राज्यसभा चुनाव में BSP से रिश्तों पर बोले अखिलेश यादव- जो BJP से चुपचाप मिले हैं, उनका पर्दाफाश जरूरी था

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (FIle Photo)
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (FIle Photo)

सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि जो लोग बीजेपी के साथ अंदर से चुपचाप मिले हैं, उनका पर्दाफाश होना जरूरी था, इसीलिए समाजवादी पार्टी ने रास चुनाव (Rajya Sabha Election) में निर्दलीय प्रत्याशी का समर्थन किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 31, 2020, 12:45 PM IST
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लखनऊ. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने शनिवार को आचार्य नरेंद्र देव की जयंती के अवसर पर श्रद्धासुमन अर्पित किया. इस दौरान अखिलेश ने कहा कि आज के दिन हम सरदार पटेल जी को, आचार्य नरेंद्र देव जी और वाल्मीकि जी को याद कर रहे हैं. लोगों का रोजगार छिन गया है, नौकरी चली गई है और किसान एमएसपी के लिए परेशान है. हम संकल्प ले रहे हैं कि देश का जो डेवलपमेंट छूटा है उसका विकास करेंगे. इस दौरान राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देने और बहुजन समाज पार्टी से रिश्तों पर भी अखिलेश यादव ने बयान दिया.

हमारा मकसद था कि वोट पड़ें और सच सामने आए
अखिलेश यादव ने बसपा से रिश्तों पर कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी तरह का गठबंधन कर सकती है. जो लोग भारतीय जनता पार्टी के साथ अंदर से चुपचाप मिले हैं, उनका पर्दाफाश होना जरूरी था इसीलिए समाजवादी पार्टी ने निर्दलीय प्रत्याशी का समर्थन किया. हमारा मकसद था कि वोट पड़े और जनता जाने कि कौन किससे मिला है?

बीजेपी की गलत नीतियों से किसान बेहाल
अखिलेश यादव ने कहा कि 4 लाख करोड़ का इन्वेस्टमेंट कहां गया? इससे पहले शुक्रवार का बयान जारी कर अखिलेश यादव कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की गलत नीतियों के चलते किसान बेहाल है। जमाखोर मालामाल हो रहे हैं. बिचैलियों और बड़े व्यापारियों के सरकारी तंत्र से मिलीभगत की वजह से किसान अपनी फसल उन्हें औनपौने दाम पर बेचने को मजबूर है. वहीं सरकार झूठे दावों का गुणगान कर अपनी कमियों पर पर्दा डालने का काम कर रही है. किसानों के सपनों की हत्या हो रही है. भाजपा सरकार किसानों की आय दुगनी करने, और किसान की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं कृषि उपज की उत्पादन लागत का डेढ़ गुना देने के अपने वादे भूल चुकी है.



धान खरीद केंद्रों में अव्यवस्था और लूट का राज
किसानों को इस वर्ष धान की फसल से बहुत उम्मीद थी. सही न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल जाता तो उनके बेटे-बेटी की शादी हो जाती और वर्षा-बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकान की मरम्मत हो जाती. किसान का दुर्भाग्य उसको 1888 रुपए का घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य तो मिला नहीं, उल्टे 800 से 1000 रुपए और अधिकतम 1200 रुपए प्रति कुंतल धान बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है. धान खरीद केंद्रों में अव्यवस्था और लूट का राज कायम है.
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