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CM योगी के निर्देश पर पुलवामा शहीदों के घर पहुंची यूपी सरकार, जवानों को दी श्रद्धांजलि

उन्नाव में पुलवामा के शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे डीएम और अन्य अधिकारी.

उन्नाव में पुलवामा के शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे डीएम और अन्य अधिकारी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के आदेश के बाद संबंधित जिलों के डीएम और एसपी ने पहुंचकर पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) में शहीद हुए जवानों को दी श्रद्धांजलि.

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लखनऊ. पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) की पहली बरसी के मौके पर देश ने शहीदों को याद किया. उत्तर प्रदेश में भी पुलवामा के शहीदों की याद में जगह-जगह श्रद्धांजलि सभाएं हुईं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने सभी जिलों के डीएम और एसपी को इस संबंध में विशेष दिशा-निर्देश दिया था. सीएम ने अपने आदेश में सभी जनपदों के डीएम और एसपी को शहीदों के घरों पर पहुंच कर श्रद्धांजलि अर्पित करने को कहा था. सीएम योगी के आदेश के बाद पुलवामा हमले में शहीद हुए उत्तर प्रदेश के 12 जवानों के घर संबंधित जिलों के डीएम, एसपी ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी.

डीएम नहीं तो दूसरे अफसर पहुंचे
पुलवामा आतंकी हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि देने को लेकर सीएम योगी ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि यदि किसी बैठक या अन्य कारणों से डीएम या एसपी उपलब्ध नहीं हैं, तो जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शहीद के घर पर पहुंचेंगे. जानकारी के अनुसार बैठकों या अन्य कारणों से जिन जिलों के डीएम या एसपी उपलब्ध नहीं थे, वहां उनके स्थान पर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने पहुंचकर सरकार का प्रतिनिधित्व किया. इस दौरान शहीद जवानों के चित्र पर माल्यार्पण कर देश के लिए दिए गए उनके बलिदान को याद किया गया.

after-cm-yogi-adityanath-order-up-government-officials-pays-tribute-to-pulwama-martyrs-upas | CM योगी के निर्देश पर पुलवामा शहीदों के घर पहुंची यूपी सरकार, जवानों को दी श्रद्धांजलि
महाराजगंज में डीएम, एसएसपी समेत अन्य अफसरों ने पुलवामा के शहीद पंकज त्रिपाठी को श्रद्धांजलि दी.


पुलवामा में बना स्मारक
आपको बता दें कि पिछले वर्ष आज ही के दिन 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया था. इस आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे, जिनमें से कई यूपी के रहने वाले भी थे. सीआरपीएफ के शहीद जवानों की याद में पुलवामा के लेथपुरा कैंप में एक स्मारक बनाया गया है, जिसका उद्घाटन भी शुक्रवार को किया गया.

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CM योगी बोले- पहले मुख्यमंत्री बनने पर बनवाई जाती थीं हवेलियां, हमने 42 लाख गरीबों के घर बनाए

UP: हर दूसरे-तीसरे दिन हुआ करते थे साम्प्रदायिक दंगे (File photo)

UP News: सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले कुत्सित विचारों वाले विपक्षी दल अयोध्या जाने से डरते थे और हम पर तंज करते थे कि "मंदिर वहीं बनाएंगे पर तारीख नहीं बताएंगे".

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लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने कहा है कि 2017 से पहले यूपी में अपराधी और माफिया सत्ता के शागिर्द बनकर राज्य में भय, भ्रष्टाचार और अराजकता का माहौल खड़ा कर रहे थे और हर दूसरे-तीसरे दिन साम्प्रदायिक दंगे होते थे, लेकिन आज इनके खिलाफ हो रही कार्रवाइयों ने पूरे देश में एक मॉडल पेश किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि उनसे पहले के मुख्यमंत्रियों में अपनी हवेलियां बनाने की होड़ मचती थी, लेकिन हमने इस नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में 42 लाख गरीबों के लिए आवास बनाए हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पटल पर यूपी को लेकर परसेप्शन बदला है. शासन के प्रति जनता का भरोसा बढ़ा है और अब यही विश्वास 2022 के चुनाव में 350 सीटों के भारी बहुमत के साथ एक बार फिर हमारी जीत सुनिश्चित करेगा .

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले कोई भी पर्व शांति से नहीं हो पाता था लेकिन बीतेचार साल से कोई दंगा नहीं हुआ.इससे लोगों की धारणा बदली और निवेशकों को भय नहीं है. इसीलिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में यूपी नम्बर दूसरे पर है.

कोरोना प्रबंधन की तारीफ़
सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में यूपी के कोरोना प्रबंधन के मॉडल को हर ओर सराहा जा रहा है. कोरोना काल में देश की पहली मोबाइल डिस्प्ले यूनिट यूपी में लगी और चीन से कारोबार खत्म कर भारत आई इस कम्पनी ने भारत में यूपी को चुना. उन्होंने कहा कि यह नया उत्तर प्रदेश निवेशकों की पहली पसंद है तो पर्यटकों के मन की चाह भी है. उन्होंने कहा, कि पहले कुत्सित विचारों वाले विपक्षी दल अयोध्या जाने से डरते थे और हम पर तंज करते थे कि “मंदिर वहीं बनाएंगे पर तारीख नहीं बताएंगे”. आज पूरी दुनिया अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण देख रही है.

बीते चार साल में एक भी दंगा नहीं हुआही है.

UP Election 2022: वोट बैंक को मैनेज करने में जुटी बीजेपी, जाटों के बाद अब गुर्जरों को साधने की कोशिश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजा मिहिर भोज की मूर्ति का करेंगे अनावरण

UP Political News: अलीगढ़ में जाट राजा महेन्द्र प्रताप सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय का शिलान्यास कर जहां जाट वोट बैंक को अपने पाले में लाने की कोशिश हुई, अब वहीं गुर्जरों को साधने की कोशिश है.

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लखनऊ. जैसे-जैसे यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों का वोट मैनेजमेंट भी दिखने लगा है. कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन से परेशान बीजेपी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को साधने के लिए नया रास्ता अख्तियार कर लिया है. अलीगढ़ में जाट राजा महेन्द्र प्रताप सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय का शिलान्यास कर जहां जाट वोट बैंक को अपने पाले में लाने की कोशिश हुई, अब वहीं गुर्जरों को साधने की कोशिश है.

दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नोएडा के दादरी मे गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के 12 फुट की प्रतिमा का अनावरण सीएम योगी आदित्यनाथ से कराने की तैयारी है.यह प्रतिमा सम्राट मिहिर भोज के नाम पर बने पीजी कॉलेज में लगी है. दो साल पहले ये प्रतिमा तैयार की गयी थी, पर कोरोना की वजह से अनावरण नहीं हो पाया था.

बीजेपी का नया दांव
वरिष्ठ पत्रकार अनिल भारद्वाज कहते हैं कि ये बीजेपी का नया दांव है. सीएम योगी आदित्यनाथ जब खुद मूर्ति का अनावरण करेंगे तो गुर्जर समाज में एक संदेश जाएगा जो कि बड़ा वोक बैंक है. और बीजेपी संदेशों की राजनीति में माहिर हैं. गौरतलब है कि राजा मिहिर भोज को धर्मरक्षक राजा के तौर पर देखा जाता है और गुर्जर उनको अपना पूर्वज मानते हैं.

22 सितंबर को मुख्यमंत्री कर सकते हैं मूर्ति का अनावरण
दरअसल, किसान आंदोलन के बाद से पश्चिमी यूपी का सियासी समीकरण गड़बड़ा गया है, जिसको दुरुस्त करने के लिए बीजेपी के दिग्गज रात दिन एक किए हुए हैं. इसी के तहत ये भी तैयारी की गई है. कहा जा रहा है कि 22 सितंबर को सीएम मिहिर भोज की मूर्ति का अनावरण कर सकते हैं. विपक्षियों का मानना है कि मूर्ति का अनावरण गलत नहीं है, लेकिन सवाल बीजेपी के समय को लेकर जरूर उठता है.

Mahant Narendra Giri Death: आनंद गिरी का बड़ा बयान, कहा- गुरुजी कभी आत्महत्या नहीं कर सकते, उनकी हत्या हुई

आनंद गिरी का आरोप है कि महंत नरेंद्र गिरी को मारकर मुझे फंसाने की साजिश है.

Mahant Narendra Giri Death: आनंद गिरी ने कहा है कि गुरुजी कभी आत्महत्या नहीं कर सकते, उनकी हत्या हुई है. उन्होंने कुछ अधिकारियों पर ही गंभीर आरोप लगाकर साजिश करने की बात कही है. आनंद गिरी ने कहा कि आईजी स्वयं इसमें संदिग्ध हैं.

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प्रयागराज. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी (Narendra Giri) का शव संदिग्ध परिस्थिति में मिलने के बाद शोक के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं. पु​लिस ने उनके शिष्य आनंद गिरी पर शिकंजा कसना शुरू किया है. उन्हें हरिद्वार में हिरासत में लिया गया है. वहीं आनंद गिरी ने कहा है कि गुरुजी कभी आत्महत्या नहीं कर सकते, उनकी हत्या हुई है. उन्होंने कुछ अधिकारियों पर ही गंभीर आरोप लगाकर साजिश करने की बात कही है. आनंद गिरी ने कहा कि आईजी स्वयं इसमें संदिग्ध हैं. आईजी लगातार नरेन्द्र गिरी के संपर्क में रहते थे.

