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बीजेपी के 'पिछड़ा कार्ड' से सतर्क हुई सपा, OBC को एकजुट करने में झोंकी ताकत

बैठक के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव व अन्य नेता. Photo: News 18

बैठक के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव व अन्य नेता. Photo: News 18

बीजेपी के प्रदेश स्तरीय पिछड़ा वर्ग सम्मेलनों के जवाब में समाजवादी पार्टी अब जिला स्तरीय सम्मेलनों के आयोजन में जुट गई है. लक्ष्य साफ है ओबीसी वोटर्स को समाजवादी पार्टी के पक्ष में एकजुट रखना है.

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लोकसभा चुनावों को लेकर उत्तर प्रदेश में वोट बैंक प्रभावित करने की मुहिम सभी राजनीतिक दलों ने तेज कर दी है. भारतीय जनता पार्टी लगातार पिछड़ा वर्ग सम्मेलन कर उत्तर प्रदेश में ओबीसी मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है. बीजेपी की इस कवायद से यूपी के ओबीसी वोटर में अच्छी दखल रखने वाली समाजवादी पार्टी भी सतर्क हो गई है. समाजवादी पार्टी अब बीजेपी के प्रदेश स्तरीय सम्मेलनों के जवाब में जिला स्तरीय सम्मेलनों के आयोजन में जुट गई है. लक्ष्य साफ है ओबीसी वोटर को समाजवादी पार्टी के पक्ष में एकजुट रखना है.

दरअसल उत्तर प्रदेश की सियासत में पिछड़ा वर्ग की अहम भूमिका रही है. माना जाता है कि करीब 50 प्रतिशत ये वोट बैंक जिस भी पार्टी के खाते में गया, सत्ता उसी की हुई. 2014 और 2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को पिछड़ा वर्ग का अच्छा समर्थन मिला. नतीजतन वह केंद्र और राज्य की सत्ता पर मजबूती से काबिज हुई.

अब महागठबंधन की आहट और उपचुनावों में हार के बाद बीजेपी ने पिछड़ी जातियों को लुभाने, मनाने के लिए सम्मेलनों का सहारा लिया है. इस पूरी कवायद की अगुवाई प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कर रहे हैं, वहीं संगठन और पार्टी के विभिन्न जातियों के नेता केशव की अगुवाई में जोर लगाए हुए हैं.

बीजेपी ने 7 अगस्त से लेकर 24 सितंबर तक लखनऊ में पिछड़ा वर्ग के तमाम राज्य स्तरीय सम्मेलन किए. इनमें प्रजापति सम्मेलन से अभियान की शुरुआत हुई. इसके बाद राजभर, विश्वकर्मा, पाल बघेल सम्मेलन, लोधी, निषाद, चौरसिया, यादव, जाट, कुर्मी पटेल और गुर्जर सम्मेलन प्रमुख हैं. इन सम्मेलनों में केशव मौर्य के साथ सीएम योगी से लेकर जाति से जुड़े तमाम बीजेपी के नेताओं ने शिरकत की. पार्टी को इन सम्मेलनों से विभिन्न जातियों से जुड़ा अहम फीडबैक भी मिला. इसी लिए अब पार्टी ने एक कदम आगे बढ़ते हुए जिला स्तर पर ऐसी ही बैठकें करने की तैयारी की है.

हर जिले में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन करने का ऐलान
उधर बीजेपी की इस कवायद ने कहीं न कहीं समाजवादी पार्टी को भी चौकन्ना कर दिया है. पार्टी ने खतरा भांपते हुए यूपी के सभी 75 जिलों में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन करने का ऐलान कर दिया है.

इस अभियान में पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ अध्यक्ष दयाराम प्रजापति समेत पिछड़ा वर्ग के नेताओं को लगाया गया है. इन सम्मेलनों में समाजवादी पार्टी को पिछड़ा वर्ग का सबसे बड़ा हितैषी और वर्तमान बीजेपी सरकारों को ​पिछड़ा वर्ग के खिलाफ बताने की कोशिश होगी. 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान के पहले चरण की शुरुआत अमेठी से हो चुकी है. अब बुधवार को सुलतानपुर, 27 को जौनपुर, 28 को भदोही तथा 29 सितंबर को वाराणसी में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन होना है. इसके बाद 1 अक्टूबर को चंदौली, 2 अक्टूबर को सोनभद्र, 3 अक्टूबर को मिर्जापुर, 4 अक्टूबर को इलाहाबाद, 5 अक्टूबर को कौशाम्बी, 6 अक्टूबर को फतेहपुर और 7 अक्टूबर को रायबरेली में समाजवादी पार्टी का पिछड़ा वर्ग सम्मेलन होगा.

चुनाव के लिए नहीं ये साल भर चलने वाली प्रक्रिया- अनुराग भदौरिया
उधर समाजवादी पार्टी के नेता इसे चुनाव से नहीं जोड़ते हैं. वह इन पिछड़ा वर्ग सम्मेलनों को पार्टी का लगातार चलने वाला प्रयास करार देते हैं. समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया कहते हैं कि पार्टी क्षेत्रीय स्तर पर विधानसभा वार सम्मेलन कर रही हैं. इसमें बूथ कार्यकर्ता से लेकर स्थानीय स्तर के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं. इसके अलावा पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ की तरफ से भी लगातार सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं. पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ अध्यक्ष दयाराम प्रजापति की अगुवाई में प्रदेश के तमाम जिलों में ये सम्मेलन हो रहे हैं. अनुराग भदौरिया कहते हैं कि लेकिन ये चुनाव को देखकर नहीं हो रहे हैं. अनुराग भदौरिया ने कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार साल भर ऐसे सम्मेलन आयोजित करती रहती है.

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