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गठबंधन के बाद वोटों की सेंधमारी में जुटीं मायावती, चुनावों में मुस्लिमों को देंगी तवज्जो!

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: June 25, 2019, 11:59 AM IST
गठबंधन के बाद वोटों की सेंधमारी में जुटीं मायावती, चुनावों में मुस्लिमों को देंगी तवज्जो!
बसपा सुप्रीमो मायावती की फाइल फोटो

मायावती सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को कठघरे में खड़ा करते हुए यह साबित करने में लगी हुई हैं कि बसपा ही मुस्लिमों की असल हितैषी व शुभचिंतक है.

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समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़ने के बाद बसपा (BSP) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) बड़ी तेजी से समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के परम्परागत मुस्लिम वोट बैंक की सेंधमारी में जुटी हुई हैं. साढ़े पांच माह पुराने गठबंधन को तोड़ना और लोकसभा चुनाव में हार का ठीकरा अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के सिर फोड़ने की कवायद को उनकी एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा कहा जा रहा है. वे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को घेरते हुए यह साबित करने में लगी हुई हैं कि बसपा ही मुस्लिमों की असल हितैषी व शुभचिंतक है.

मिशन-2022 के लिए जमीन कर रही तैयार

रविवार को लखनऊ में बसपा की आल इंडिया बैठक में मायावती ने अखिलेश पर मुस्लिमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा ने ज्यादा मुस्लिम प्रत्याशी उतारने से मना किया था. साथ ही यह भी जाता दिया कि अखिलेश के विरोध के बावजूद उन्होंने 6 मुस्लिमों को टिकट दिया, जबकि सपा ने सिर्फ चार. हालांकि दोनों ही पार्टियों के 3-3 मुस्लिम उम्मीदवार विजयी रहे.

सूत्रों की मानें तो मायावती अब 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई हैं. वे दलित-मुस्लिम सोशल इंजीनियरिंग के फ़ॉर्मूले पर आगे बढ़ रही हैं. यही वजह है कि आगामी चुनावों में वे दलितों के साथ ही मुस्लिमों की भागीदारी भी बढ़ाएंगी. उनकी रणनीति दलित-मुस्लिम ताकत को धार देने की है. यही वजह है कि उन्होंने मुस्लिमों को कम टिकट देने का आरोप अखिलेश पर लगाया तो वहीं गठबंधन को मिली हार के लिए अखिलेश सरकार में हुए दलित विरोधी कार्य व प्रमोशन में आरक्षण के विरोध को जिम्मेदार ठहरा दिया. उनकी रणनीति स्पष्ट है कि वे अखिलेश को मुस्लिम और दलित विरोधी बताकर खुद को उनका शुभचिन्तक साबित करने में लगी हैं.

अखिलेश यादव की चुप्पी उठा रही सवाल

वरिष्ठ पत्रकार और सपा-बसपा की राजनीति को करीब से जानने वाले परवेज अहमद कहते हैं मायावती की सभी कवायद खुद को और परिवार को बचाने की है. 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के बाद सभी पार्टियां विधानसभा चुनाव में जुट जाएंगी. बीजेपी ने तो इसकी शुरुआत भी कर दी है. यह बात सही है कि अखिलेश ने 2012 से लेकर अब तक सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति की है. मायावती के आरोप लगाने के 48 घंटे बाद भी अखिलेश यादव की चुप्पी सवाल उठाती है. इस चुप्पी से कहीं न कहीं मायावती के आरोपों को बल मिल रहा है.  यह बात भी सही है कि बसपा आने वाले चुनावों में टिकट बंटवारे में मुस्लिमों की भागीदारी बढ़ाएगी.

संगठन में बदलाव भी दलित मुस्लिम समीकरण को ध्यान में रखकरमायावती ने संगठन में जो बदलाव किए हैं उससे भी उनकी रणनीति का संकेत मिल रहा है. उन्होंने अमरोहा से जीते दानिश अली को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाया है. साथ ही उन्हें दलित-मुस्लिम भाईचारा कमेटी को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है. दानिश अली की जिम्मेदारी नसीमुद्दीन सिद्दीकी वाली ही होगी.

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First published: June 25, 2019, 11:58 AM IST
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