आनंद गिरी का आरोप है कि मठ और मंदिर का पैसा हड़पने वालों ने महंत जी की हत्या की. इस साजिश में मठ के कई बड़े नाम शामिल हो सकते हैं. करोड़ों का खेल हैं. इसमें एक सिपाही अजय सिंह भी है. यही लोग उनकी हत्या कर सकते हैं. आनंद गिरी का आरोप है कि इस घटना में पुलिस के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं.

आनंद गिरी का आरोप है कि महंत नरेंद्र गिरी को मारकर मुझे फंसाने की साजिश है. इसमें पुलिस के बड़े अधिकारी ही शामिल हैं. मैं जांच की मांग करता हूं. उनके खिलाफ बहुत बड़ी साजिश की गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि मनीष शुक्ला जिनकी उन्होंने शादी महंत नरेंद्र गिरी ने कराई थी. उसे पांच करोड़ का मकान दिया. इसके आलावा अभिषेक मिश्र भी इस मामले में शामिल हो सकते हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए.

वो कभी आत्महत्या नहीं कर सकते
संदेह के घेरे में आए आनंद गिरी ने आरोप लगाया कि आईजी स्वयं इसमें संदिग्ध हैं. आईजी लगातार उनके संपर्क में रहते थे. आईजी क्लोजली इस विषय को वॉच कर रहे थे और उनके साथ पारिवारिक संबंध थे. यह पूरी तरह से जांच का विषय है. उनके खिलाफ बहुत बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है. मुझे फंसा कर इस केस को रफा दफा करने की कोशिश की जा रही है. यही षड्यंत्र है. एक तीर से दो निशाने करने के लिए चालबाज लोग साजिश कर रहे हैं. महंत नरेंद्र गिरी के शव के पास एक सुसाइड नोट मिला है. इस सुसाइड नोट में तीन लोगों के नाम दिए गए हैं. इसमें आद्या तिवारी, संदीप तिवारी और आनंद गिरी के नाम शामिल हैं. इसके सामने आने के बाद पुलिस ने इन लोगों की ओर जांच शुरू कर दी है. इसी के बाद आनंद गिरी को हरिद्वार में हिरासत में लिया गया है.

‘मेरा उनसे नहीं मठ की जमीन को लेकर विवाद था’:आनंद गिरी
नरेन्द्र गिरी की रहस्यमय परिस्थिति में मौत के बाद आनंद गिरी बताया, ‘अभी मैं हरिद्वार में हूं, कल प्रयागराज पहुंचकर देखूंगा क्या सच है.’ आनंद गिरी ने कहा ‘हमें अलग इसलिए किया गया, ताकि एक का काम तमाम हो सके. नरेंद्र गिरी से विवादों पर आनंद गिरी ने कहा कि ‘मेरा उनसे नहीं मठ की जमीन को लेकर विवाद था.’ आनंद गिरी ने कहा- ‘शक के दायरे में कई लोग हैं, उन्होंने ही नरेंद्र गिरी को मेरे खिलाफ किया.’ इसके साथ ही आनंद ​गिरी ने उनकी मौत पर कुछ बड़े लोगों और एक पुलिस के अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं.

आनंद गिरी पर रहे संगीन आरोप
संत आनंद गिरी पर दो अलग-अलग मौकों पर दो महिलाओं के साथ मारपीट का आरोप लगा था. आरोप के मुताबिक उन्हें दो अवसरों पर हिंदू प्रार्थना के लिए अपने घरों में आमंत्रित किया गया था. जहां 2016 में उन्होंने अपने घर के बेडरूम में एक 29 वर्षीय महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट की. इसके बाद 2018 में, गिरि ने लाउंज रूम में 34 वर्षीय एक महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट की.

Bihar: CM नीतीश के जनता दरबार में रिटायर्ड शिक्षक की अनोखी फरियाद, कहा- मेरे गांव को UP में शामिल करवाइए

गोपालगंज जिले का रहनेवाला एक रिटायर्ड शिक्षक ने अपने गांव को उत्तर प्रदेश में शामिल करने की मांग कर डाली.

Bihar News: सीएम नीतीश कुमार के जनता दरबार में सोमवार को एक अजीबोगरीब मामला आया जिसमें गोपालगंज जिले के रहनेवाले रिटायर्ड शिक्षक योगेन्द्र मिश्रा ने अपने गांव को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में शामिल करने की मांग कर डाली. यह अनोखी फरियाद सुनकर मुख्यमंत्री कुछ देर के लिए भौंचक्के रह गए

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 20, 2021, 21:30 IST
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पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के जनता दरबार (Janata Darbar) में एक से बढ़कर एक मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन सोमवार को मुख्यमंत्री के सामने एक अजीबोगरीब मामला आया. गोपालगंज (Gopalganj) जिले के रहने वाले रिटायर्ड शिक्षक योगेन्द्र मिश्रा ने अपने गांव को उत्तर प्रदेश में शामिल करने की मांग कर डाली. इस अनोखी मांग पर नीतीश कुमार ने कुछ देर तक चुप्पी साध लिया, लेकिन बाद में उन्हें संबंधित अधिकारियों के पास भेज दिया. बताया जा रहा है कि योगेन्द्र मिश्रा का गांव उत्तर प्रदेश की सीमा के बिल्कुल सटा हुआ है. इसको लेकर ही बुजुर्ग शिक्षक ने मुख्यमंत्री से मांग रखी कि यूपी का कुशीनगर जिला उनके गांव से महज एक किलोमीटर दूर है. इसलिए बेहतर होगा कि उनके गांव को यूपी में शामिल करवा दिया जाए.

अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्य योगेन्द्र मिश्रा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहा कि मैं रिटायरमेंट के बाद से जनसेवा करता आ रहा हूं. गांव की भौगोलिक परिस्थिति साफ बताती है कि उसे बिहार की बजाए उत्तर प्रदेश का हिस्सा होना चाहिए. इसलिए आपसे आग्रह है कि मेरे गांव को यूपी में शामिल करा दिया जाए. मुख्यमंत्री उनकी इस मांग को सुनकर चौंक गए और आवेदक को संबंधित विभाग के अधिकारी के पास भेज दिया.

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जनता दरबार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने शायद ही पहले कभी ऐसा कोई मामला आया हो

रिटायर्ड शिक्षक ने CM  नीतीश से की अजीबोगरीब मांग
सीएम नीतीश कुमार के सामने शायद ही पहले कभी ऐसा कोई मामला आया हो, जिसमें यह मांग की गई हो कि उसके गांव को उत्तर प्रदेश का हिस्सा होना चाहिए, न कि बिहार में. हालांकि, यह मांग पूरी करना नामुमकिन है. इसके बावजूद नीतीश कुमार ने धैर्य के साथ बुजुर्ग शिक्षक की बात सुनी और उन्हें अधिकारियों के पास भेज दिया.

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सोमवार को नीतीश कुमार के जनता के दरबार कार्यक्रम में 123 आवेदकों को शामिल किया गया. मुख्यमंत्री ने सभी मामलों को सुनकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. जनता दरबार में आए एक और व्यक्ति ने मुख्यमंत्री से गांव के दबंग मुखिया की करतूत की शिकायत की जिस पर उन्होंने पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को उचित कार्रवाई करने को कहा.

RIP Mahant Narendra Giri: महंत नरेंद्र गिरि के निधन से शोक में डूबी अयोध्या, CM योगी ने दी श्रद्धांजलि

RIP Mahant Narendra Giri: अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का निधन हो गया.

RIP Mahant Narendra Giri: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के निधन पर देशभर के नेताओं ने जताया शोक. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान समेत कई अन्य नेताओं ने दी श्रद्धांजलि.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 20, 2021, 19:28 IST
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अयोध्या. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी के निधन से धर्मनगरी अयोध्या में शोक की लहर दौड़ गई है. अयोध्या में उनके निधन का समाचार पहुंचते ही संतों में शोक की लहर दौड़ गई. देशभर के नेताओं ने भी महंत नरेंद्र गिरि के निधन पर श्रद्धांजलि व्यक्त की है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व सीएम अखिलेश यादव, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है. हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के निधन बेहद दुखद बताया है. राजू दास ने कहा कि भगवान से प्रार्थना है कि मृत आत्मा को शांति प्रदान करें. नरेंद्र गिरी का निधन साधु समाज के लिए अपार क्षति के समान है.

हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि स्व. नरेंद्र गिरि सनातन धर्म की रक्षा के लिए समर्पित रहते थे. सभी वर्ग और सभी सम्प्रदायों में उनका सम्मान था. न सिर्फ हिंदू धर्म, बल्कि अन्य धर्मों के लोग भी उन्हें सम्मान देते थे. राजू दास ने कहा कि उनका निधन सनातन धर्म के लिए अपार क्षति है. दुख की घड़ी में उनके अनुयायियों और शिष्यों को ईश्वर कष्ट सहन करने की शक्ति दे.

