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श्रीश्री रविशंकर की मध्यस्थता से चुनावी बयार में राम मंदिर को लेकर चर्चा तेज

Ajayendra Rajan | News18Hindi
Updated: November 15, 2017, 11:49 AM IST
श्रीश्री रविशंकर की मध्यस्थता से चुनावी बयार में राम मंदिर को लेकर चर्चा तेज
गुजरात विधानसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव के बीच अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर से गरमा गया है.
Ajayendra Rajan | News18Hindi
Updated: November 15, 2017, 11:49 AM IST
गुजरात विधानसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव के बीच अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर से गरमा गया है.

इस बार आर्ट आॅफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर मामले में सुलह की मध्यस्थता करने की कोशिश में जुटे हैं. वहीं राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े पक्षकार सुलह के फॉर्मूले को देखकर ही आगे की रणनीति बताने की बात कर रहे हैं. वहीं सुलह की कोशिशें कई और खेमों से भी तेज होती दिख रही है.

इसी क्रम में बुधवार को श्रीश्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की. दोनों के बीच यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि गोरखपुर की गोरक्षपीठ अयोध्या में राम मंदिर आन्दोलन से जुड़ी रही है और योगी आदित्यनाथ यहां के मठाधीश भी हैं.

वहीं आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जफरयाब जिलानी ने श्रीश्री और सीएम योगी की मुलाकात पर भी सवाल उठाए हैं. जफरयाब जिलानी ने कहा है कि श्रीश्री रविशंकर अगर सीएम को ज्यादा अहमियत देंगें तो हमारी नजर में उनकी अहमियत कम होगी.

उन्होंने कहा कि बाबरी मस्ज़िद विवाद कोर्ट के बाहर सुलझाने पर जफरयाब जिलानी ने कहा कि कोर्ट के बाहर मामला सुलझाने का कोई प्रपोजल नहीं मिला है. मुसलमान बाबरी मस्ज़िद सरेंडर करने को तैयार नहीं है. श्रीश्री की ओर से अभी तक कोई प्रपोजल नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री खुद पक्षकार हैं. हम अभी तक श्रीश्री रविशंकर को तटस्थ समझते थे.

दिलचस्प बात ये है कि पहले दोनों ही पक्ष बातचीत को तैयार ही नहीं थे. लेकिन अब इन पक्षकारों का कहना है कि हम बातचीत करेंगे लेकिन ये सिर्फ पक्षकारों के बीच ही होगी. बाहरी व्यक्ति की कोई जरूरत नहीं है.

गुरुवार को अयोध्या जाने से पहले श्रीश्री रविशंकर की लखनऊ में कई मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात होनी है. श्रीश्री का कहना है कि उनकी मध्यस्थता से राम मंदिर मुद्दे का सकारात्मक परिणाम निकलकर सामने आएगा.

उधर श्रीश्री रविशंकर की इस कवायद को राम मंदिर के पक्षकार राजनीति से प्रेरित मानते हैं.
श्रीश्री रविशंकर पर हिंदू पक्षकार धर्मदास ने कहा कि अयोध्यावासी चाहते हैं कि अयोध्या में जल्द राम मंदिर बने. अब तो सुनवाई जल्द शुरू होने वाली है, अपने आप सामने निकल कर आ जाएगा कि कौन लोग इसमें राजनीति कर रहे हैं या कौन हैं जो राम मंदिर बनने देना नहीं चाह रहे हैं.

वहीं राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे बीजेपी के पूर्व सांसद राम विलास वेदांती ने कहा कि श्रीश्री रविशंकर की मध्यस्थता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी.

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First published: November 15, 2017
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