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बर्खास्तगी पर बोले ओमप्रकाश राजभर- CM योगी ने लिया सही फैसला, स्वागत है

न्यूज18 से बातचीत में राजभर ने कहा कि उन्होंने मंत्री रहते लगातार पिछड़ों के अधिकार की बात उठाई. यही बात मुख्यमंत्री को नागवार गुजरी.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सोमवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर को मंत्रिमंडल से तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी की सिफारिश के बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यह फैसला 20 दिन पहले लेना चाहिए था. हालांकि उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने सही फैसला किया है.

न्यूज18 से बातचीत में राजभर ने कहा कि उन्होंने मंत्री रहते लगातार पिछड़ों के अधिकार की बात उठाई. यही बात मुख्यमंत्री को नागवार गुजरी. उन्होंने कहा, "मैं पिछड़ा कल्याण वर्ग का मंत्री था. लिहाजा मेरा कर्तव्य था कि मैं उनकी बात उठाता. मैंने पिछड़ों को छात्रवृत्ति की बात उठाई, लेकिन मुख्यमंत्री के पास समय नहीं था."

राजभर ने कहा, "मैंने ओबीसी आरक्षण में बंटवारे की बात उठाई तो दबाव में आकर सामाजिक न्याय समिति का गठन किया गया, लेकिन उसकी रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. मेरी मांग थी कि रिपोर्ट को लागू किया जाए." आगे बोलते हुए राजभर ने कहा कि हमने शराबबंदी की बात उठाई. जब गुजरात और बिहार में शराबबंदी हो सकती है तो यूपी में क्यों नहीं.



उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल को जब योगी आदित्यनाथ ने दबाव बनाया कि वे बीजेपी के टिकट पर लड़ें तभी मैंने इस्तीफा दे दिया. मैंने सिर्फ इतना ही कहा था कि मुझे एक ही सीट दे दीजिए मैं अपनी पार्टी का झंडा बुलंद करना चाहता हूं. लेकिन मुझसे कहा गया कि बीजेपी के टिकट पर लड़ना है तो लड़ो, वरना जाओ.
राजभर ने कहा कि 23 मई को वोटों की गिनती होने दीजिए हम तीसरे और चौथे नंबर की पार्टी रहेंगे. उन्होंने कहा कि अभी कई विकल्प खुले हुए हैं. उन्होंने बीजेपी को पूंजीपतियों की पार्टी बताया. राजभर ने कहा कि बीजेपी बात तो गरीबों की करती है, लेकिन वह पूंजीपतियों के लिए काम करती है.

दरअसल राजभर पिछले तीन-चार महीने से बीजेपी के लिए सिरदर्द बने हुए थे. लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे पर सहमती न बनने के बाद 13 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था और बीजेपी के खिलाफ 39 सीटों पर प्रत्याशी भी उतार दिया. इसके बाद लगातार कह रहे थे कि मुख्यमंत्री उनके इस्तीफे को मंजूर नहीं कर रहे हैं. 19 मई को चुनाव खत्म होने के दूसरे दिन ही मुख्यमंत्री ने उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश कर दी. साथ ही सुभासपा के 6 सदस्यों को भी हटा दिया गया है, जिन्हें निगमों में नियुक्ति दी गई थी.

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