अपना शहर चुनें

States

भारतीय राजनीति के औरंगजेब हैं अखिलेश, एक भी दलित को नहीं दिया यश भारती सम्मान: डॉ लालजी निर्मल

अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर बड़ा हमला बोला है.
अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर बड़ा हमला बोला है.

Lucknow News: अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने लखनऊ में कहा कि आंबेडकर के मानने वालों से अखिलेश यादव नफरत करते हैं. अखिलेश सरकार में कुल 195 लोगों को यशभारती पुरस्कार दिए गए, इसमें से एक भी दलित विद्वान नहीं थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2021, 3:20 PM IST
  • Share this:
लखनऊ. अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल (Dr Lalji Prasad Nirmal) ने मंगलवार को लखनऊ (Lucknow) में प्रेस कांफ्रेंस कर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) पर जमकर हमला बोला. लालजी प्रसाद निर्मल ने यहां तक कहा दिया कि अखिलेश यादव भारतीय राजनीति के औरंगजेब (Aurangzeb) हैं, जिसने अपने पिता मुलायम सिंह यादव को राजनीति से बेदखल कर उन्हें घर में बैठने के लिए मजबूर कर दिया. ऐसे मुगल शासक की विचारधारा के लोगों को प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी. विधानसभा चुनाव में कहीं दूर-दूर तक अखिलेश यादव दिखाई नहीं पड़ेंगे.

अखिलेश यादव को लेकर डॉ. निर्मल ने आगे कहा कि आंबेडकर के मानने वालों से अखिलेश यादव नफरत करते हैं. वह केवल वोटबैंक के लिए समय-समय पर दिखावा करते रहते हैं. उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार में कुल 195 लोगों को यशभारती पुरस्कार दिए गए, इसमें से एक भी दलित विद्वान नहीं थे. यह दिखाता है कि वह केवल मुगल मानसिकता से काम करते हैं. कांशीराम उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी जो लखनऊ में है, उसका नाम बदलकर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी कर दिया गया है, जबकि बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर की पत्नी के नाम पर बने रमाबाई नगर जिले का नाम बदल कर कानपुर देहात कर दिया.

डॉ लालजी प्रसाद निर्मल की प्रेस कांफ्रेंस




'अखिलेश यादव की पार्टी में दलितों का कोई स्थान नहीं'

डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने अखिलेश यादव की राजनीति को परिवार और एक जाति विशेष की राजनीति बताया. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी में दलितों का कोई स्थान नहीं है. उनकी पार्टी में अनुसूचित जाति मोर्चे का कोई अध्यक्ष तक नहीं है. यही हाल उनकी उत्तर प्रदेश की सरकार में भी था. दलितों की आवाज को दबा दिया जाता था. मायावती से निजी शत्रुता का बदला अखिलेश यादव ने दलितों से लिया. दलितों से इतनी नफरत थी कि उन्होंने गैरदलितों को अनुसूचित जाति आयोग और वित्त निगम का अध्यक्ष तक बना दिया.

अखिलेश को हवाई नेता समझता है गरीब, किसान

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव तो अपना जन्मदिन तक देश में नहीं मनाते हैं. ऐसे नेताओं को हमारा गरीब, किसान, हाशिए का समाज हवाई नेता समझता है. वह दिन दूर नहीं, जब अखिलेश यादव पूरे देश में कहीं से भी चुनाव नहीं जीत पाएंगे. वह चुनाव जीतने के लिए, ऐसा लोकसभा क्षेत्र चुनते हैं, जहां उनके जातियों की संख्या सबसे अधिक हो, लेकिन उनका सजातीय समाज भी अब जान गया है कि वह वोट भले ही पूरे समाज का लेते हैं, लेकिन वह केवल परिवार की राजनीति करते हैं. केवल परिवार का ही भला करते हैं. अब तो उनके परिवार में भी केवल 2 ही सांसद रह गए हैं.

डॉ. निर्मल ने कहा कि अब वक्त आ गया है, जब जातिवादी राजनीति और परिवारवादी पार्टियों को नकार दिया गया. फर्जी समाजवाद और फर्जी बहुजनवाद के खतरों से वे पूरे प्रदेश के दलित समाज को अवगत कराएंगे. समाजवाद और बहुजनवाद के नाम से दलितों-पिछड़ों को छलने वाले क्षेत्रिय दलों ने प्रदेश में जातिवाद को मजबूत कर आर्थिक साम्राज्य और परिवारवाद को बढ़ाने का काम किया.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज