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AIPC में बजट 2021 पर मंथन, अर्थशास्त्री बोले- भारतीय अर्थव्यवस्था को दलदल से बाहर निकालना मुश्किल

ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस ने बजट को बेदम बताया है.

ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस ने बजट को बेदम बताया है.

Budget 2021 News: ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस (AIPC) के बैनर तले बजट 2021 पर मंथन के लिए जुटे अर्थशास्त्रियों, नौकरशाहों और व्यापारियों ने कहा है कि बजट से अर्थव्यवस्था पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा.

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लखनऊ. कोरोना वायरस की महामारी और किसान आंदोलन के बीच सोमवार को पेश किए गये मोदी सरकार के बजट 2021 (Budget 2021) पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा के लिए कांग्रेस मुख्यालय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस (AIPC) के बैनर तले 2021 के केन्द्रीय बजट पर आयोजित कार्यशाला में कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह के साथ यूपी के पूर्व मुख्‍य सचिव आलोक रंजन समेत कई अर्थशास्त्रियों, नौकरशाहों, व्यापारियों और अन्य विषय विशेषज्ञों ने शिरकत की. इस दौरान सभी ने मोदी सरकार के इस बजट से अर्थव्यवस्था पर कोई खास फर्क न पड़ने का दावा करते हुए इस बजट को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठाए हैं.

इस दौरान न्यूज़ 18 से बात करते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा कि इस बजट में मुख्य रूप ग्रोथ ओरिएंटेड रखने की बात कही गई है, लेकिन इस बजट में दूसरी ओर संसाधनों की कमी को पूरा करने के लिए निजीकरण की बात को भी रखा गया है. क्या ये सही रास्ता है या नहीं है यह एक विचारणीय बिंदु है कि आखिर यह किस हद तक सफल होगा? कितने संशाधन मिलेंगे? क्योंकि इस वर्ष 2 लाख करोड़ के सापेक्ष अभी सिर्फ 32 हजार करोड़ ही मिल पाया है. ऐसे में 1 लाख 75 हजार करोड़ का जो लक्ष्य है उसे कैसे पूरा किया जायेगा. और कितने संसाधन मिल पायेंगे? ये देखने की बात है.

ग्रोथ के साथ ही साथ पिछड़ों और गरीबों को भी ऊपर उठाना होगा: आलोक रंजन
पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के मुताबिक इस बजट का मुख्य बिंद वृद्धि रखा गया है, लेकिन क्या ग्रोथ से ही सब कुछ हो जायेगा. ग्रोथ के साथ ही साथ पिछड़ों और गरीबों को भी ऊपर उठाना होगा. बेरोजगारी के साथ असमानता को भी दूर करना बेहद आवश्यक है. इस बजट का रोडमैप जो कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को छोड़कर सभी आर्थिक क्षेत्रों से सरकार को हटने की बात करता है, कई खतरों से भरा हुआ है जिसमें सार्वजनिक उद्यमों के निजीकरण के मूल्यांकन के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप प्रमुख हैं. ऐसे में अगर इन सभी बिंदुओ को देखा जाय तो ये बजट अर्थ व्यवस्था पर कितना असर दिखाएगा, इसका पता आगे ही चलेगा.

अर्थशास्त्री डॉ. फहीमुद्दीन ने किया यह दावा
इस दौरान अर्थशास्त्री डॉ. फहीमुद्दीन ने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र के लिए बहुत कम रियायत है. सरकार ने संकटग्रस्त किसानों को सीधे नकद भुगतान देने के बजाय, ऋण की पेशकश की है. हालांकि ऋण का पुनर्भुगतान ना कर पाना ही किसान आत्महत्या का प्रमुख कारण है. जबकि जेएनपीजी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर अर्थशास्त्र डॉ. हिलल नकवी ने राजकोषीय घाटे के बारे में बात करते हुए कहा कि जो सकल घरेलू उत्पाद के 9.5% पर आंकी गई है और अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि है, वो भारतीय अर्थव्यवस्था को स्व-निर्मित और महामारी से प्रेरित दलदल से बाहर निकालने के लिए पर्याप्त नहीं होगी.

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