यूपी में खराब प्रदर्शन के बाद अब मुलायम की राह पर अखिलेश यादव, संगठन में होगा ये बड़ा बदलाव

अखिलेश यादव अब पिता मुलायम सिंह यादव की तर्ज पर जमीन से जुड़े नेताओं को संगठन में तरजीह देने की कवायद शुरू करने वाले हैं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: May 27, 2019, 1:21 PM IST
यूपी में खराब प्रदर्शन के बाद अब मुलायम की राह पर अखिलेश यादव, संगठन में होगा ये बड़ा बदलाव
अखिलेश यादव की फाइल फोटो
News18 Uttar Pradesh
Updated: May 27, 2019, 1:21 PM IST
गठबंधन के बावजूद उत्तर प्रदेश में मिली करारी शिकस्त के बाद समाजवादी पार्टी में मंथन का दौर शुरू हो गया है. कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं. अखिलेश भी अब पिता मुलायम सिंह यादव के क़दमों पर चलेंगे और संगठन में जमीन से जुड़े नेताओं को तरजीह दी जाएगी.

अखिलेश यादव साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठन में जमीन से जुड़े नेताओं को तवज्जो देंगे. इसको लेकर जल्द ही अखिलेश यादव पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक करेंगे.



होने वाला है बड़ा बदलाव
कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव पार्टी की करारी हार के बाद संगठन में कई बदलाव कर सकते हैं, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष को भी बदला जा सकता है. संगठन में होने वाले बदलाव में गैर-यादव पिछड़ी जातियों को तरजीह दी जाएगी. दरअसल, बसपा से गठबंधन के बाद अखिलेश यादव गैर-यादव पिछड़ी जातियों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहे थे, जो पूरी तरह से नाकाम रहा. अब पिछड़ी जातियों के प्रमुख नेताओं को पार्टी से जोड़ने की कोशिश की जाएगी.

 

मुलायम ने जातिगत समीकरण का रखा था ध्‍यान

संगठन का ढांचा ठीक उसी तरह होगा जैसा कभी मुलायम सिंह के समय में हुआ करता था, जिसमें कुर्मी के बड़े नेता के रूप में बेनी प्रसाद वर्मा थे. मुस्लिम नेता के तौर पर आजम खान, ब्राह्मण चेहरे के रूप में जनेश्वर मिश्र और राजपूत नेता के तौर पर मोहन सिंह हुआ करते थे. मौजूदा समय में पार्टी के पास ऐसे नेता नहीं हैं, जो हैं भी उन्हें पार्टी में आगे नहीं बढ़ाया गया. यही वजह है कि अखिलेश यादव का पूरा फोकस सगठन में आमूलचूल परिवर्तन करने का है.
Loading...

...पार्टी को उठाना पड़ा खामियाजा

दरअसल, हार के बाद पार्टी के भीतर यह आवाज उठने लगी है कि पार्टी में महत्वपूर्ण पद पर वे बैठे हैं, जिनका जमीनी आधार नहीं है. जिसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ा. कहा जा रहा है कि अखिलेश के कई करीबियों पर भी गाज गिर सकती है और उन नेताओं को तरजीह दी जाएगी जिनकी जमीनी नेता के रूप में पहचान है.

ये भी पढ़ें:

अपनी हार पर बोले दिग्विजय सिंह- गांधी के हत्यारे वाली विचारधारा जीत गई

लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में मोदी की आंधी में 203 प्रत्याशियों की जमानत जब्त

मोदी लहर नहीं, इस शख्स की वजह से सपा के 'गढ़' में हार गए अक्षय यादव
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...