वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामले में कोर्ट के आदेश से निराश न हों मुसलमान- AIMPLB

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर कोर्ट ने अहम आदेश दिया है.

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर कोर्ट ने अहम आदेश दिया है.

Lucknow News: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के कार्यवाहक महासचिव हज़रत मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी ने कहा कि वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामले में मस्जिद समिति और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड सम्पूर्ण शक्ति के साथ इस मामले की पैरवी कर रहा है.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) और ज्ञानव्यापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) के मामले में मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने भी तेजी से आगे आकर अपना रुख स्पष्ट किया है. ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यवाहक महासचिव हज़रत मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी ने कहा कि मुसलमानों से अनुरोध है कि वे इस मामले में निराश न हों. साम्प्रदायिक शक्तियां विफल होंगी.

ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यवाहक महासचिव हज़रत मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी ने कहा कि 1991 में "उपासना स्थल (विशेष उपबन्ध) संरक्षण अधिनियम" के अन्तर्गत 15 अगस्त 1947 को जहां जो उपासना स्थल (धार्मिक स्थान) था, उसकी स्थिति वही मानी जायेगी, उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता. इस कानून के पारित होने के बाद साम्प्रदायिक शक्तियों को ओर से ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में न्यायालय में एक याचिका दायर की गई कि इस स्थान पर पहले एक मन्दिर था, उसका सर्वेक्षण किया जाए. स्पष्ट है कि इस कानून के आने के बाद अब इसकी गुंजाइश शेष नहीं रही इसलिए मस्जिद समिति और उत्तर प्रदेश सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने याचिका का विरोध किया और एक स्तर पर याचिका रदद् कर दी गयी.

लेकिन पुनः यह मामला सिविल कोर्ट में पहुंच गया और मस्जिद कमेटी के पैरवी के आधार पर हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी. हालांकि यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि इसके बावजूद सिविल कोर्ट के एक न्यायाधीश ने मस्जिद की भूमि का सर्वेक्षण करने के लिए एक आदेश जारी कर दिया है, यह क़ानून से एक प्रकार का खिलवाड़ है और पूरी तरह से अस्वीकार्य है. मस्जिद समिति और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड इस मामले को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय जा रहा है.

सैफ़ुल्लाह रहमानी ने कहा कि मुसलमानों से अनुरोध है कि वे इस मामले में निराश न हों, मस्जिद समिति और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड सम्पूर्ण शक्ति के साथ इस मामले की पैरवी कर रहा है और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और उसकी क़ानूनी समिति इस पर नज़र रख रही है और सहयोग भी कर रही है. इंशाअल्लाह साम्प्रदायिक शक्तियां विफल होंगी.
ये है पूरा मामला

वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर बनाम ज्ञानवापी मस्जिद केस में गुरुवार का दिन काफी अहम रहा. मंदिर के पक्ष में कोर्ट ने फैसला देते हुए पुरातात्विक सर्वेक्षण की राह साफ कर दी है. पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी मिलने के बाद अब 5 सदस्यीय पुरातत्व टीम का चयन होगा. बता दें कि साल 1991 से वाराणसी की अदालत में यह केस लंबित था. इस पुराने मुकदमे में वाद मित्र और अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने आवेदन किया था. आवेदन के जरिए विजय शंकर रस्तोगी ने पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग की थी.

आवेदन में विजय शंकर रस्तोगी ने बताया था कि ज्ञानवापी परिसर के आराजी नंबर 9130, 9131 और 9132 रकबा का सर्वेक्षण कराया जाए. एक बीघे 9 बिस्वा जमीन का पुरातात्विक सर्वेक्षण रडार तकनीक से करके यह पता लगाने की कोशिश की जाए, जो जमीन है वह मंदिर का अवशेष है या नहीं? इसके अलावा विवादित ढांचे का फ़र्श तोड़कर देखा जाए कि उसके अंदर क्या 100 फीट ऊंचा ज्योतिर्लिंग स्वयंभू विश्वनाथ मौजूद हैं या नहीं? मस्जिद की दीवारें प्राचीन मंदिर की हैं या नहीं?



'रडार तकनीक से हो सर्वेक्षण'

विजय शंकर रस्तोगी का तर्क था कि रडार तकनीक से पुरातात्विक सर्वेक्षण में एक बीघा 9 बिस्वा जमीन के धार्मिक स्वरूप का पता चल जाएगा. उनकी दलील थी कि चौथी शताब्दी के मंदिर में प्रथम तल में ढांचा और भूतल में तहखाना था, जिसमें 100 फीट ऊंचा शिवलिंग है. पुरातात्विक खुदाई से ये बात साफ हो जाएगी. मंदिर सैकड़ों साल पहले 2050 विक्रम संवत में राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था और फिर 1788 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इसका जीर्णोद्धार कराया था.

मस्जिद पक्ष की ये थी दलील

मस्जिद पक्ष की ओर से सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने कहा कि दावे के अनुसार जब मंदिर तोड़ा गया, तब ज्योतिर्लिंग उसी स्थान पर मौजूद था, जहां इस वक्त है. उसी दौरान अकबर के वित्त मंत्री टोडरमल ने नारायण भट्ट से मंदिर बनवाया था, जो उसी ज्योतिर्लिंग पर बना है. ऐसे विवादित ढांचा के नीचे दूसरा शिवलिंग कैसे आ सकता है? इसलिए खुदाई नहीं होनी चाहिए. अयोध्या राम जन्मभूमि की तरह विश्वनाथ मंदिर की पुरातात्विक रिपोर्ट मंगाई जाने पर आपत्ति जताते हुए मस्जिद पक्ष के वकील ने कहा कि हालात विपरीत हैं. वहां बयान होने के बाद विरोधाभास की स्थिति में कोर्ट ने रिपोर्ट मंगाई थी जबकि यहां मामले में अभी तक किसी का भी साक्ष्य नहीं हुआ है.
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