इधर, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने महंत के निधन को आध्यात्मिक जगत के लिए क्षति बताया है. सीएम योगी ने ट्वीट किया, ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि जी का ब्रह्मलीन होना आध्यात्मिक जगत की अपूरणीय क्षति है. प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान तथा शोकाकुल अनुयायियों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें. ॐ शांति!’ यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान समेत कई अन्य नेताओं ने भी महंत नरेंद्र गिरि के देहांत पर शोक संवेदना प्रकट की है.

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RIP Mahant Narendra Giri: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत नरेंद्र गिरि के निधन पर शोक प्रकट किया.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान समेत कई अन्य नेताओं ने भी नरेंद्र गिरि के देहांत पर शोक संवेदना प्रकट की है. अखिलेश यादव ने उनके निधन पर ट्वीट किया, ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पूज्य नरेंद्र गिरी जी का निधन, अपूरणीय क्षति! ईश्वर पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व उनके अनुयायियों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें. भावभीनी श्रद्धांजलि.’

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RIP Mahant Narendra Giri: सपा प्रमुख अखिलेश यादव, एमपी के सीएम शिवराज समेत कई नेताओं ने नरेंद्र गिरि के निधन पर शोक प्रकट किया.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी महंत के निधन पर गहरी शोक संवेदना प्रकट की. उन्होंने कहा, ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पूज्य संत महंत नरेंद्र गिरी जी महाराज के देवलोकगमन की दुःखद सूचना मिली. सनातन धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले पूज्य स्वामीजी द्वारा समाज के कल्याण में दिए योगदान को सदैव याद किया जाएगा. ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें.’

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RIP Mahant Narendra Giri: यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने नरेंद्र गिरि के निधन पर जताया शोक.

यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के देहांत पर संवेदना प्रकट की है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि पूज्य महंत नरेंद्र गिरि जी महाराज ने ख़ुदकुशी की होगी, स्तब्ध हूं, निःशब्द हूं, आहत हूं, मैं बचपन से उन्हें जानता था, साहस की प्रतिमूर्ति थे,मैंने कल ही सुबह 19 सितंबर को आशीर्वाद प्राप्त किया था, उस समय वह बहुत सामान्य थे बहुत ही दुखद असहनीय समाचार है ! पूज्य महाराज जी ने देश धर्म संस्कृति के लिए जो योगदान दिया है उसे भूलाया नहीं जा सकता है ,अश्रुपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. भगवान से प्रार्थना है कि सभी भक्तों शिष्यों को दुख सहने की शक्ति दें भगवान पुण्यात्मा को चरणों में स्थान दें !! ॐ शान्ति शान्ति शान्ति’

किसानों की खर्च हो अठन्नी, आमदनी हो रुपैया यूपी सरकार का बड़ा फैसला, जानें प्लान

प्रदेश सरकार ने साढ़े चार सालों में किसानों की आय दोगुनी करने के साथ उनको तकनीक से जोड़ने का काम किया है.

Govt. plan : प्रदेश की 27 मंडियों को आधुनिक किसान मंडी के रूप में डेवलप किया जा रहा है. किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए 69 कृषि विज्ञान केंद्रों के अलावा 20 अन्य कृषि विज्ञान केंद्र निर्मित कराए जा रहे हैं.

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लखनऊ. किसानों को कम लागत में अधिक उत्‍पादन देने के लिए गन्‍ना शोध परिषद शाहजहांपुर की तर्ज पर यूपी का गन्‍ना विभाग सेवरही के गन्‍ना शोध परिषद और मुजफ्फरनगर केंद्र में भी जैव उत्‍पादों का उत्‍पादन करेगा. इन केंद्रों पर भी अब ट्राइकोडर्मा, वाबेरिया के साथ-साथ ट्राइकोकार्ड व पीसीबी का उत्‍पादन किया जाएगा. इससे अधिक संख्‍या में किसानों को उच्‍च गुणवत्‍ता के बीज मिलने में आसानी होगी. वह कम लागत में अच्‍छी फसल पैदा कर सकेंगे. इस संबंध में गन्ना विकास विभाग के अपर मुख्‍य सचिव संजय भूसरेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया है.

अपर मुख्‍य सचिव के अनुसार, जैव उत्पादों के उत्पादन और बीज उत्पादन के लिए गन्ना शोध परिषद, सेवरही एवं गन्ना शोध परिषद, मुजफ्फरनगर केंद्र पर भी जैव उत्पाद, ट्राइकोडर्मा, वाबेरिया, बैसियाना, मेटाराइजियम एनीसोपली, आर्गेनोडीकंपोजर के साथ-साथ ट्राइकोकार्ड, एजोटोबैक्टर और पीएसबी का उत्पादन किया जाएगा. इससे बीज संवर्द्धन की नवीन तकनीक और टिश्यू कल्चर से तेज गति से बीजों का संवर्धन किया जा सकेगा. इससे अधिक से अधिक किसानों को बीज उपलब्ध हो सकेंगे. इसके अलावा उन्‍होंने वैज्ञानिकों से किसान हित से जुड़े शोधों को बढ़ावा देने का निर्देश भी दिया है. इससे किसानों की लागत कम करके उपज में वृद्धि की जा सकेगी.

प्रदेश सरकार ने साढ़े चार सालों में किसानों की आय दोगुनी करने के साथ उनको तकनीक से जोड़ने का काम किया है. सरकार ने कम समय में गन्‍ना किसानों को सबसे अधिक 1.44 लाख करोड़ रुपये का भुगतान कर उनको राहत पहुंचाने का काम किया है. प्रदेश की 27 मंडियों को आधुनिक किसान मंडी के रूप में डेवलप किया जा रहा है. किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए 69 कृषि विज्ञान केंद्रों के अलावा 20 अन्य कृषि विज्ञान केंद्र निर्मित कराए जा रहे हैं, जहां पर किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई तकनीकों पर शोध किया जा रहा है.

Explained: पंजाब में एक दलित नेता के CM बनने पर मायावती के तेवर क्यों हुए तल्ख, जानें वजह

पंजाब में दलित सीएम बनने पर तिलमिलाईं मायावती (File photo)

BSP Leader Mayawati News: दरअसल, दलित वोट बैंक से कांग्रेस और बसपा का क्या रिश्ता रहा है. आंकड़े बताते हैं कि 1985 के बाद से कांग्रेस का ग्राफ गिरता चला गया. 1985 में यूपी में कांग्रेस का वोट शेयर 39 फीसदी था.

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लखनऊ. पंजाब (Punjab) में कांग्रेस पार्टी (Congress Party) ने एक दलित चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को सीएम की कुर्सी पर बैठाया और इधर यूपी में मायावती (Mayawati) ने कांग्रेस पार्टी पर हमला बोल दिया. कांग्रेस और बसपा का दलित वोट बैंक से रिश्ता ही ऐसा है. एक का प्लस दूसरे का माइनस बन जाता है. दलित पहले कांग्रेस के साथ थे. जैसे जैसे उसका साथ छोड़ते गये, बसपा के साथ जुड़ते गए. इसीलिए कांग्रेस खत्म होती गयी और बसपा खिलती गयी. अब मायावती सशंकित रहती हैं कि कहीं दलित फिर से न कांग्रेस की ओर रुख कर लें. कांग्रेस की यही लालसा है कि उसका घर फिर से दलित बसा दें. झगड़ा इसी का है.

पंजाब और यूपी में अगले साल एक साथ विधानसभा चुनाव होने हैं. पंजाब में तो कांग्रेस ने दलित कार्ड चल दिया है लेकिन, इसे यूपी में भी खूब प्रचारित किया जाएगा. दलित वोट बैंक की गोलबंदी के लिए कांग्रेस पार्टी यूपी की अपनी रैलियों और सभाओं में भी इसे जोर जोर से बताएगी कि उसने एक दलित को सीएम बनाया. तो क्या उसके इस कदम से दलित वोटों का उसकी ओर खिंचाव हो पाएगा?

बसपा के लिए था टर्निंग प्वाइंट
दरअसल, दलित वोट बैंक से कांग्रेस और बसपा का क्या रिश्ता रहा है. आंकड़े बताते हैं कि 1985 के बाद से कांग्रेस का ग्राफ गिरता चला गया. 1985 में यूपी में कांग्रेस का वोट शेयर 39 फीसदी था. 1989 में ये गिरकर 29 फीसदी रह गया. 1991 में तो मात्र 18 फीसदी ही बचा. 1993 में और गिरकर 15 फीसदी पर आ टिका. यही वो चुनाव था जिसमें दलित वोटबैंक पूरी तरह कांग्रेस से टूटकर बसपा के खेमे में जा खड़ा हुआ. बसपा के आंकड़े देखिए. 1989 और 1991 के चुनाव में बसपा को मात्र 10 फीसदी वोट मिले थे लेकिन, 1993 में उसका वोट शेयर बढ़ गया. पार्टी को 28 फीसदी से ज्यादा वोट मिले. बसपा के लिए यही चुनाव टर्निंग प्वाइंट था.

दलितों के सहारे सीएम बनीं मायावती
इस चुनाव में दलित वोट बैंक कांग्रेस से पूरी तरह टूटकर बसपा के खेमे में आ चुका था. तब से लेकर आज तक बसपा गिरती हालत में भी 20 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करती रही है और कांग्रेस 10 फीसदी से कम (2012 के चुनाव को छोड़कर). बता दें कि इसी के बाद बसपा को सत्ता में आने का मौका हासिल हुआ. मायावती इसी वोट बैंक के सहारे चार बार सीएम बनीं. भले ही ये कहा जाए कि मायावती को सीएम बनाने में और भी कई समुदायों का वोट बैंक शामिल रहा है लेकिन, कोर वोट बैंक तो दलित समुदाय ही माना जाता है.

