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Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने रामलला को दी जमीन, हिंदू पक्ष के ये 3 दावे हुए खारिज

News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 11:58 PM IST
Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने रामलला को दी जमीन, हिंदू पक्ष के ये 3 दावे हुए खारिज
अयोध्या में जमीन विवाद के मुद्दे पर फैसले के मद्देनजर पूरी अयोध्या में सुरक्षा चाक चौबंद रखी गई. फोटो: पीटीआई

सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने मुस्लिम (Muslim) पक्ष और हिंदू पक्ष की तमाम दलीलों का जिक्र करते हुए एएसआई (ASI) की रिपोर्ट्स को अहम माना है. कोर्ट ने भले जमीन का अधिकार रामलला विराजमान को दिया है, लेकिन इस मामले में पक्षकार हिंदू पक्ष के दावों को भी खारिज किया है. सबसे बड़ा झटका निर्मोही अखाड़े को लगा है.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 11:58 PM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या (Ayodhya) में राम जन्मभूमि (Ram janam bhoomi) और बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) के बीच जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ ने अपना फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पूरी विवादित जमीन पर रामलला विराजमान का हक माना है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन पर रामलला का दावा मान्य है. इस जमीन पर मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करने के लिए केंद्र सरकार को तीन महीने में ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया गया है. केंद्र सरकार ही ट्रस्ट के सदस्यों का नाम निर्धारित करेगी.



कोर्ट ने मुस्लिम (Muslim) पक्ष और हिंदू पक्ष की तमाम दलीलों का जिक्र करते हुए एएसआई (ASI) की रिपोर्ट्स को अहम माना है. कोर्ट ने भले जमीन का अधिकार रामलला विराजमान को दिया है, लेकिन इस मामले में पक्षकार हिंदू पक्ष के दावों को भी खारिज किया है. सबसे बड़ा झटका निर्मोही अखाड़े को लगा है. कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी स्पष्ट कर दिया कि भले ही ASI को मिला ढांचा गैर मुस्लिम था लेकिन मस्जिद बनाने के लिए किसी मंदिर को तोड़ने के कोई सबूत नहीं मिले हैं.

1. निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज किया

संविधान पीठ ने जन्मभूमि के प्रबंधन का अधिकार मांगने की निर्मोही अखाड़ा की याचिका खारिज कर दी. हालांकि, कोर्ट ने केंद्र से कहा कि मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को किसी तरह का प्रतिनिधित्व दिया जाए. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जमीन के तीन हिस्सों में से एक हिस्सा निर्मोही अखाड़े को भी दिया था. इस फैसले को ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

2.जन्मभूमि न्यास को भी जमीन का मालिकाना हक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने जन्मभूमि न्यास और निर्मोही अखाड़े को मालिकाना हक नहीं दिया. मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन केंद्र और योगी सरकार अयोध्या में देगी. फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन के बाहरी और आंतरिक हिस्से पर रामलला का हक है. इसके लिए एक ट्रस्ट का गठन किया जाए. इस ट्रस्ट का गठन सरकार करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ट्रस्ट में सदस्यों को चुने जाने का अधिकार दिया है. तीन महीने में ट्रस्ट बनने के बाद विवादित जमीन और अधिग्रहित भूमि के बाकी हिस्से को सौंप दिया जाएगा. इसके बाद ट्रस्ट राम मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करेगा.
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3. मस्जिद ढहाना और 1949 में मूर्तियां रखना गैरकानूनी था
कोर्ट ने यह भी कहा कि 1992 में बाबरी मस्जिद को ढहाना और 1949 में मूर्तिया रखना गैरकानूनी था. सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामलला विराजमान को मालिकाना हक दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने माना, देवता एक कानूनी व्यक्ति हैं. राम की ऐतिहासिकता और अयोध्या में उनके जन्म को लेकर कोई विवाद नहीं है, लेकिन मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे ही जन्मस्थान होने की हिंदू पक्षकारों की दलील सरासर आधारहीन है. पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने कहा कि ऐसा किया जाना जरूरी था, क्योंकि 'जो गलतियां की गईं, उन्हें सुधारना सुनिश्चित करना भी' कोर्ट का उत्तरदायित्व है. कोर्ट ने यह भी कहा कि 'सहिष्णुता तथा परस्पर सह-अस्तित्व हमारे देश तथा उसकी जनता की धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्धता को पुष्ट करते हैं.

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First published: November 9, 2019, 5:04 PM IST
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