SC/ST एक्ट में बिना नोटिस गिरफ्तारी नहीं, 7 साल से कम सजा वाले मामले में नियम लागू

जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस संजय हरकौली की खंडपीठ ने 19 अगस्त 2018 को दर्ज हुई एफआईआर को रद्द करने वाली एक याचिका की सुनवाई करते हुए यह बात कही.

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 12, 2018, 9:07 AM IST
SC/ST एक्ट में बिना नोटिस गिरफ्तारी नहीं, 7 साल से कम सजा वाले मामले में नियम लागू
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यह अहम आदेश दिया है.
News18 Uttar Pradesh
Updated: September 12, 2018, 9:07 AM IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम में दर्ज एक मामले के खिलाफ दायर याचिका सुनवाई करते हुए अहम आदेश दिया. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में अपराध सात वर्ष से कम सजा योग्य हो, उनमें बिना नोटिस गिरफ्तारी नहीं की जा सकती. जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस संजय हरकौली की खंडपीठ ने 19 अगस्त 2018 को दर्ज हुई एफआईआर को रद्द करने वाली एक याचिका की सुनवाई करते हुए यह बात कही. दिलचस्प है कि यह आदेश संसद में एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद दर्ज एफआईआर में यह फैसला आया है.

क्या है मामला?
मामला गोंडा जिले के खोदारे पुलिस थाने का है. यहां राजेश मिश्रा व तीन अन्य लोगों पर 19 अगस्त 2018 को मारपीट, घर में घुसकर मारपीट करने और अपशब्द कहने पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं सहित एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी. एफआईआर के खिलाफ याचिका करते हुए मिश्रा व तीन अन्य ने इसे खारिज करने की प्रार्थना की थी.

मामले में प्रदेश सरकार ने अपने जवाब में बताया था कि आरोपियों पर लगाई गई सभी धाराओं में सजा सात वर्ष से कम की है. ऐसे में जांच अधिकारी ने सीआरपीसी से सेक्शन 41 व 41ए की अनुपालना करते हुए गिरफ्तारी नहीं की है. इसके लिए 2014 के सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरनेश कुमार बनाम बिहार सरकार मामले में की गई व्यवस्था का सहारा भी सरकार ने लिया. इस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार के पक्ष को सुनने के बाद याची खुद याचिका वापस लेना चाहता है.

क्या है सीआरपीसी सेक्शन 41ए?
सीआरपीसी सेक्शन 41ए के जरिए गैरजरूरी गिरफ्तारी रोकने के प्रावधान किए गए हैं. इसके तहत आरोपी को पुलिस अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होने का नोटिस जारी किया जाएगा. अगर आरोपी नोटिस का अनुपालन करता है तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, गिरफ्तार किया जाता है तो अधिकारी वजह लिखेगा. अगर आरोपी नोटिस का अनुपालन नहीं करता है, पुलिस अधिकारी उसे गिरफ्तार कर सकता है.

इन्हीं प्रावधानों के आधार पर अरनेश कुमार बनाम बिहार सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट साफ कर चुकी है कि, पुलिस अधिकारी को आरोपी को गिरफ्तार करने की जरूरत नहीं है, वह नोटिस जारी करेगा.
Loading...

और भी देखें

पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...

वोट करने के लिए संकल्प लें

बेहतर कल के लिए#AajSawaroApnaKal
  • मैं News18 से ई-मेल पाने के लिए सहमति देता हूं

  • मैं इस साल के चुनाव में मतदान करने का वचन देता हूं, चाहे जो भी हो

    Please check above checkbox.

  • SUBMIT

संकल्प लेने के लिए धन्यवाद

काम अभी पूरा नहीं हुआ इस साल योग्य उम्मीदवार के लिए वोट करें

ज्यादा जानकारी के लिए अपना अपना ईमेल चेक करें

Disclaimer:

Issued in public interest by HDFC Life. HDFC Life Insurance Company Limited (Formerly HDFC Standard Life Insurance Company Limited) (“HDFC Life”). CIN: L65110MH2000PLC128245, IRDAI Reg. No. 101 . The name/letters "HDFC" in the name/logo of the company belongs to Housing Development Finance Corporation Limited ("HDFC Limited") and is used by HDFC Life under an agreement entered into with HDFC Limited. ARN EU/04/19/13618
T&C Apply. ARN EU/04/19/13626