बसपा को भाजपा से ज्यादा कांग्रेस से खतरा
अब कांग्रेस बसपा से इस वोट बैंक की छीनाझपटी में लगी है. ऐसा होते देख मायावती भला चुप कैसे रह सकती हैं. उन्हें भी तो अपना घर बचाना है. लिहाजा वो भाजपा पर हमला बोलते-बोलते कांग्रेस को लपेटे में लेना नहीं भूलतीं. दलित वोट बैंक के खिसकने को लेकर उन्हें भाजपा से ज्यादा कांग्रेस से खतरा है. दलित कांग्रेस का पुराना वोट बैंक जो रहा है. यही वजह है कि पंजाब में कांग्रेस ने दलित चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया तो मायावती हमलावर हो उठीं. उन्हें डर है कि जो 1993 में हुआ कहीं उसका उल्टा न होने लगे.

लखनऊ बुलेटिन : अभी लखनऊ में और अधिक बारिश होने का अनुमान 

जबरदस्त बारिश से जलमग्न हुई राजधानी की सड़कें

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1.जबरदस्त बारिश से लखनऊ के मोहिबुल्लापुर स्टेशन पर जलभराव में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई.जबकि अलीगंज में बिजली का झटका लगने से एक बच्चे की जान चली गयी है. लखनऊ का दो तिहाई हिस्सा जलमग्न हो गया.जानकीपुरम आकांशा परिसर के पास एक रिक्शा चालक की पानी में डूबने से मौत हो गई.

2. लखनऊ में विमान सेवा बाधित हुई, कई ट्रेनों के पहिये थम गए. रेलवे ट्रैक्स पानी में डूबे थे. बिजली व्यवस्था चरमरा गयी, कई इलाकों में घंटो तक बिजली गायब रही. बारिश के पानी के कारण तीन-स्कोर ट्रांसफार्मर में भी खराबी आ गई, जिससे शहर में लंबे समय तक बिजली बाधित रही.

3. 40 घंटे की लगातार बारिश के बाद भी लखनऊ में और अधिक बारिश की संभावना. अधिकारियों को प्रत्येक क्षेत्र में हुए नुकसान के आधार पर मुआवजे के लिए राशि भी तय करनी होगी.

4. तेज हवा और लगातार बारिश के कारण जिले भर में करीब 150 पेड़ और 300 बिजली के खंभे उखड़ गए.संपत्ति और फसलों के नुकसान के अलावा, भारी बारिश के कारण अब तक लगभग 38 लोग हताहत हुए हैं, जिससे हर तरफ चिंता बढ़ गई है.

लखनऊ बुलेटिन : ई- बसों की लोकेशन बताएगा 'चलो एप'

सिटी बसों की जानकारी अब एप पर होगी उपलब्ध

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1:सिटी बसों की लोकेशन बताएगा \’चलो एप\’. नगरीय परिवहन निदेशालय ने यात्री सुविधा के मद्देनजर चलो एप तैयार किया है. इस पर अब तक 260 सीएनजी सिटी बसों की लोकेशन देखी जा सकती थी. मगर इस एप पर 140 इलेक्ट्रिक बसों को भी लिंक किया जा रहा है.इसका ट्रायल भी शुरू हो गया है.आने वाले दिनों में सिटी बसों में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा.सिटी ट्रांसपोर्ट के एमडी पल्लव बोस ने बताया कि स्मार्ट सिटी के मद्देनजर चलो एप पोर्टल अपडेट किया जा रहा है. इसमें बड़े बदलाव किए गए हैं.नगर बसों के सभी रूट, नए बनाये जाने वाले मार्ग, समय-सारिणी, किराया, सुविधाओं के अलावा सिटी बसों से संबंधित तमाम जरूरी चीजें दैनिक यात्री चंद पलों में अपने मोबाइल से ही पता चल जाएगा.नई बसों के संचालन के लिए इस वेबसाइट को अंतिम रूप दिया जा रहा है. यह वेबसाइट एलसीटीसीएल.को.इन (lctcl.co.in) होगी. नगर बसों से जुड़ी सभी अहम जानकारी इस एप पर उपलब्ध होंगी.साथ ही इस बार बनाई जाने वाली वेबसाइट हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में नगर बसों की जानकारी आम लोगों को देगी.

2. फैजुल्लागंज में जलभराव से नाराज स्थानीय निवासियों ने शुक्रवार को नगर निगम के इंजीनियरों को पीट दिया.फैजुल्लागंज में काफी ज्यादा जलभराव हो गया है. लोगों के घरों में घुटनों तक पानी भरा हुआ है. नगर निगम में लगातार शिकायत करने के बावजूद मौके पर पहुंचे अधिकारियों को भी दौड़ा लिया. इसको लेकर काफी हंगामा हुआ. दोबारा नगर निगम के इंजीनियर व अधिकारी वहां जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे. बाद में क्षेत्रीय विधायक के साथ लोग मौके पर पहुंचे.

3. लखनऊ-आगरा के बीच की फ्लाइट 1 अक्टूबर से चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से उड़ान भरेगी. यह सेवा एक बार फिर दोनों शहरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगी.
फ्लाइट चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे से अपनी यात्रा शुरू करेगी और दोपहर 3:45 बजे आगरा के खेरिया हवाई अड्डे पर पहुंचेगी.
आगरा से विभिन्न शहरों के लिए कई उड़ानें पहले ही शुरू की जा चुकी हैं, लखनऊ-आगरा हवाई सेवा को अगले महीने तक हरी झंडी दिखाई जाएगी.

UP: अखिलेश यादव का BJP पर कटाक्ष, बोले- 'गंगा मइय्या, गड्ढा, गइय्या, इनको भी छल गये ठगइय्या'

UP: अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर दागे सवाल (File pic)

UP Assembly Election 2022: उन्होंने सरकार को दंभी बताते हुए कहा कि ये जुमलेबाज सरकार है. यही नहीं, उन्होंने कहा कि नहीं चाहिए ऐसी सरकार जिसका सच है, ठग का साथ, ठग का विकास, ठग का विश्वास, ठग का प्रयास.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में 2022 में चुनाव (Uttar Pradesh Election 2022) होने हैं. ऐसे में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव एक्टिव मोड में नजर आ रहे हैं. इसी कड़ी में सोमवार को एक ट्वीट कर बीजेपी पर कटाक्ष किया है. अखिलेश ने गंगा नदी की सफाई, सड़कों पर गड्ढे और गोवंश को लेकर सीधा हमला बोला है. अखिलेश ने तंज कसते हुए लिखा, “गंगा मइय्या, गड्ढा, गइय्या, इनको भी छल गये ठगइय्या” अखिलेश ने ट्वीट कर पूछा कि यूपी की जनता बीजेपी से पूछ रही है कि हमारी गाढ़ी कमाई से वसूले टैक्स से जो हज़ारों करोड़ गंगा जी के नाम पर खर्च किया वो कहां बह गया है. उन्होंने सरकार पर सवाल दागते हुए पूछा कि गड्ढों का बजट किसके जेब के गड्ढे में गया और गौवंश के पैसे की जुगाली किसने की?

इससे पहले रविवार को योगी सरकार के साढ़े चार साल पूरे होने पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी सरकार पर जबरदस्त हमला किया है. उन्होंने सरकार को दंभी बताते हुए कहा कि ये जुमलेबाज सरकार है. यही नहीं, उन्होंने कहा कि नहीं चाहिए ऐसी सरकार जिसका सच है, ठग का साथ, ठग का विकास, ठग का विश्वास, ठग का प्रयास.

 अखिलेश ने ट्वीट कर बीजेपी पर किया कटाक्ष

अखिलेश ने ट्वीट कर बीजेपी पर किया कटाक्ष

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि, उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सरकार का सफाया हो जाएगा. उन्होंने योगी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि आज मेट्रो के प्रोटोटाइप का उद्घाटन किया गया. सरकार केवल हमारे कामों का ही शिलान्यास और उद्घाटन कर रही है. कानपुर मेट्रो को हमारी सरकार में शिलान्यास हुआ था लेकिन हमें काम नहीं करने दिया गया. लखनऊ मेट्रो को भी आगे नहीं बढ़ाया गया. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे में दरार आ गई, ये एक्सप्रेसवे कभी भाजपा का नहीं था. साढ़े चार साल की सरकार में केवल हमारे काम का फीता काटा है.

UP Lekhpal Recruitment 2021: इन दस्तावेजों के बिना नहीं कर सकेंगें यूपी लेखपाल भर्ती के लिए आवेदन, देखें डिटेल

UP Lekhpal Recruitment 2021: भर्ती के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन जल्द जारी किया जाएगा

UP Lekhpal Recruitment 2021: इस भर्ती के लिए कुछ जरुरी दस्तावेज भी हैं, जिनके बिना उम्मीदवार इसके लिए आवेदन नहीं कर सकेंगें. ऐसे ही जरुरी दस्तावेजों की सूची नीचे दी जा रही है.

