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Analysis: लोकसभा चुनाव के पहले चरण में UP की इन 8 सीटों पर कौन पड़ेगा किस पर भारी?

Analysis: लोकसभा चुनाव के पहले चरण में UP की इन 8 सीटों पर कौन पड़ेगा किस पर भारी?

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मुस्लिम बहुल वाले इस इलाके की एक-एक सीट की समीक्षा करें तो 3 सीटों पर मुकाबला त्रिकोणात्मक नजर आता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेरठ रैली के बाद उत्तर प्रदेश में पहले चरण के चुनाव का औपचारिक शंखनाद हो गया है. उत्तर प्रदेश की जिन आठ लोकसभा सीटों पर पहले चरण में मतदान होना है, इन सभी सीटों पर 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. हालांकि कैराना के सांसद हुकुम सिंह की मौत के बाद हुए उपचुनाव में ये सीट आरएलडी के खाते में चली गई थी. कहा ये भी जाता है कि इसी सीट से गठबंधन का फॉर्मूला निकला, जिसने बीजेपी के सामने मुश्किल खड़ी की. मुस्लिम बाहुल्य वाले इस इलाके की एक-एक सीट की समीक्षा करें तो 3 सीटों पर मुकाबला त्रिकोणात्मक नजर आता है. जबकि पांच सीटें ऐसी हैं जहां एसपी-बीएसपी गठबंधन और बीजेपी के बीच आमने सामने की टक्कर दिख रही है.

पहला चरण, 3 सीटों पर त्रिकोणात्मक संघर्ष
लोकसभा चुनावों की घोषणा के पहले भले ही बीजेपी और एसपी-बीएसपी गठबंधन कांग्रेस को कहीं भी लड़ाई में नहीं मान रहे हों लेकिन जैसे जैसे चुनाव की गर्मी बढ़ रही है, कांग्रेस मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है. बात करें पहले चरण की 8 लोकसभा सीटों की तो उनमें करीब 3 सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस के उम्मीदवार लड़ाई को त्रिकोणात्मक बना रहे है. गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट से उम्मीदवारों के ऐलान से पहले लड़ाई गठबंधन बनाम बीजेपी बताई जा रही थी. जिसमें बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा था लेकिन कांग्रेस ने जैसे ही उम्मीदवारों का ऐलान किया, बीजेपी खेमें में बेचैनी बढ़ गई. कांग्रेस ने इस सीट से अरविंद सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया है.

नोएडा की सीट का जातीय गणित देखें तो यहां ठाकुर मतदाताओं की तादात सबसे ज्यादा है. कांग्रेस उम्मीदवार अरविंद सिंह चौहान ठाकुर बिरादरी से आते हैं. ऐसे में माना ये जा रहा कि अगर वो ठाकुर वोट अपने पक्ष में लाने में कामयाब होते हैं तो लड़ाई त्रिकोणात्मक हो सकती है क्योंकि एसपी-बीएसपी गठबंधन के उम्मीदवार वोट गणित में दूसरे नंबर पर आने वाली गुर्जर बिरादरी से आते हैं. तीसरे नंबर पर आने वाली ब्राह्मण बिरादरी के उम्मीदवार महेश शर्मा बीजेपी उम्मीदवार हैं. ऐसे में बिसाड़ा कांड के बाद नोएडा का अल्पसंख्यक मतदाता बीजेपी के खिलाफ वोट कर सकते हैं. ऐसे में यहां ये लड़ाई त्रिकोणात्मक होती दिख रही है क्योंकि शहरी मतादाताओं का प्रभाव बीजेपी पर ज्यादा माना जाता है.

बीजेपी के उम्मीदवार महेश शर्मा (File Photo)


बिजनौर और सहारनपुर लोकसभा सीट पर भी त्रिकोणीय लड़ाई
सहारनपुर को कांग्रेस अपनी सीट मानती है, ऐसे में कांग्रेस ने अपने विवादित नेता इमरान मसूद को मैदान में उतारा है. हालांकि मुस्लिम बहुल्य इस सीट पर एसपी-बीएसपी गठबंधन ने हाजी फजर्लुर रहमान को टिकट दिया है. 50 फीसदी से ज्यादा अल्पसंख्यक मतदाता वाली इस सीट पर दो-दो मुस्लिम उम्मीदवार आने के बाद लड़ाई त्रिकोणात्मक होती दिख रही है. बिजनौर लोकसभा सीट से कांग्रेस ने बीएसपी के दिग्गज नेता रहे नसीमुद्दीन सिद्दिकी को उम्मीदवार बनाया है. मुस्लिम वोटों के बाहुल्य वाली इस सीट पर कांग्रेस ने नसीमुद्दीन सिद्दिकी को मैदान में उतारकर अकेले मुस्लिम उम्मीदवार होने का दाव खेला है. 44 फीसदी के आस-पास मुस्लिम मतदाताओं वाली इस सीट पर नसीमुद्दीन की एंट्री ने लड़ाई त्रिकोणात्मक बना दी है.

5 सीटों पर आमने सामने का मुकाबला
पहले चरण की बाकी बची 5 सीटों में से दो सीटें बागपत और मुजफ्फरनगर में कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार न उतारकर जयंत चौधरी और अजीत सिंह को समर्थन का ऐलान कर दिया है, जबकि गाजियाबाद, मेरठ और कैराना में आमने-सामने का मुकाबला होता दिख रहा है. गाजियाबाद लोकसभा सीट पर ब्राह्मण, बनिया, ठाकुर वोट बैंक बीजेपी का परम्परागत वोट बैंक रहा है. ये तीनों मिलकर बीजेपी की राह आसान बनाते रहे हैं. लेकिन इस बार बीजेपी के परम्परागत बनिया और ब्राह्मण वोटर विपक्ष के निशाने पर है. इस सीट से गठबंधन ने पहले सुरेन्द्र कुमार मुन्नी को उम्मीदवार बनाया था लेकिन जैसे ही कांग्रेस ने ब्राह्मण उम्मीदवार डॉली शर्मा को मैदान में उतारा, सपा ने सुरेन्द्र बंसल को उम्मीदवार बना दिया. यहां बनिया और ब्राह्मण जाति के नाम पर वोट डालते हैं तो फायदा गठबंधन को होता दिख रहा है. जिससे मुकाबला आमने-सामने का होता नजर आ रहा है.

कांग्रेस की उम्मीदवार डॉली शर्मा (File Photo)


बात करें मेरठ लोकसभा सीट की तो मेरठ में बीजेपी के राजेन्द्र अग्रवाल और गठबंधन के हाजी याकुब में सीधा मुकाबला था. लेकिन कांग्रेस ने यहां पूर्व मुख्यमंत्री बनारसी दास के बेटे हरेन्द्र अग्रवाल को मैदान में उतार दिया. यानि यहां भी कांग्रेस ने बीजेपी के परंपरागत बनिया वोट का बटवारा करने की कोशिश की है. जिसका सीधा फायदा अकेले मुस्लिम उम्मीदवार हाजी याकुब को होता दिख रहा है, और मुकाबला आमने सामने का हो गया है. मुस्लिम बाहुल्य वाली कैराना सीट पर भी हालात करीब ऐसे ही हैं. कांग्रेस ने यहां से जाट नेता हरेन्द्र मलिक को उम्मीदवार बनाया है. जातिय गणित और स्थानीय प्रभाव दोनों मलिक के पक्ष में नहीं हैं. ऐसे में कैराना की लड़ाई भी बीजेपी के प्रदीप चौधरी बनाम गठबंधन की तवस्सुम बेगम के साथ होती दिख रही है.

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