तीन तलाक पर लाया गया अध्यादेश लोकतंत्र के खिलाफ : मौलाना खालिद रशीद

AIMPLB के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि सभी जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध करार दे दिया था लेकिन कोर्ट ने कहीं भी ये नहीं कहा था कि इसे आप दंडनीय अपराध बना दें. इसके बाद भी सरकार ने इसे दंडनीय अपराध बनाने की कोशिश की.

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 19, 2018, 4:21 PM IST
तीन तलाक पर लाया गया अध्यादेश लोकतंत्र के खिलाफ : मौलाना खालिद रशीद
माैलाना खालिद रशीद फरंगी महली. Photo: News 18
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Updated: September 19, 2018, 4:21 PM IST
मोदी कैबिनेट द्वारा तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने वाले अध्यादेश को लेकर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं. दरअसल तीन तलाक बिल को संसद के दोनों सदनों में पास कराने में असफल रहने के बाद केंद्र सरकार ने अध्यादेश का रास्ता चुना है. उधर इस अध्यादेश को आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य और मुस्लिम धर्मगुरू मौलाना खालिद फरंगी महली ने लोकतंत्र के खिलाफ करार दिया है.

फरंगी महली ने कहा कि उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध करार दे दिया था लेकिन कोर्ट ने कहीं भी ये नहीं कहा था कि इसे आप दंडनीय अपराध बना दें. इसके बाद भी सरकार ने इसे दंडनीय अपराध बनाने की कोशिश की. किसी भी लोकतंत्र में कानून बनाने का हक संसद को होता है. अभी ये बिल राज्यसभा में पास नहीं हुआ, उसके बावजूद आॅर्डिनेंस बनाना हम लोकतंत्र के उसूलों के खिलाफ समझते हैं. सभी दलों ने और मुस्लिम समुदाय ने इस बिल को सेलेक्ट कमेटी को देने की मांग की थी. यही नहीं मुस्लिम महिलाओं ने भी सड़कों पर विरोध किया था. अब सरकार ने अध्यादेश लाया है. ये लोकतंत्र के खिलाफ है.

इससे पहले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अध्यादेश के संबंध में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस अध्यादेश में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक की तरह ही प्रावधान होंगे. इस बिल को पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में पारित कर दिया गया था. हालांकि राज्यसभा में जहां सरकार के पास संख्याबल कम है वहां हंगामे के चलते इस बिल पर बहस भी नहीं हो पाई थी.

वैसे मोदी कैबिनेट ने भले ही अध्यादेश पास कर दिया है लेकिन इसे संसद में पास कराना सरकार के लिए अनिवार्य होगा. सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2017 में फैसला दिया था कि अध्यादेश लाने की शक्ति कानून बनाने के लिए समांतर ताकत नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि किसी बिल के पास नहीं होने पर उसके लिए अध्यादेश लाना संविधान के साथ धोखाधड़ी है और इसलिए इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है.

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First published: September 19, 2018, 4:21 PM IST
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