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  • LAST UPDATED : September 20, 2021, 14:58 IST
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नई दिल्ली. UP Lekhpal Recruitment 2021: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित UPSSSC PET 2021 संपन्न होने के बाद अब अभ्यर्थियों को लेखपाल भर्ती की तारीखों का इंतजार है. गौरतलब है कि आयोग ने प्रदेश में लेखपाल के 7,882 पदों पर भर्ती कराने की घोषणा की थी. हालांकि UPSSSC ने भर्ती को लेकर कोई आधिकारिक अधिसूचना अभी तक जारी नहीं की है, लेकिन आयोग द्वारा जारी परीक्षा कैलेंडर के अनुसार लेखपाल भर्ती परीक्षा नंवबर माह में आयोजित की जाएगी.

आयोग ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि 24 अगस्त को आयोजित प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (UPSSSC PET 2021) में सफल उम्मीदवार ही लेखपाल भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगें. इस भर्ती के लिए कुछ जरुरी दस्तावेज भी हैं, जिनके बिना उम्मीदवार इसके लिए आवेदन नहीं कर सकेंगें. ऐसे ही जरुरी दस्तावेजों की सूची नीचे दी जा रही है.

UP Lekhpal Recruitment 2021: ये दस्तावेज हैं जरुरी
12वीं पास का सर्टिफिकेट
: लेखपाल भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए 12वीं पास आवश्यक शैक्षिक योग्यता रखी जा सकती है. ऐसे में इसका सर्टिफिकेट भर्ती के लिए जरुरी दस्तावेज हो जाता है.
जाति प्रमाण पत्र: आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार भर्ती की आयु सीमा में नियमनुसार आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को छूट प्रदान की जाएगी. ऐसे में छूट का लाभ उठाने के लिए उम्मीदवारों को इसका प्रमाण पत्र तैयार रखना होगा.
CCC सर्टिफिकेट: ऐसे सम्भावना है कि लेखपाल भर्ती के लिए कोर्स ऑन कंप्यूटर कांसेप्ट यानी CCC सर्टिफिकेट भी अनिवार्य किया जा सकता है. इसलिए उम्मीदवारों को सर्टिफिकेट की तैयारी करके रखनी चाहिए.

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पंजाबः मायावती बोलीं- दलित समुदाय के व्यक्ति को CM बनाना चुनावी हथकंडा

मायावती ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी यहां अकाली दल और बसपा के गठबंधन से बहुत ज्यादा घबरायी हुई है.'

Punjab Congress: मायावती ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी यहां अकाली दल और बसपा के गठबंधन से बहुत ज्यादा घबरायी हुई है. मुझे पूरा भरोसा है कि पंजाब के दलित वर्ग के लोग इनके इस हथकंडे के बहकावे में कतई नहीं आयेंगे.'

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  • LAST UPDATED : September 20, 2021, 14:41 IST
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लखनऊ. पंजाब (Punjab) में दलित समुदाय (Dalit Community) से आने वाले चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) अध्यक्ष मायावती (Mayawati) ने सोमवार को इसे चुनावी हथकंडा बताते हुये कहा कि विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2022) में बसपा और अकाली दल गठबंधन से कांग्रेस बहुत ज्यादा घबरायी हुई है, इसीलिये उसने ऐसा किया है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुये कहा, ‘पंजाब में दलित समुदाय के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाना चुनावी हथकंडा है, इसके सिवाय कुछ नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘मीडिया के जरिये पता चला है कि पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव गैर दलित के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, जिससे यह साफ जाहिर है कि कांग्रेस पार्टी का अभी तक दलितों पर पूरा भरोसा नहीं जमा है. किन्तु इनके इस दोहरे चाल-चरित्र और चेहरे आदि से वहां के दलित वर्ग के लोगों को सावधान रहना है. इससे यह भी स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी यहां अकाली दल और बसपा के गठबंधन से बहुत ज्यादा घबरायी हुई है. मुझे पूरा भरोसा है कि पंजाब के दलित वर्ग के लोग इनके इस हथकंडे के बहकावे में कतई नहीं आयेंगे.’

पंजाब में कांग्रेस विधायक दल के नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने सोमवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. चन्नी पंजाब में मुख्यमंत्री बनने वाले दलित समुदाय के पहले व्यक्ति हैं.

बसपा और शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव के लिये जून माह में गठबंधन किया था.

एक करोड़ छात्रों के बाद यूपी के 2204 माध्यमिक स्कूलों के प्रिंसिपल्स को टैबलेट देगी योगी सरकार, ये होगा फायदा

यूपी के सरकारी स्कूलों को भी टैबलेट देगी योगी सरकार

UP News: हर स्कूल को प्रति टैबलेट 10 हजार रुपये दिए जाएंगे, इसके लिए सरकार दो करोड़ रुपये खर्च करेगी. दरअसल, सरकार का मानना है कि इससे स्कूल प्रिंसिपल को टेक्नोलॉजी फ्रेंडली बनाया जा सकेगा.

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  • LAST UPDATED : September 20, 2021, 13:23 IST
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लखनऊ. ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और डिप्लोमा कोर्स कर रहे एक करोड़ छात्र-छात्राओं को स्मार्ट फोन और टैबलेट बांटने का ऐलान करने के बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी सरकार (Yogi Government) अब प्रदेश के 2204 सरकारी हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों (Government Schools) को भी टैबलेट (Tablet) देने की तैयारी है. यह टैबलेट स्कूल के प्रिंसिपल को दिया जाएगा. हर स्कूल को प्रति टैबलेट 10 हजार रुपये दिए जाएंगे, इसके लिए सरकार दो करोड़ रुपये खर्च करेगी. दरअसल, सरकार का मानना है कि इससे स्कूल प्रिंसिपल को टेक्नोलॉजी फ्रेंडली बनाया जा सकेगा.

जानकारी के मुताबिक सरकार की मंशा है कि इन टैबलेट के माध्यम से स्कूल के प्रिंसिपल्स को टेक्निकल रूप से मजबूत किया जाए. शुरू में टैबलेट के माध्यम लर्निंग आउटकम समेत यूपी बोर्ड के रिजल्ट का विश्लेषण किया जाएगा, प्रदेश के 2204 सरकारी स्कूलों से योजना शुरू की जा रही है. प्रदेश में 2285 सरकारी स्कूल हैं. टैबलेट स्कूल में होने से कई तरह के काम स्कूल स्तर पर ही किए जा सकेंगे. इससे निरीक्षण की रिपोर्ट, अवस्थापना सुविधाएं व अन्य कई तरह की जानकारियों का आदान-प्रदान मिनटों में हो जाएगा.

प्राइमरी स्कूलों में भी टैबलेट देगी सरकार
केवल हाईस्कूल और इंटर के स्कूलों को ही टैबलेट नहीं दिया जाएगा, बल्कि प्राइमरी शिक्षा में भी सभी स्कूलों में टैबलेट देने का फैसला हो चुका है. 1,59,043 सरकारी स्कूलों, 880 खण्ड शिक्षा अधिकारियों और 4400 अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) को ये टैबलेट दिए जाएंगे. इसके मार्फत न सिर्फ स्कूलों की मॉनिटरिंग आसान होगी बल्कि शिक्षकों की हाजिरी भी बायोमीट्रिक तरीके से ली जा सकेगी. इस टैबलेट में जो भी डाटा होगा वह राज्यस्तर पर देखा जा सके, इसके लिए क्लाउड आधारित स्टोरेज होगा. हालांकि दो वर्ष पहले ही योजना को मंजूरी मिली थी लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण टैबलेट खरीद अभी तक नहीं हो पाई है.

जेल में बंद आजम खान, मुख़्तार अंसारी और अतीक अहमद की बढ़ीं मुश्किलें, मनी लॉन्ड्रिंग और उगाही मामले में ED करेगी पूछताछ

आजम खान, मुख़्तार अंसारी और अतीक अहमद से ED करेगी पूछताछ

Lucknow News: कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद ईडी इनसे जल्द ही जेल में पूछताछ करेगी. जानकारी के मुताबिक ईडी की एक टीम सोमवार को सीतापुर जेल में बंद आजम खान से पूछताछ कर सकती है.

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  • LAST UPDATED : September 20, 2021, 12:37 IST
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लखनऊ. अलग-अलग जेलों में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान (Azam Khan), गैंगस्टर से विधायक बने मुख़्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) और माफिया अतीक अहमद (Ateeq Ahmad) की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. अब प्रवर्तन निदेशालय (ED मनी लॉन्ड्रिंग और जबरन उगाही मामले में इन तीनों नेताओं की कुंडली खंगालेगा. कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद ईडी इनसे जल्द ही जेल में पूछताछ करेगी. जानकारी के मुताबिक ईडी की एक टीम सोमवार को सीतापुर जेल में बंद आजम खान से पूछताछ कर सकती है. ईडी चार दिनों तक आजम, मुख़्तार और अतीक से पूछताछ करेगी. बता दें मुख़्तार बांदा जेल तो अतीक अहमद गुजरात के साबरमती जेल में बंद हैं.

प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि इन तीनों नेताओं के खिलाफ पूर्व में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुकदमा दर्ज किया था. अब ईडी को कोर्ट से इन तीनों नेताओं को कस्टडी में लेकर पूछताछ करने की अनुमति मिल गई है. इसके बाद ईडी की टीम जल्द ही तीनों नेताओं से पूछताछ कर सकती है. गौरतलब है कि मुख़्तार अंसारी के खिलाफ इसी साल जुलाई में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था.

