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IAS विमल शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार की एक और शिकायत, चहेतों को बांट दिए करोड़ों के प्लॉट !

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 26, 2019, 12:56 PM IST
IAS विमल शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार की एक और शिकायत, चहेतों को बांट दिए करोड़ों के प्लॉट !
प्रतीकात्मक तस्वीर

शिकायत में कहा गया कि गाजियाबाद (Ghaziabad) की सिद्धार्थ विहार योजना (Siddharth Vihar Yojana) में प्राइम लोकेशन के कमर्शियल प्लॉटों (Commercial plots) की नीलामी हुई लेकिन इसमें शामिल होने के आवंटन फॉर्म केवल उन्हीं डेवलपर को दिए गए जिन्हें प्लाट आवंटित किया जाना था.

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लखनऊ. दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे में भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी के मुख्य आरोपी विमल कुमार शर्मा की मुश्किलें और बढ़ती हुई नजर आ रही है. सीएम योगी को उनके खिलाफ एक नई शिकायत सौंपी गई है जिसमें उन पर आरोप लगाया गया है कि आवास विकास परिषद में संयुक्त सचिव रहते हुए विमल कुमार शर्मा ने अपने चहेतों को मनमाने ढंग से सपा शासनकाल में कमर्शियल प्लाट आवंटित कर दिए.

इस शिकायती पत्र में उप आवास आयुक्त SB सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाया गया है साथ ही लखनऊ, आगरा, गाजियाबाद, नोएडा, उन्नाव, नैमिषारण्य, मुंबई, उत्तराखंड में इनकी तमाम बेनामी संपत्तियों की सूची भी शिकायत पत्र के साथ सीएम को भेजी गई है. ऐसे में बड़े सवाल यह भी उठ रहे हैं कि सपा शासनकाल में हुए घोटाले की जांच उस समय के बड़े अधिकारियों द्वारा क्यों नहीं की गई? क्यों चहेतों को बंदरबांट कर प्लॉट आवंटित कर दिया गया?

क्या है पूरा मामला
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे की ही तर्ज पर आवास एवं विकास परिषद गलत तरीके से करीबियों को फायदा पहुंचाए जाने की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता मेरठ निवासी नदीम चौहान ने की है. नदीम ने जो आरोप लगाए हैं उनके मुताबिक वर्ष 2015 में सपा सरकार के करीबी बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए मनमाने ढंग से कमर्शियल प्लाट आवंटित कर दिए गए. शिकायत में कहा गया कि गाजियाबाद की सिद्धार्थ विहार योजना में प्राइम लोकेशन के कमर्शियल प्लॉटों की नीलामी हुई लेकिन इसमें शामिल होने के आवंटन फॉर्म केवल उन्हीं डेवलपर को दिए गए जिन्हें प्लाट आवंटित किया जाना था. आरोप है कि प्लाट नंबर 4BS/2/1,4 BS/2/2,4BS/2/4 के आवंटन में बड़े पैमाने पर धांधली की गई.

हैरत की बात ये है कि प्लाट आवंटन के लिए देय सभी तीनों DD भी एक ही बिल्डर के अकाउंट से बने थे. इस नीलामी में चुनिंदा बिल्डर ही शामिल हुए और औने-पौने दाम पर परिषद ने उनको प्लाट आवंटित कर दिए जिसके चलते परिषद को एक हजार करोड़ रुपए के नुकसान की शिकायत भी हुई लेकिन इसका संज्ञान अब तक नहीं लिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक आवंटन के बाद इन प्लॉटों का पैसा तक नहीं जमा किया गया और तो और बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए वर्ष 2017 तक विलंब शुल्क शून्य मान लिया गया जिस कारण देरी से भुगतान पर लगने वाला ब्याज अपने आप माफ हो गया. जिसकी लागत करीब 200 करोड रुपए बताई जा रही है.

कांग्रेस के आरोप
इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र ने प्रदेश की योगी सरकार को घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए है उन्होनें BJP को 'बात बहादुरों' की सरकार बताया उन्होंने कहा कि जब सरकार सत्ता में आई थी तो इन्होंने JNIP, रिवर फ्रंट घोटाला, आगरा एक्सप्रेस-वे सब में घोटाला बताया था. आज सारे घोटालों की जांच ठंडे बस्ते में चली गई है. उन्होंने कहा सच यह है कि भाजपा सरकार रोज़ नया मुद्दा लाती है और सिर्फ जांच की बात करती है. जो जांच कभी पूरी नही होती. दोषियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होती.
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वहीं शासन के एक आलाधिकारी के मुताबिक सपा सरकार में ये सारी गड़बड़ियां हुई हैं जिसमें वर्तमान सरकार के कुछ अधिकारी भी शामिल हैं. ऐसे में जहां एक तरफ भ्रष्ट अधिकारियों पर सरकार नकेल कस रही है. वहीं विमल शर्मा पर CBI जांच की भी सिफारिश की जा चुकी है.

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First published: November 26, 2019, 12:54 PM IST
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