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आजादी के बाद दूसरी महिला शबनम को होगी फांसी या मिलेगी उम्रकैद? बेटे की मर्सी प्ली पर क्या होगा 7 खून माफ

प्रेमी संग मिलकर कर दी थी अपने घर के 7 लोगों की हत्या.

प्रेमी संग मिलकर कर दी थी अपने घर के 7 लोगों की हत्या.

Execution of Shabnam:अमरोहा में साल 2008 में अपने प्रेमी के साथ मिलकर 7 लोगों की हत्या के मामले में शबनम और उसके प्रेमी सलीम को हुई है फांसी की सजा. शबनम की वकील ने राज्यपाल से फांसी को उम्रकैद में बदलने की अपील की है. इससे पहले दोनों की सजा माफी याचिका राष्ट्रपति के यहां से हो चुकी है खारिज.

  • News18Hindi
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लखनऊ. अपने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के 7 सदस्यों की हत्या करने वाली अमरोहा की शबनम पिछले कई वर्षों से अपनी फांसी का इंतजार कर रही थी. लेकिन ऐन वक्त पर उसके वकील ने यूपी के राज्यपाल से उसकी सजा को बदलने की गुहार लगाई. इलाहाबाद हाईकोर्ट की वकील सहर नकवी ने गवर्नर आनंदीबेन पटेल को दी गई अपनी अर्जी में शबनम के महिला होने के नाते उसकी सजा उम्रकैद में बदलने की अपील की थी. इस अर्जी पर विचार कर गवर्नर ने यह मामला यूपी सरकार को रेफर कर दिया. तब से शबनम अपने भविष्य के फैसले का इंतजार कर रही है. अमरोहा की शबनम की फांसी को उम्रकैद में बदलने को लेकर गवर्नर के निर्देश पर उनके विशेष सचिव ने प्रदेश के कारागार विभाग के प्रमुख सचिव को कार्रवाई का निर्देश दे रखा है. नियमों के मुताबिक उचित निर्णय लिए जाने का आदेश दिया गया है.

शबनम की सजा को बदलने के लिए गवर्नर को दी गई अर्जी में उसकी वकील सहर नकवी ने दलील दी है कि देश में अब तक किसी भी महिला को फांसी की सजा नहीं दी गई है. इसलिए शबनम को फांसी दिए जाने से पूरी दुनिया में देश की छवि खराब होगी. शबनम के किए अपराध में उसकी सजा का तरीका बदला जा सकता है. अर्जी में शबनम के इकलौते बेटे 13 साल के ताज उर्फ बिट्टू का हवाला भी दिया गया है. अर्जी में कहा गया है कि शबनम को फांसी दिए जाने से उसके बेटे के भविष्य पर गलत असर पड़ेगा. अधिवक्ता सहर नकवी ने कहा है कि इस दुनिया में बच्चे का कोई अपना नहीं है. फांसी दिए जाने से बच्चे को जीवनभर ताना सुनना पड़ेगा. फांसी की वजह से सामाजिक परिस्थितियों के चलते बच्चे के मानसिक विकास व भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है. मां के अपराध की सजा बच्चे को दिया जाना कतई न्याय संगत नहीं होगा.

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कारागार विभाग में मजबूत पैरवी की तैयारी

गवर्नर सचिवालय ने एडवोकेट सहर नकवी की अर्जी पर यूपी सरकार को उचित कार्रवाई का आदेश दिया है. इसके बाद ही यह अर्जी कारागार विभाग के प्रमुख सचिव के पास पहुंची है. बताया गया है कि प्रमुख सचिव नियमों के मुताबिक उचित फैसला लेंगे. शबनम की वकील सहर नकवी को गवर्नर सचिवालय के आदेश की कॉपी कुछ महीने पहले 22 जुलाई को मिली थी. इसके आधार पर नकवी ने दावा किया है कि प्रमुख सचिव के यहां अब तमाम दलीलों व पुरानी नजीरों के आधार पर मजबूत पैरवी की जाएगी. शबनम की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कराने हरसंभव प्रयास किया जाएगा.

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प्रेमी के साथ मिलकर घर के 7 लोगों को उतारा था मौत के घाट

गौरतलब है कि शबनम और उसके प्रेमी सलीम को माता-पिता, दो भाइयों और भाभी समेत परिवार के 7 सदस्यों की हत्या का दोषी करार दिया गया है. अप्रैल 2008 में यूपी के अमरोहा जिले के बावनखेड़ा में हुई यह वारदात काफी चर्चित रही थी. अपने प्रेमी सलीम से शादी करने के लिए शबनम ने 7 कत्ल किए थे. प्रेमी सलीम को भी कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है. सलीम इस समय नैनी सेंट्रल जेल में बंद है, जबकि शबनम बरेली जेल में. इन दोनों के ही पास फांसी से बचने के लिए बहुत कम विकल्प बचे हैं, क्योंकि राष्ट्रपति ने भी दोनों की दया याचिका खारिज कर दी है. हालांकि उसकी वकील सहर नकवी का दावा है कि वह सिर्फ महिला होने के नाते शबनम को फांसी के फंदे से बचाना चाहती हैं. उन्होंने शबनम के अपराध पर अपनी तरफ से कोई सफाई नहीं दी. अधिवक्ता को उम्मीद है कि उन्हें अपने मकसद में कामयाबी जरूर मिलेगी.

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