आजम पर है किसानों की जमीन हड़पने का आरोप 
बता दें सीतापुर जेल में बंद आजम खान पर किसानों की जमीन हड़पने का आरोप है. आरोप यह कि राम में बनी जौहर यूनिवर्सिटी में अवैध रूप से सरकारी जमीन को भी कब्जाया गया. इसके अलावा यूनिवर्सिटी  सरकारी पैसे का भी इस्तेमाल हुआ. अब ईडी इस मामले में आजम खान से पूछताछ करेगी.

मुख़्तार अंसारी पर ये है आरोप 
बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी पर आरोप है कि उसने एक सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा जमाया और उसे सात साल के लिए 1.7 करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से एक निजी कंपनी को किराए पर दे दिया। ईडी इस रकम और कब्जा जमाने के मामले में अपनी पूछताछ करेगी.

अतीक के पास मिली थी 16 बेनामी कंपनियां 
उधर माफिया अतीक अहमद के खिलाफ भी ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा दर्ज किया था. आरोप है कि  पिछले साल पुलिस ने अतीक की कुल 16 कंपनियां चिह्नित की थीं जिसमें से कई बेनामी थीं. इन कंपनियों में नाम तो किसी और का है लेकिन परोक्ष रूप से इनमें पैसा अतीक का लगा है. इनमें से ज्यादातर कंपनियों का कारोबार रियल इस्टेट से संबंधित है. यह भी जानकारी मिली है कि इन कंपनियों का लेनदेन करोड़ों में है.

UPSSSC PET 2021: अगर परीक्षा में की है ये गलती तो होगा बड़ा नुकसान, देखें पूरी जानकारी

UPSSSC PET Result 2021: 24 अगस्त को राज्य भर में परीक्षा आयोजित की गई थी.

UPSSSC PET 2021: ताजा जानकारी के अनुसार आयोग ने इस परीक्षा का रिजल्ट घोषित करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. ऐसे में इस बात की प्रबल सम्भावना है कि आयोग जल्द ही परिणाम के तारीखों की घोषणा कर देगा.

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  • LAST UPDATED : September 20, 2021, 12:33 IST
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नई दिल्ली. UPSSSC PET Result 2021: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (UPSSSC PET 2021) का रिजल्ट सितम्बर माह के अंत तक जारी किए जाने की उम्मीद है. UPSSSC द्वारा भविष्य में निकाली जाने वाली ग्रुप सी भर्तियों में शामिल होने के लिए इस परीक्षा में पास होना अनिवार्य है. ताजा जानकारी के अनुसार आयोग ने इस परीक्षा का रिजल्ट घोषित करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. ऐसे में इस बात की प्रबल सम्भावना है कि आयोग जल्द ही परिणाम के तारीखों की घोषणा कर देगा.

गौरतलब है कि UPSSSC PET 2021 का आयोजन 24 अगस्त को कराया गया था. परीक्षा से जुड़ी एक अहम जानकारी नीचे साझा की जा रही है.

UPSSSC PET Result 2021: उम्मीदवारों को उठाना पड़ सकता है नुकसान
आयोग द्वारा आयोजित यूपी पीईटी में उम्मीदवारों से 100 प्रश्न पूछे गए थे. दरअसल परीक्षा में कई उम्मीदवारों ने सभी 100 प्रश्नों के उत्तर दिए हैं. जबकि उन्हें सभी प्रश्नों के सही उत्तर नहीं पता थे. ऐसे छात्रों को परिणामों में बड़ा नुकसान हो सकता है. जैसा की आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि परीक्षा में निगेटिव मार्किंग की जाएगी. जिसके तहत प्रति गलत उत्तर पर उम्मीदवारों के एक चौथाई अंक काटे जाएंगे. ऐसे में सभी प्रश्नों के उत्तर देने वाले उम्मीदवारों को इससे बड़ा नुकसान हो सकता है.

इसलिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को ध्यान देना चाहिए कि वे परीक्षाओं में केवल उन्हीं सवालों का जवाब दें, जिसका जवाब उन्हें आता हो और उसे लेकर वे पूरी तरह सुनिश्चित हों.

UP News: पहली बार अल्टीमेट कराटे लीग हुई मुंबई से लखनऊ शिफ्ट, देश-विदेश के खिलाड़ी होंगे शामिल

UP News: पहली बार अल्टीमेट कराटे लीग हुई मुंबई से लखनऊ शिफ्ट

Sports News: विश्व भर में सभी कॉम्बैट स्पोर्ट्स जैसे बॉक्सिंग, कुश्ती जैसे खेलों में सिर्फ व्यक्तिगत मैच ही होते हैं, लेकिन UKL एक अनूठा मैच प्रारूप है जिसने व्यक्तिगत खेल को टीम स्पोर्ट में बदल दिया है.

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लखनऊ. अल्टीमेट कराटे लीग (UKL) जो पहले मुंबई में होने वाली थी, उसे पहली बार यूपी की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में स्थानांतरित कर दिया गया है. यह लीग प्रतियोगिता 3 दिसंबर से 12 दिसंबर तक लखनऊ में बाबू बनारसी दास बैडमिंटन अकादमी में आयोजित की जाएगी. आईपीकेसी के अध्यक्ष सेंसाई राजीव सिन्हा ने कहा कि प्रदेश में हो रहे बदलाव की वजह से ही लीग को मुंबई से लखनऊ स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया. उनमें यूपी रेबल, दिल्ली ब्रेव हाइट्स, मुंबई निंजा, पंजाब फाइटर, बेंगलुरु किंग और पुणे समुराई शामिल है. सभी मैचों का प्रसारण दुनिया भर के कई प्लेटफार्म पर रोजाना 2 घंटे शाम 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि UKL यूकेएल एक अनूठा मैच प्रारूप है जिसने व्यक्तिगत खेल को टीम स्पोर्ट में बदल दिया है जहां एक खिलाड़ी को तीन विरोधियों का एक साथ सामना करना पड़ता है. मैचों के तीन सेट 45 मिनट में पूरे होते हैं, जिसमें स्लो-मोशन और कमर्शियल ब्रेक शामिल हैं. केवल नॉकडाउन तकनीक ही स्कोर दर्ज करता है. प्रत्येक टीम में 5 पुरुष और 1 महिला खिलाड़ी शामिल हैं. ड्रा की स्थिति में महिला व्यक्तिगत मैच अंतिम परिणाम तय करता है. उन्होंने बताया कि यूकेएल में छह (6) फ्रैंचाइज़ आधारित टीमें हैं, जिनमें प्रत्येक टीम में विश्व चैंपियन और यूरोपीय चैंपियन मार्की खिलाड़ी हैं. प्रत्येक टीम में पांच पुरुष और एक महिल खिलाड़ी शामिल हैं.

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विश्व भर में सभी कॉम्बैट स्पोर्ट्स जैसे बॉक्सिंग, कुश्ती जैसे खेलों में सिर्फ व्यक्तिगत मैच ही होते हैं, लेकिन UKL एक अनूठा मैच प्रारूप है जिसने व्यक्तिगत खेल को टीम स्पोर्ट में बदल दिया है. जहां एक खिलाड़ी को तीन विरोधियों का एक साथ सामना करना पड़ता है. मैचों के तीन सेट 45 मिनट में पूरे होते हैं, जिसमें स्लो-मोशन और कमर्शियल ब्रेक शामिल हैं. केवल नॉकडाउन तकनीक ही स्कोर दर्ज़ करता है. इस समय देश में 4 करोड़ से ज़्यादा कराटे अभ्यासी हैं.

यूपी सरकार के साढे चार साल: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा बेमिसाल, विपक्ष ने कहा, झूठ का पुलिंदा.

UP: पहले ट्रांसफर और पोस्टिंग में लगती थी बोली

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि कैसे यूपी की बीजेपी सरकार पहले की सभी सरकारो ने ना सिर्फ बेहतर काम कर रही है बल्कि उनके कार्यकाल मे प्रदेश की पहले वाली छवि पूरी तरह से बदल चुकी है।

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उत्तर प्रदेश सरकार के साढ़े चार साल पूरे होने पर जब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने अपने कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश करना शुरू किया तो उनका मकसद साफ था। सरकार की उपलब्धियों के साथ उनके निशाने पर था विपक्ष. जिसके कार्यकाल से तुलना करके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि कैसे यूपी की बीजेपी सरकार पहले की सभी सरकारो ने ना सिर्फ बेहतर काम कर रही है बल्कि उनके कार्यकाल मे प्रदेश की पहले वाली छवि पूरी तरह से बदल चुकी है।

लखनऊ के लोकभावन (Lokbhawan) में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में योगी ने शुरूआत सरकार और संगठन के नेताओं को धन्यवाद देने  का साथ शुरू की। योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की 24 करोड़ की जनता को भी धन्यवाद दिया और कहा कि जनता की सेवा के लिये ये सरकार लगातार काम कर रही है.

विपक्षियों को बनाया निशाना, दंगे और भृष्टाचार रहा सबसे बडा मुद्दा.

