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हार के बाद पिक्चर से गायब हैं अखिलेश तो प्रियंका गांधी मिशन यूपी पर

कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंका गांधी

कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंका गांधी

जहां एक ओर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद अभी तक हार की समीक्षा भी नहीं कर पाएं हैं, वहीं प्रियंका गांधी कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए एक के बाद एक कदम उठा रही हैं.

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लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में हार के बाद जहां कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) अपने इस्तीफे को लेकर अड़े हुए हैं और अन्य विपक्षी दलों के प्रमुख नेता मसलन सपा के अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) व बिहार आरजेडी के तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) खामोश हैं, इसके उलट प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Vadra) पहले से ज्यादा जोश के साथ मिशन यूपी पर फोकस कर रही हैं. प्रियंका गांधी की पूरी कोशिश यूपी में पार्टी संगठन को 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले नए सिरे से खड़ा करने की है. इसके लिए वे एक के बाद एक कदम उठा रही हैं.

हार से तनिक भी विचलित न होते हुए प्रियंका गांधी संगठन को प्रभावशाली दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की छत्रछाया से उबारकर अपने पैरों पर खड़ा करना चाहती हैं. कोशिश यही है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी चुनाव लड़ती हुई दिख सके. दरअसल, पिछले दिनों रायबरेली में हार की समीक्षा के बाद ही उनके तेवर साफ़ थे कि वे संगठन को मजबूत करेंगी. इसके बाद दिल्ली में भी उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात की. इस दौरान पता चला कि कई जिलों के जिलाध्यक्ष रसूख वाले नेताओं के ड्राइवर और शिक्षक हैं. इससे नाराज प्रियंका ने यूपी की सभी जिला और शहर कमेटियों को भंग कर दिया.

पिछले एक महीने में 960 लोगों से वन-टू-वन मुलाकात

जहां एक ओर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद अभी तक हार की समीक्षा भी नहीं कर पाएं हैं, वहीं प्रियंका गांधी कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए एक के बाद एक कदम उठा रही हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी पिछले एक महीने से लगातार बैठक कर रही हैं, प्रियंका गांधी के निर्देश में पिछले एक महीने से चार विशेष टीमें हर जिले का दौरा कर रही हैं. इनमें AICC सचिव व कुछ चुने हुए नेता शामिल हैं. प्रियंका गांधी की पिछले एक महीने में लगभग 960 लोगों से वन टू वन मुलाक़ात की है. इसमें नेता, कार्यकर्ता, किसान, व्यापारी, महिला, छात्र, प्रोफ़ेसर और डॉक्टर शामिल हैं. पूर्वी यूपी के हर एक ज़िला अध्यक्ष, हर एक शहर अध्यक्ष, एक-एक प्रत्याशी, एक एक प्रभारी से मिली हैं और उनकी बातों को ध्यान से सुना है. साप्ताहिक मीटिंगों में पूर्वी उत्तर प्रदेश की आम जनता भी पहुंची और अपनी बात उन तक पहुंचाई.

टीम को दिया जिला में संगठन खड़ा करने का निर्देश

प्रियंका गांधी ने अपने AICC सचिवों और चुनिंदा नेताओं की टीमें हर जिले में भेजकर हार की वजहों को तलाशना भी शुरू कर दिया है. हर टीम को एक जिले में न्यूनतम दो दिन रहकर संगठनिक समीक्षा करनी है. टीम को जिले के पुराने और नए कांग्रेसियों से मिलना है और कार्यकर्ता से बातचीत करनी है. बड़े नेताओं की गिरफ़्त में फंसी ज़िला कमेटियों को मुक्त कराना उनकी जिम्मेदारी होगी. ज़िला कमेटियों को नया करना, उनमें 50% से ज़्यादा 40 वर्ष से कम लोगों को लाना शामिल है. साथ ही अधिक से अधिक महिलाओं को जिला कमेटी का हिस्सा बनाना सुनिश्चित करना है. टीम की जिम्मेदारी यह भी है कि वह जिला के पदाधिकारी का चयन करें, जिसमें दलित और पिछड़े वर्ग के युवा कार्यकर्ताओं और नेताओं को जिला नेतृत्व में स्थान सुनिश्चित हो. नयी सामाजिक शक्तियों, समाज के नेताओं, किसान नेताओं, युवा आंदोलनकर्मियों को संगठन के नेतृत्व में लाना है. कांग्रेस की फ्रंटल संस्थाओं को को जन सरोकार से जुड़े आंदोलन में लगाना है और उनका सांगठनिक नव निर्माण करना है.

जुलाई में प्रियंका का पूर्वी यूपी में ताबड़तोड़ दौरा

अभी इन चार फैसले इस प्रक्रिया के पहले चरण में हैं. जुलाई में प्रियंका गांधी खुद पूर्वी यूपी का सघन दौरा करेंगी. हर जिले में वे बैठक करेंगी और सांगठनिक समीक्षा के बाद हर जिले में ओपन हाउस मीटिंग होगी जिसमे कोई भी आ सकता है.

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