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लालू के महागठबंधन में नीतीश की जगह अखिलेश को फिट करने की तैयारी!

लालू के महागठबंधन में नीतीश की जगह अखिलेश को फिट करने की तैयारी!

अखिलेश यादव ( फाइल फोटो-
 पीटीआई)

अखिलेश यादव ( फाइल फोटो- पीटीआई)

बिहार में महागठबंधन टूटने का असर यूपी की राजनीति पर भी दिखाई देने लगा है.

    बिहार में महागठबंधन टूटने का असर यूपी की राजनीति पर भी दिखाई देने लगा है. यूपी विधानसभा में सपा, कांग्रेस और बसपा पहली बार एकजुट होकर योगी सरकार के सामने मजबूत विपक्ष पेश करने की कोशिश कर रही थीं. उनकी इस कवायद को भविष्य के महागठबंधन के तौर पर देखा जाने लगा था.

    लेकिन बिहार एपिसोड के बाद परिस्थितियां तेजी से बदलती दिख रही हैं. नीतीश कुमार के जाने के बाद अब उनकी जगह अखिलेश यादव की दावेदारी को मजबूत करने की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं.

    इस बात के संकेत खुद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने गुरुवार को दिया. रांची में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान लालू ने कहा कि वह बसपा और सपा को एक मंच पर लेकर आएंगे. मायावती को बिहार से राज्यसभा भेजेंगे.

    इधर यूपी में पार्टियां क्या सोच रही हैं, इसका अंदाजा समाजवादी पार्टी के एमएलसी राजपाल कश्यप के बयान से लगाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने धोखा देना अंग्रेजों से सीखा है. अब जनता बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन बना रही है.

    2019 में अखिलेश की अगुवाई में बीजेपी साफ हो जाएगी. जाहिर है राजपाल कश्यप का बयान महागठबंधन के भविष्य की ओर इशारा कर रहा है. जिसमें वह अखिलेश को प्रमुख नेता के तौर देख रहे हैं.

    समाजवादी पार्टी के एमएलसी सुनील सिंह साजन भी महागठबंधन की बात पर कुछ ऐसा ही कहते हैं. सुनील सिंह के अनुसार नीतीश कुमार भले ही बीजेपी के खिलाफ लड़ाई छोड़कर चले गए हों लेकिन अखिलेश यादव पीछे हटने वाले नेताओं में नहीं हैं. हम समाजवादी हैं और साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी. पटना में लालू की महारैली में जाने की बात पर सुनील सिंह ने कहा कि अगर रैली होती है तो जरूर जाएंगे.

    वैसे ऐसा नहीं है कि यूपी में बदलती राजनीतिक परिस्थतियों से योगी सरकार अनभिज्ञ है. प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह कहते हैं कि सुना है यूपी में भी गठबंधन होने वाला है. यूपी में गठबंधन हुआ तो धोखा होगा. गठबंधन पर बात करने वाले एक साथ नहीं रह सकते. यूपी में गठबंधन हुआ तो बिहार जैसा ही हाल होगा.

    एक दिन ​पहले विधान परिषद में अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा ​था कि सोचिए अगर यूपी में सपा, कांग्रेस और बसपा एक साथ आ जाती है तो बीजेपी का क्या होगा. लेकिन चौबीस घंटे बाद ही अखिलेश यादव बिहार की राजनीति पर गीत के साथ तंज कसते नजर आ रहे हैं. उन्होंने लिखा कि ना ना करते, प्यार तुम्हीं से कर बैठे, करना था इंकार मगर इकरार तुम्हीं से कर बैठे.

    अखिलेश के इस बयान से पहले चाहे वह कानून व्यवस्था का मुद्दा हो, बजट का विरोध हो या किसानों की कर्ज माफी तीनों ही पार्टियों के नेता विधानसभा में एक साथ सुर में सुर मिलाते नजर आ रहे थे. यही नहीं बीजेपी विधायक की मृत्यु की शोक संवेदना व्यक्त करने में विपक्ष ने जिस तरह समानांतर सदन चलाने की कवायद की, उसमें भी बसपा, सपा और कांग्रेस के नेताओं में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया.

    अब बिहार में महागठबंधन की टूट का असर यूपी की सियासत में भी नजर आने लगा है. सूत्रों के अनुसार तमाम यूपी में विपक्षी पार्टियों के थिंकटैंक नई रणनीति बनाने में जुटे हैं. दरअसल इस रणनीति के केंद्र में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव द्वारा 27 अगस्त को पटना में बुलाई गई महारैली है. इस महारैली के लिए अखिलेश यादव के साथ ही मायावती को भी न्यौता दिया गया है. वहीं सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, शरद पवार और स्टालिन भी आमंत्रित हैं.

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    Tags: Akhilesh yadav, Lalu Prasad Yadav, Samajwadi party, लखनऊ

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