योगी सरकार की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ज्यादातर निशाने पर विपक्षी पार्टी की सरकारों के दौरान की कमियां रही जिसके बारे मे बात करते हुये योगी ने  कहा कि पहले की सरकार में माफिया को सत्ता का संरक्षण मिला हुआ था. साल 2012 से 2017 यानि कि समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की सरकार तक ऐसा माहौल था कि हर रोज एक दंगा होता था, लेकिन हमारी सरकार के साढे चार साल मे एक भी दंगा नही हुआ। माफिया और अपराधियों के खिलाफ सख्ती के साथ कार्यवाई की गयी. करोडों की संपत्ति माफियाओं से ज़ब्त की गयी. योगी आदित्यनाथ ने पहले के मुख्यमंत्रियों पर हमला बोलते हुये कहा कि पहले जो लोग सीएम बनते थे तो अपनी हवेली बनाने के लिए जुट जाते थे, लेकिन हमारी सरकार जनता के लिए समर्पित थी इसलिये 42 लाख से ज़्यादा आवास जनता के लिए बनाये गये।.

पहले उत्तर प्रदेश मे कोई आपदा आती थी तो महीनों लग जाते थे लेकिन मुआवज़ा नही मिलता था. अब पीड़ित परिवारों को 24 घंटे के अंदर राहत का भुगतान मिल जाता है. प्रदेश में साढ़े 4 लाख लोगों को पारदर्शी व्यवस्था के साथ सरकारी नौकरी दी गयी है. किसी का चेहरा देखकर या जाति  पूछकर नौकरी नहीं दी गयी. योगी ने कहा कि हमारी सरकार आने के बाद प्रदेश की इमेज सुधरी है जिसका नतीजा ये है कि प्रदेश मे हजारो करोड़ रूपयों का पूंजी निवेश हुआ है।

अयोध्या में दीपोत्सव और कांवड यात्रा पर विपक्ष की मंशा पर उठाये सवाल
विपक्ष पर निशाना साधते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, कि यूपी ने अपनी सांस्कृतिक पहचान देश और दुनिया के सामने रखी. पहले की सरकारें अयोध्या मे किसी भी तरह के आयोजन से घबराती थी लेकिन इस सरकार ने अयोध्या की धार्मिक गरिमा को बढाने का काम  किया है, अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन, काशी का देव दीपावली का आयोजन हो या फिर मथुरा-बरसाना का रंगोत्सव। विपक्षी कभी ये आयोजन नहीं कर सकते थे, वे हमेशा इस बात के लिए सशंकित रहते थे कि अयोध्या में दीपोत्सव का कार्यक्रम करेंगे तो हम पर सांप्रदायिकता का लेबल लगेगा, लेकिन हमारी सरकार के लिए यह प्रदेश के परसेप्शन को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का बेहतरीन तरीका था। आज प्रदेश सरकार तेजी के साथ इस दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी तरह जब हमारी सरकार आयी तो कांवड यात्रा पर प्रतिबंध था. लेकिन हमने साफ किया कि कांवड यात्रा ना सिर्फ पूरे सम्मान के साथ शुरू की जायेगी बल्कि उनका पूरा ख्याल भी रखा जायेगा। हमने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिये कि कांवडियों को कोई भी समस्या नही होनी चाहिए और उन पर पुष्पवर्षा भी होनी चाहिए. पिछले चार सालों से कांवड यात्रा निकल रही है लेकिन कोई भी विवाद नही हुआ.
अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण शुरू कराया
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हमारी सरकार ने तेजी से राम मंदिर का कार्य शुरू कराया है. पहले लोग हमारी पार्टी के नारे ‘राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ पर मजाकिया लहजे में कहते थे कि ‘पर, तारीख नहीं बताएंगे।’ आज हमने तारीख भी बता दी है और अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण की शुरुआत भी हो चुकी है। बहुत जल्द मंदिर का काम तय समय से भी पहले पूरा होगा.

ट्रांसफर पोस्टिंग मे होता था पैसों का खेल, नौकरियों मे होती थी धांधली

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि प्रदेश मे साल 2017 के पहले ट्रांसफ़र-पोस्टिंग एक व्यवसाय था, बोली लगायी जाती थी, लेकिन पिछले साढ़े 4 साल में कोई ये आरोप नहीं लगा सकता कि पोस्टिंग के लिए किसी से कोई पैसा लिया गया है. अब सभी विभागो में तय नियमों के आधार पर ही अधिकारियों की पोस्टिंग की जाती है और नौकरियों के लिये भी आरक्षण नियमों का पूरी पारदर्शिता के साथ पालन करते हुये लोगो को नौकरियां दी गयी हैं। 

केंद्र सरकार की 44 योजनाओं में उत्तर प्रदेश सबसे आगे

योगी ने प्रधानमंत्री पीएम मोदी की बातों का हवाला देते हुये कहा यूपी पहले देश के विकास के लिए अवरोध के तौर पर जाना जाता था. योजनाओं में यूपी का स्थान 17 वें से 27वें स्थान के बीच था। आज भारत सरकार की 44 योजनाओं में यूपी पहले पायदान पर है। उनकी सरकार आने से पहले प्रदेश में भूख से लोगों की मौतें हो रही थीं। सरकार ने 40 लाख फर्जी राशन कार्ड निरस्त किए। 80 हजार दुकानों को ई-पॉज मशीनों से जोड़ा। कोरोना काल में 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया। आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर सरकार 1200 करोड़ रुपये साल बचा भी रहे हैं। योगी ने कहा कि जब हम जब सरकार में आए तो भुखमरी की हालत थी क्योंकि गरीब लोगों के राशन कार्ड बने नहीं थे और जो बने थे निरस्त हो चुके थे. लेकिन हमने टेक्नोलॉजी का सहारा लिया और सबके राशन कार्ड बनवाए। राशन कोटे को ई-पॉज मशीन से जोड़ा गया. टेक्ननालॉजी का फ़ायदा मिला.यूपी में धान ख़रीद में पिछले साल क़ोरोना काल के बावजूद हमने 66 लाख मेट्री टन धान सीधे किसानों से ख़रीदा गया.
शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों को करेंगे लीड
शिक्षा के क्षेत्र में हम 2022 में अग्रणी राज्यों को लीड करते हुए दिखेंगे। 7 नए विश्वविद्यालय और 50 महाविद्यालय बना रहे हैं। पुलिस फोरेंसिंक इंस्टीट्यूट की स्थापना स्थापना लखनऊ में हो रही है। मंडल स्तर फोरेंसिक लैब और साइबर थाने स्थापित किए जा रहे हैं। 30 हजार महिला आरक्षी भर्ती की गई हैं। 1.26 लाख से अधिक बेसिक शिक्षा में भर्तियां हुई हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों की मदद से एक करोड़ बहनें स्वावलंबी बनी हैं। यह सब संगठन व सरकार के बेहतर समन्वय और केंद्रीय नेतृत्व से मिले सहयोग का नतीजा है। मीडिया ने भी हमारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए सेतु का काम किया है।

सरकार के कार्यकाल को विपक्ष ने कहा झूठ का पुलिंदा

योगी सरकार की उपलब्धियों पर प्रेस कांफ्रेंस के फौरन बाद ही विपक्ष ने अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे सरकार के झूठ का पुलिंदा बताया. अखिलेश ने ये भी कहा कि ये सरकार झूठी, जुमलेबाज, नफरत फैलानेवाली और दंभी है. कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके योगी सरकार पर निशान साधा और कहा कि उत्तर प्रदेश को क्या बनाया भाजपा सरकार ने : कुपोषण में नम्बर-1, महिलाओं के खिलाफ अपराध मे नम्बर-1, अपहरण के मामले में नम्बर-1, दलितों के खिलाफ अपराध के मामले मे नंम्बर-1. सरकार के दावों पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी पलटवार किया. संजय सिंह ने कहा कि असल में योगी सरकार ने प्रदेश का बंटाधार किया है. सरकार के दावों से अलग हकीकत कुछ और ही है. कोरोना काल में ये सच सारी दुनिया ने देखा है. बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी सरकार को आडे हाथो लेते हुये ट्वीट किया. मायावती ने कहा कि योगी सरकार दावे हवा हवाई है व ये जमीनी हकीकत से दूर हैं. प्रदेश मे गरीवों की बढती बदहाली से जनता परेशान है.

बहरहाल विपक्ष के हमलों से बेअसर बीजेपी के नेता लगातार सरकार की सफलता के दावे कर रहे है और मुख्यमंती ने फिर से दोहराया है कि बीजेपी इस बार 350 सीटे जीतकर एक बार फिर से सत्ता मे वापसी करेगी.

...जब आम और इमली बने दूल्हा-दुल्हन, बैलगाड़ी पर निकली धूमधाम से बारात

Sitapur: जब आम और इमली बने दूल्हा-दुल्हन (File photo)

UP News: प्रभारी डीएम और सीडीओ अक्षत वर्मा ने बताया कि कठिना नदी को बचाने के लिए इस अनोखे विवाह की तैयारी काफी दिनों से की जा रही थी. आम और इमली की शादी कराने के लिए मंडप भी लगाया गया.

