UP: 90 के दशक में डॉन था श्रीप्रकाश शुक्ला, अब यूपी पुलिस की लिस्ट में मोस्ट वांटेड बना विकास दुबे
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UP: 90 के दशक में डॉन था श्रीप्रकाश शुक्ला, अब यूपी पुलिस की लिस्ट में मोस्ट वांटेड बना विकास दुबे
90 के दशक में था डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला (फाइल फोटो)

पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर के 25-26 साल का शार्प-शूटर और ‘सुपारी किलर’ श्रीप्रकाश शुक्ला (Shri Prakash Shukla) से पुलिस के साथ अपराधी भी खौफ खाते थे. श्रीप्रकाश और उसके पास मौजूद एके-47 दहशत का दूसरा नाम था.

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लखनऊ. कानपुर (Kanpur) के विकरू गांव में एक सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार चल रहे मुख्य आरोपी विकास दुबे (Vikas Dubey) को पकड़ने की कोशिश जारी है. इस बीच उत्तर प्रदेश पुलिस ने विकास दुबे के बारे में खबर देने वाले को ढाई लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा. जहां 90 के दशक में बड़े डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला (Shri Prakash Shukla) को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए एसटीएफ का गठन किया गया था. वहीं, यूपी पुलिस विकास दुबे को पकड़ने के लिए रात दिन कड़ी मेहनत कर रही है, क्योंंकि विकास दुबे पर पुलिस रिकॉर्ड में 70 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं. विकास की तलाश के लिए पुलिस ने 40 टीमें गठित की है, जो आस-पास के जिलों के अलावा सर्विलांस टीम से मिल रही जानकारी के आधार पर छापेमारी कर रही हैं.



सवाल ये है कि क्या श्रीप्रकाश शुक्ला के नक्शे कदम पर चलकर विकास दुबे यूपी का सबसे बड़ा गैंगस्टर बनना चाहता था. जैसे विकास दुबे पर एक थाने में दर्जा प्राप्त मंत्री की सरेआम हत्या करने का इल्जाम था, वैसे ही श्रीप्रकाश शुक्ला ने बिहार सरकार के एक मंत्री को पटना जाकर दिनदहाड़े गोलियों से भून डाला था. दरअसल 90 के दशक में श्रीप्रकाश शुक्ला ने यूपी सरकार को हिलाकर रख दिया था, जैसे आज विकास दुबे की तलाश में पुलिस अलग-अलग राज्यों में उसे पकड़ने के लिए खाक छान रही है. 1998 में एसटीएफ ने श्रीप्रकाश शुक्ला को गाज़ियाबाद में मार गिराया था. श्रीप्रकाश शुक्ला की मौत के बाद उसका खौफ भले खत्म हो गया था लेकिन जयराम की दुनिया में उसके आज भी चर्चे होते हैं.



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बता दें कि पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर का 25-26 साल का शार्प-शूटर और ‘सुपारी किलर’ श्रीप्रकाश शुक्ला से पुलिस के साथ अपराधी भी खौफ खाते थे. श्रीप्रकाश और उसके पास मौजूद एके-47 दहशत का दूसरा नाम था. इस माफिया को पकड़ने के लिए ही यूपी में एसटीएफ का गठन हुआ था. एसटीएफ को भी माफिया को अंजाम तक पहुंचाने के लिए नाको चने चबाने पड़े थे. उधर, जुर्म की दुनिया में विकास दुबे का इतिहास करीब 20 साल पुराना है, जिसे जानकर ऐसा लगता है कि विकास दुबे यूपी के सबसे बड़े डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला की मौत के बाद उसके नक्शे कदम पर चल रहा था.
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