हिंदू पक्षकारों का आरोप- जानबूझ कर कोर्ट का समय खराब कर रहा है सुन्नी वक्फ बोर्ड

आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है कि बीते 70 साल में इस मामले में जितनी भी देरी हुई है वो सुन्नी वक्फ बोर्ड के कारण हुई है. ये लोग कभी कहते हैं कि अनुवाद ठीक से नहीं हुई कभी कहते हैं कि मुकदमा तैयार नहीं है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 9, 2019, 4:19 PM IST
हिंदू पक्षकारों का आरोप- जानबूझ कर कोर्ट का समय खराब कर रहा है सुन्नी वक्फ बोर्ड
रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने सुन्नी वक्फ बोर्ड पर आरोप लगाया है.
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Updated: August 9, 2019, 4:19 PM IST
अयोध्या(ayodhya) राम जन्म भूमि(ram mandir) मामले की लगातार सुनवाई  के 5 दिन रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने सुन्नी वक्फ बोर्ड पर आरोप लगाया है. हिंदू पक्षकारों का आरोप- जानबूझ कर कोर्ट का समय खराब कर रहा है सुन्नी वक्फ बोर्डःइन लोगों के पास हमेशा बहाना तैयार रहता है.

आगे आचार्य  ने कहा कि अब रोज सुनवाई हो रही है तो उन लोगों ने कह दिया कि 5 दिन सुनवाई ना की जाए. मुख्य पुजारी ने सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास कोई सबूत नहीं है.  क्योंकि वहां पर राम जन्म भूमि है ,राम की ही जमीन है और राम मंदिर ही विराजमान हैं. फैसला हमाेर हक में होगा क्योंकि कोर्ट भी सबूत के आधार पर फैसला सुनाता है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास ना कोई तथ्य है ना अधिकार है और ना ही कोई सबूत है केवल अवरोध करके समय बर्बाद करना है.

आपको बता दें कि अयोध्या मामले में मध्यस्थता की कोशिश नाकाम होने के बाद मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है. 6 अगस्त से शुरू हुई रोजाना सुनवाई का शुक्रवार को चौथा दिन है. पहले तीन दिन सर्वोच्च अदालत में निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान ने अपना पक्ष रखा. आज मुस्लिम पक्ष अपना पक्ष रख रहे हैं. मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने सफ्ताह के पांच दिन सुनवाई का विरोध किया.

इस मामले में गुरुवार को भी सुनवाई हुई और निर्मोही अखाड़ा के साथ रामलला विराजमान की तरफ से भी पक्ष रखा गया. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्‍या रामजन्‍मभूमि को ज्‍यूरिस्टिक पर्सन माना जा सकता है? इस पर रामलला विराजमान के वकील ने जवाब दिया हां रामजन्‍मभूमि को ज्‍यूरिस्टिक पर्सन माना जा सकता है. वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता परासरन ने सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर कहा कि रामजन्मभूमि भी ज्यूरिस्टिक पर्सन हो सकता है और रामलला भी, क्योंकि वो एक मूर्ति नहीं बल्कि देवता हैं. हम उन्हें सजीव मानते हैं.

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First published: August 9, 2019, 4:19 PM IST
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