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सीतापुर. उत्तर प्रदेश के सीतापुर (Sitapur) में अनंत चतुर्दशी के शुभ अवसर पर रविवार को एक अनोखी शादी (Wedding) देखने को मिली है. जहां आम और इमली की शादी का कार्ड छपा कर दोनों का विवाह संपन्न कराया गया. कार्ड पर चिरंजीव रसाल (आम) और आयुष्मति (इमली) का विवाह कराया गया. विवाह के लिए बाकायदा कार्ड भी बांटे गए थे. इस कार्ड में दर्शनाभिलाषी सरकारी विभाग है, और स्वागत के लिए कठिना संरक्षण समिति का नाम छपवाया गया था.

कठिना नदी को बचाने के लिए एक मुहिम के तहत वैदिक रीति रिवाज से होने वाली यह शादी संस्कृति सभ्यता और विज्ञान का अद्भुत संगम साबित होगी. कठिना नदी को पुनर्जीवित करने के मकसद से शुरू हुआ यह अभियान अब अपने पड़ाव पर पहुंच चुका है. बता दें कि सीतापुर के पिसावा इलाके के मुल्लाभीरी बाबा स्मृति वाटिका मुस्तफाबाद में आम और इमली के विवाह संग 51 बाग स्थापित किए गए.

कार्ड छपवाकर धूमधाम से हुआ विवाह

कार्ड छपवाकर धूमधाम से हुआ विवाह

इस बारात में 400 जानती बराती बैल गाड़ियों से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचें. 51 दंपत्ति ने विवाह की रस्में पूरी की. वहीं, मनोरंजन के लिए भी इंतजामात किए गए. अंत में इमली को विदा कर बाग में रोपा गया. उपहार में खुरपा खाद के अलावा स्प्रेयर मशीन दी गयी.

बारातियों को परोसे गए लजीज व्यंजन
प्रभारी डीएम और सीडीओ अक्षत वर्मा ने बताया कि कठिना नदी को बचाने के लिए इस अनोखे विवाह की तैयारी काफी दिनों से की जा रही थी. आम और इमली की शादी कराने के लिए मंडप भी लगाया गया. बारातियों के भोजन की व्यवस्था सुबह से ही शुरू हो गई थी. जिसमें तरह-तरह के व्यंजन बनाए गए जैसे कि दही बड़ा, चावल, उड़द की धुली दाल, पूड़ी बूंदी परोसी गई सहित अन्य व्यंजन भी बारातियों को दिए गए.

बजाए गए पुराने वाद यंत्र
जिला संयोजक लोकभारती कमलेश सिंह ने बताया कि कठिना नदी के किनारे फल पट्टी विकसित होने से कई फायदे होंगे. बाग लगने से पानी का खर्च कम होगा, फलदार पेड़ों से किसान समृद्ध और कठिना नदी पुनर्जीवित हो जाएगी. इस शादी समारोह में पुराने वाद यंत्र भी लोग बजाते हुए दिखाई दिए. इस शादी में 400 लोग गवाह बने.

योगी सरकार ने शारदीय नवरात्रि, विजयादशमी और चेहल्लुम को लेकर जारी की गाइडलाइंस, दिए ये निर्देश

UP: विजयादशमी और चेहल्लुम को लेकर जारी हुई गाइडलाइंस (File Photo)

UP Police: मूर्ति विसर्जन आदि के समय निर्धारित सीमा से अधिक लोग न हो तथा शारीरिक दूरी व मास्क पहनने के नियमों का पालन अवश्य किया जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी धार्मिक स्थल पर क्षमता से अधिक लोगों की भीड़ एकत्र न होने पाए.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने कोविड-19 की समीक्षा बैठक के दौरान इस वर्ष शारदीय नवरात्रि विजयादशमी, दशहरा तथा चेहल्लुम के दृष्टिगत कानून व्यवस्था एवं सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने हेतु गाइडलाइंस जारी की गई हैं. नवरात्रि दुर्गा पूजा एवं विजयदशमी, दशहरा पर्व एवं रामलीला मंचन तथा चेहल्लुम के अवसर पर उत्तर प्रदेश शासन द्वारा कोविड-19 महामारी की रोकथाम हेतु दिए गए निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं.

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि दुर्गा पूजा पंडाल व रामलीला मंच के स्थापना की अनुमति प्रदान करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि सार्वजनिक आवागमन प्रभावित न हो. मूर्तियों की स्थापना पारंपरिक परंतु खाली स्थान पर की जाए, उनका आकार यथासंभव छोटा रखा जाए. मैदान की क्षमता से अधिक लोग न रहे. मूर्तियों के विसर्जन में यथासंभव छोटे वाहनों का प्रयोग किया जाए तथा मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम में न्यूनतम व्यक्ति ही शामिल हो.

संदिग्ध वाहनों की चेकिंग
मूर्ति विसर्जन आदि के समय निर्धारित सीमा से अधिक लोग न हो तथा शारीरिक दूरी व मास्क पहनने के नियमों का पालन अवश्य किया जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी धार्मिक स्थल पर क्षमता से अधिक लोगों की भीड़ एकत्र न होने पाए. निर्देशों में कहा गया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि यातायात कदापि बाधित न हो एवं बैरियर व पुलिस चेक पोस्ट लगाकर संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कराई जाए तथा मोटर वाहन अधिनियम के नियमों का सख्ती से पालन किया जाए. साथ ही जन सुविधाएं यथा बिजली पेयजल एवं साफ सफाई पर भी विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है.

सांप्रदायिक सौहार्द बनाने के आदेश
जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि इस अवसर पर सामाजिक एवं सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे तथा सुरक्षा व्यवस्था इस प्रकार सुनिश्चित की जाए कि किसी भी तरह की कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न होने पाए. संवेदनशील क्षेत्रों व अन्य स्थानों पर भी मोबाइल पेट्रोलिंग कराई जाए. शासन द्वारा चेहल्लुम के अवसर पर भी कानून व्यवस्था एवं सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने हेतु तथा कोविड-19 महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं. जिला प्रशासन से यह भी अपेक्षा की गई है कि अनुमति इस शर्त के साथ दी जाए कि कोविड-19 प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाए.

NEET 2021: पटना से लेकर छपरा तक यूपी-बिहार पुलिस की छापेमारी, फरार हुआ सॉल्वर गैंग का सरगना PK

NEET सॉल्वर गैंग का सरगना पीके उर्फ नीलेश

NEET Solver Gang: नीट सॉल्वर गैंग के सरगना पीके (PK) की तलाश में पहुंची पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं. पीके उर्फ नीलेश अपनी पहचान लोगों के बीच बतौर डॉक्टर देता था और रईस की जिंदगी जीता था.

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पटना. यूपी में नीट परीक्षा (NEET 2021) के दौरान सॉल्वर गैंग का मामला सामने आने के बाद उसके सरगना की तलाश के लिए यूपी पुलिस (UP Police) ने बिहार पुलिस के साथ रविवार को पटना से लेकर छपरा तक एक साथ छापेमारी की. हालांकि इस दौरान सॉल्वर गैंग (NEET Solver Gang) का सरगना पीके उर्फ नीलेश सिंह पुलिस के गिरफ्त में नहीं आ सका. छापेमारी के पहले ही पीके पटना और छपरा दोनों जगह से फरार हो गया. दबिश के दौरान पीके की तस्वीर पुलिस को जरूर हाथ लगी है.

नीट परीक्षा में धांधली के दौरान उजागर हुई सॉल्वर गैंग के मास्टर माइंड पीके उर्फ नीलेश सिंह पटना के पाटलिपुत्र में रहता है. महंगी गाड़ियों और रहन-सहन में विलासिता की जिंदगी जीने वाला पीके अपनी कॉलोनी के लोगों को अपना परिचय डॉक्टर के रूप में देता था. उसने यहां चार मंजिला आलीशान मकान बनवाया है. वह महंगी गाड़ियों का भी शौकीन रहा है. पुलिस की छापेमारी के बाद पीके की असलियत उजागर होने से आसपास के लोग काफी हैरान हैं. बिहार के छपरा जिले के सेंधवा गांव में पीके के पैतृक आवास पर जब पुलिस गई तब उसे यह जानकारी मिली कि स्थानीय लोग उसे एक बिजनेसमैन के रूप में जानते हैं.

सॉल्वर गैंग के सदस्य एक सिम का उपयोग सप्ताह भर से ज्यादा नहीं किया करते थे. इस बात की जानकारी वाराणसी पुलिस द्वारा गिरफ्तार के किए गए गैंग के सदस्य विकास कुमार महतो और राजू कुमार ने पुलिस को दी है. सॉल्वर गैंग के इन दोनों महत्वपूर्ण सदस्यों ने पुलिस को बताया कि सभी सदस्य फर्जी आईडी पर लिए गए सिम कार्ड का उपयोग करते थे और बातचीत के लिए मुख्य तौर पर व्हाट्सएप मैसेज और कॉल का ही सहारा लिया जाता था.

पुलिस को इन दोनों ने बताया कि गिरोह के अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, एडमिट कार्ड मंगवाने के लिए हमेशा एयर कुरियर सर्विस का इस्तेमाल किया जाता था. इसका मुख्य मकसद  था कि कुरियर कंपनी का डिलीवरी बॉय कभी उनके ठिकाने तक नहीं आ पाता था. कुरियर सॉल्वर गैंग के सदस्य कुरियर कंपनी जाकर ही ले लेते थे.

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