अखिलेश सरकार ने कुपात्र किसानों के भी माफ कर दिए थे कर्ज: कैग रिपोर्ट 

सीएजी रिपोर्ट में इस योजना के औचित्य पर सवाल उठाये गए हैं, क्योंकि सरकार ने यह स्कीम तब लागू की जब राजस्व विभाग ने...

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 20, 2019, 7:25 PM IST
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Updated: July 20, 2019, 7:25 PM IST
छोटे व सीमांत किसानों के कर्ज माफ करने के लिए अखिलेश सरकार की ओर से चलाई गई योजना के तहत 79.67 करोड़ रुपये का लाभ 16,184 अपात्र लाभार्थियों को भी मिला था. योजना की कट ऑफ डेट बदलने के कारण सरकार को 138 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा. कैग रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुए हैं. उत्तर प्रदेश सरकार के आर्थिक और राजस्व क्षेत्र के बारे में भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की ओर उस रिपोर्ट को शुक्रवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश किया गया.

योजना पर 2012-16 के दौरान 1784 करोड़ रुपये खर्च हुए
रिपोर्ट में बताया गया  है कि कर्जमाफी योजना घाटे में चल रहे उत्तर प्रदेश सहकारी ग्रामीण विकास बैंक (यूपीएसजीवीबी) की आर्थिक सेहत सुधारने में अहम भूमिका निभाई. योजना के क्रियान्वयन की अवधि के दौरान बैंक के अध्यक्ष तत्कालीन सहकारिता मंत्री शिवपाल सिंह यादव थे. अखिलेश सरकार ने 50 हजार रुपये तक का कर्ज लेने वाले ऐसे छोटे व सीमांत किसानों के लिए वर्ष 2012 में ऋण माफी योजना लागू की थी, जिन्होंने मूलधन का कम से कम 10 प्रतिशत चुका दिया हो. योजना पर 2012-16 के दौरान 1784 करोड़ रुपये खर्च हुए और 7.58 लाख छोटे व सीमांत किसान लाभान्वित हुए.

मूलधन का न्यूनतम 10 प्रतिशत तक भी जमा नहीं किया गया

प्रदेश के 75 में से 17 जिलों के नमूना लेखा परीक्षा में पाया गया कि योजना का लाभ पाने वाले तीन से 18 प्रतिशत तक किसान (कुल 16184) अपात्र थे, क्योंकि उन्होंने मूलधन का न्यूनतम 10 प्रतिशत तक भी जमा नहीं किया था. इन अपात्र लाभार्थियों को 79.67 करोड़ रुपये का लाभ मिला.

22 नवंबर 2012 को कैबिनेट से मंजूर हुई यह योजना 31 मार्च 2012 तक बकाया मूलधन और ब्याज को माफ करने के लिए बनायी गई थी. बैंक के अनुरोध पर अप्रैल 2013 में सहकारिता विभाग ने कट ऑफ तिथि बदलकर ब्याज में माफी की तारीख को सरकार द्वारा बैंक को धनराशि उपलब्ध कराने की तारीख तक कर दिया. इससे सरकार पर 138 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा. योजना का फायदा सिर्फ यूपीएसजीबीवी से कर्ज लेने वाले किसानों को मिला, अन्य बैंकों से ऋण लेने वालों को नहीं.

इस योजना के औचित्य पर सवाल उठाये गए हैं
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सीएजी रिपोर्ट में इस योजना के औचित्य पर सवाल उठाये गए हैं, क्योंकि सरकार ने यह स्कीम तब लागू की जब राजस्व विभाग ने दिसंबर 2007 में शासनादेश जारी कर उन छोटे व सीमांत किसानों के खिलाफ जमीन की नीलामी के जरिये राजस्व वसूली पर रोक लगा दी थी. जिनके पास 3.125 एकड़ तक भूमि हो, भले ही उन्होंने एक लाख रुपये या अधिक ऋण लिया हो.

प्रदेश सरकार के 24805 करोड़ के राजस्व की क्षति का आकलन किया है
उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग पर भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में बसपा एवं सपा सरकारों के दौरान प्रदेश सरकार के 24805 करोड़ के राजस्व की क्षति का आकलन किया है. शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश की गई सीएजी की रिपोर्ट में प्रदेश की आबकारी नीति 2008-9 से 2017-18 के दौरान हुई अनियमिततओं व क्षति का आकलन किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन सरकारों ने विदेशी शराब एवं बियर की कीमत मनमाने ढंग से तय करने की अनुमति डिस्टलरीज और ब्रेवरीज को दी.

इतना ही नहीं सीएजी ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार के द्वारा 2018-19 में घोषित नई नीति के कारण आबकारी से होने वाली आय में 48 प्रतिशत की वृद्धि का भी ब्यौरा दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नई आबकारी नीति के चलते राज्य में 18705 करोड़ रुपए राजस्व बढ़ा है.

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First published: July 20, 2019, 5:17 AM IST
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