब्रेक (service brake) करने की कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं.

इनपुट: अलाउद्दीन अयूब

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First published: December 21, 2019, 3:57 PM IST
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